छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने इस वर्ष गणेशोत्सव को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा माध्यम बना दिया है। शहर में चल रहे 'हमारे बप्पा स्वच्छता के राजा' अभियान ने पूरे इलाके में एक सकारात्मक ऊर्जा भर दी है। इस महाअभियान के दूसरे वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही शहर के कोने-कोने में पर्यावरण के प्रति जागरूकता की लहर दौड़ पड़ी है।
नुक्कड़ नाटक और संगीत के जरिए बप्पा के दरबार में स्वच्छता का पाठ
इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि महानगरपालिका ने लोगों को जागरूक करने के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर बेहद रचनात्मक रास्ते चुने हैं। शहर के विभिन्न सार्वजनिक गणेश पंडालों के सामने कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक और संगीतमय प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। लोकप्रिय धुनों और ताल वाद्यों के सहारे दर्शकों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, सड़क पर कचरा न फेंकने और प्लास्टिक के इस्तेमाल से तौबा करने का संदेश बहुत ही सहजता से समझाया जा रहा है।
मनोरंजन के साथ मिलने वाले इस सामाजिक संदेश का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। विशेषकर युवा वर्ग इन नुक्कड़ नाटकों में खासी रुचि ले रहा है। अब तक शहर के 50 से अधिक प्रमुख गणेश मंडलों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जहां श्रद्धालुओं को यह बताया जा रहा है कि भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ प्रकृति की रक्षा करना भी हमारा उतना ही बड़ा कर्तव्य है।
350 से ज्यादा गणेश मंडलों ने लिया पर्यावरण अनुकूल उत्सव का संकल्प
महानगरपालिका के इस आह्वान को शहरवासियों और गणेश मंडलों का अभूतपूर्व समर्थन मिला है। पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव की परिकल्पना को साकार करने के लिए 350 से अधिक सार्वजनिक गणेश मंडलों ने बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई है। इन सभी सहभागी मंडलों को प्रशासन की ओर से विशेष सहभागिता चिह्न और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए हैं।
- मिट्टी से बनी पारंपरिक गणेश प्रतिमाओं का उपयोग।
- थर्मोकोल और सिंगल-यूज प्लास्टिक की सजावट से पूरी तरह परहेज।
- प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से पंडालों को सजाना।
- विसर्जन के दौरान निर्माल्य (पूजा सामग्री) को सामान्य कचरे से अलग सुरक्षित स्थान पर जमा करना।
त्योहार के अंतिम चरण में मनपा अधिकारियों, मीडियाकर्मियों और पर्यावरण विशेषज्ञों की एक विशेष टीम इन सभी पंजीकृत मंडलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेगी। सर्वश्रेष्ठ और पर्यावरण के अनुकूल कार्य करने वाले मंडलों को आकर्षक पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा, जिससे अन्य आयोजकों को भी प्रेरणा मिल सके।
स्वच्छता रथ से गूंज रहा शहर का कोना-कोना
केवल पंडालों तक ही नहीं, बल्कि इस अभियान के दायरे को पूरे शहर में फैला दिया गया है। महानगरपालिका की ओर से एक विशेष 'स्वच्छता रथ' सड़कों पर उतारा गया है, जो बाजारों, प्रमुख चौराहों, घनी बस्तियों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास घूम-घूमकर लाउडस्पीकर के जरिए लगातार संदेश प्रसारित कर रहा है।
स्कूली बच्चों और युवाओं को जोड़ते हुए यह संदेश दिया जा रहा है कि 'स्वच्छता प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है'। बस्तियों में जाकर सीधे नागरिकों से संवाद किया जा रहा है ताकि वे घर से निकलने वाले कचरे के पृथक्करण के नियमों को अच्छी तरह समझ सकें।
एकजुट प्रयास से संवर रहा संभाजीनगर
महापौर समीर राजूरकर और मनपा आयुक्त अमोल येडगे के कुशल मार्गदर्शन तथा उपायुक्त नंदकिशोर भोंबे के सुनियोजित प्रबंधन के कारण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग इस अभियान को जमीन पर उतारने में पूरी तरह सफल रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यही है कि उत्सव के इन दस दिनों में शहर में कचरे का प्रबंधन बेहतर ढंग से हो सके और भविष्य के लिए एक मिसाल कायम की जा सके।
प्रशासन ने शहर के तमाम नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। गीले और सूखे कचरे को अलग रखना, प्लास्टिक की थैलियों का त्याग करना और बप्पा के चरणों में अर्पित होने वाले निर्माल्य को सही तरीके से ठिकाने लगाना ही इस उत्सव की सच्ची सार्थकता है। नागरिकों के इसी सहयोग से 'स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल छत्रपति संभाजीनगर' के सपने को सच किया जा रहा है।