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IIT बॉम्बे छात्र सुसाइड केस: न्याय के लिए पिता का आजाद मैदान में सत्याग्रह

IIT बॉम्बे छात्र सुसाइड केस: न्याय के लिए पिता का आजाद मैदान में सत्याग्रह

देश के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे एक बार फिर सुसाइड और संस्थान के भीतर कथित उत्पीड़न के मामलों को लेकर चर्चा के केंद्र में है। इस गंभीर प्रकरण में अब न्याय की आस लगाए एक पिता का सब्र जवाब दे चुका है और उन्होंने सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद कर दी है। दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे के पिता रवींद्र वाकोडे ने अपने बेटे की संदिग्ध मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

आजाद मैदान में शुरू हुआ संघर्ष, पुलिस ने दी सीमित अनुमति

सोमवार, 28 सितंबर 2026 को प्राप्त ताजा अपडेट के अनुसार, साहिल वाकोडे के पिता रवींद्र वाकोडे ने मुंबई के आजाद मैदान में धरना शुरू किया है। मुंबई पुलिस प्रशासन ने उन्हें शाम 6 बजे तक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति प्रदान की है। हालांकि, शोकसंतप्त पिता का यह साफ कहना है कि पुलिस द्वारा तय की गई समय सीमा भले ही शाम 6 बजे समाप्त हो जाए, लेकिन न्याय मिलने तक उनका यह संघर्ष और आंदोलन किसी भी कीमत पर थमने वाला नहीं है।

आजाद मैदान में मीडिया से बात करते हुए रवींद्र वाकोडे ने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि वह अपने बेटे की मौत की सच्चाई को सामने लाकर ही दम लेंगे। उनका यह सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा जब तक देश के इस शीर्ष संस्थान के भीतर कथित तौर पर उनके बेटे को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले चेहरों बेनकाब नहीं कर दिया जाता और उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा नहीं किया जाता।

प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े परिवार

इस पूरे मामले की जड़ में IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के एक प्रोफेसर का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। साहिल के पिता ने संस्थान के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का आरोप है कि कैंपस के भीतर साहिल को लगातार जातिगत भेदभाव (Caste Discrimination) और गंभीर मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। इसी प्रताड़ना से उपजे भारी तनाव और दबाव के कारण साहिल ने यह खौफनाक कदम उठाया।

रवींद्र वाकोडे की मांग है कि पुलिस और प्रशासन बिना किसी दबाव के तुरंत प्रभाव से आरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को गिरफ्तार करे। उनका तर्क है कि जब तक मुख्य संदिग्ध से पुलिस कस्टडी में पूछताछ नहीं की जाती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ सकती और संस्थान के भीतर अन्य छात्रों की सुरक्षा भी खतरे में बनी रहेगी।

क्या है पूरी घटना? (18 सितंबर की वह काली तारीख)

यह पूरा दर्दनाक वाकया इस महीने की शुरुआत यानी 18 सितंबर का है। IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष के मेधावी छात्र साहिल वाकोडे ने कैंपस के अपने हॉस्टल कमरे में कथित तौर पर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इस अचानक हुई घटना से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया था और छात्र समुदाय के साथ-साथ देशभर में सनसनी फैल गई थी।

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक, साहिल ने यह चरम कदम उस घटना के कुछ ही घंटों बाद उठाया था जब उसे मिड-सेमेस्टर परीक्षा (Mid-Semester Exam) के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ लिया गया था। परिवार का आरोप है कि परीक्षा हॉल की उस छोटी सी घटना के बाद साहिल को बहुत ज्यादा मानसिक प्रताड़ना दी गई, जिससे वह अंदर से पूरी तरह टूट गया था।

एफआईआर और पुलिस जांच पर टिकी नजरें

घटना के तुरंत बाद परिवार की शिकायत पर पवई पुलिस स्टेशन में सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में स्पष्ट रूप से प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के अलावा मुंबई क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) को भी इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो हर एक एंगल से साक्ष्य जुटाने का प्रयास कर रही है।

दूसरी ओर, संस्थान प्रशासन ने भी इस मामले की आंतरिक और प्रशासनिक स्तर पर लीपापोती से बचने के लिए एक 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति (Committee) का गठन किया है। यह समिति कैंपस के भीतर शैक्षणिक माहौल, छात्र कल्याण और प्रोफेसरों के रवैये से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन समीक्षा कर रही है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ रहा मानसिक तनाव

साहिल वाकोडे का यह मामला केवल एक छात्र की आत्महत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के प्रीमियम एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स (IITs और IIMs) में पढ़ने वाले युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, अकादमिक दबाव और परिसरों में कथित सामाजिक भेदभाव की पुरानी और गहरी होती बीमारी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संस्थानों में छात्रों के लिए काउंसलिंग सेंटर और ग्रीवांस रिड्रेसल मेकैनिज्म (Grievance Redressal Mechanism) को और अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनाने की सख्त जरूरत है।

फिलहाल, सबकी निगाहें मुंबई के आजाद मैदान पर टिकी हैं जहां एक पिता अपनी इकलौते बेटे की मौत के इंसाफ की गुहार लगा रहा है। देखना यह होगा कि मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेती है और क्या आरोपी प्रोफेसर पर कानूनी शिकंजा कसा जा पाता है या नहीं।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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