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भारत के केवल 2 जिलों से गुजरकर पड़ोसी देश की 'लाइफलाइन' बनती है यह नदी, जानें इसका अनोखा सफर

भारत के केवल 2 जिलों से गुजरकर पड़ोसी देश की 'लाइफलाइन' बनती है यह नदी, जानें इसका अनोखा सफर

कुदरत की सीमाएं इंसानी नक्शों से परे होती हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है एशिया की एक बेहद प्राचीन और विशाल नदी, जो निकलती तो तिब्बत के बर्फीले पहाड़ों से है, लेकिन आगे चलकर हमारे पड़ोसी देश की मुख्य 'लाइफलाइन' बन जाती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारतीय भूभाग में यह केवल दो ही जिलों का मेहमान बनती है।

हम बात कर रहे हैं ऐतिहासिक 'सिंधु नदी' (Indus River) की। इतिहास के पन्नों से लेकर आज के भूगोल तक, सिंधु नदी का अपना एक अलग और समृद्ध महत्व रहा है। आइए जानते हैं भारत के लद्दाख से होकर गुजरने वाली इस महान नदी का पूरा सफर और इससे जुड़े बेहद रोचक तथ्य।

कैलाश पर्वत के पास से होता है उद्गम

सिंधु नदी का जन्म तिब्बत के ऊंचे और अति-दुर्गम बर्फीले इलाके में होता है। यह मानसरोवर झील के पास स्थित कैलाश पर्वत श्रृंखला के 'बोखर-चू' (Bokhar Chu) ग्लेशियर से निकलती है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर जन्मी यह नदी शुरुआत में बेहद तेज और विकराल नजर आती है।

तिब्बती भाषा में सिंधु नदी को 'सिंगी खंबन' (Singi Khamban) कहा जाता है, जिसका हिंदी में अर्थ होता है 'शेर का मुख'। अपनी गर्जना और तेज प्रवाह के कारण ही इसे यह नाम मिला है।

भारत के सिर्फ इन दो जिलों से गुजरती है नदी

तिब्बत से निकलने के बाद सिंधु नदी भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में प्रवेश करती है। भारत में इसका सफर बेहद सीमित लेकिन बेहद खूबसूरत है:

  • लेह (Leh): लद्दाख के इस खूबसूरत जिले में सिंधु नदी चट्टानी पहाड़ियों और घाटियों के बीच से अपना रास्ता बनाती है।
  • कारगिल (Kargil): लेह के बाद यह कारगिल जिले से होकर बहती है और फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रास्ते पड़ोसी मुल्क में दाखिल हो जाती है।

भारत में लेह और कारगिल ही वे दो एकमात्र जिले हैं जहां सिंधु नदी बहती है। यहां की नयनाभिराम घाटियों में इसका पानी नीले कांच की तरह चमकता दिखता है।

पाकिस्तान की 'जीवनरेखा' क्यों है सिंधु नदी?

भारत की सीमा लांघने के बाद सिंधु नदी पाकिस्तान में प्रवेश करती है। यह पाकिस्तान की सबसे लंबी और मुख्य नदी है। अरब सागर में गिरने से पहले यह लगभग 3,180 किलोमीटर की दूरी तय करती है।

पाकिस्तान का विशाल कृषि क्षेत्र, सिंचाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से इसी नदी पर निर्भर है। पंजाब और सिंध प्रांत के करोड़ों लोगों के लिए यह नदी किसी वरदान से कम नहीं है, इसीलिए इसे पाकिस्तान की 'लाइफलाइन' कहा जाता है।

सिंधु नदी से जुड़े खास तथ्य:

  • प्राचीन सभ्यता: दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक 'सिंधु घाटी सभ्यता' इसी नदी के किनारे फली-फूली थी।
  • सहायक नदियां: झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से 'पंचनद' कहा जाता है।
  • सिंधु जल समझौता (1960): भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विश्व बैंक की मध्यस्थता में ऐतिहासिक जल संधि हुई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. सिंधु नदी कहां से निकलती है?

सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रेणी के 'बोखर-चू' ग्लेशियर से निकलती है।

2. भारत के किन जिलों से सिंधु नदी बहती है?

भारत में सिंधु नदी केवल केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के दो जिलों— लेह और कारगिल से होकर बहती है।

3. तिब्बत में सिंधु नदी को किस नाम से जाना जाता है?

तिब्बत में इसे 'सिंगी खंबन' कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'शेर का मुख' होता है।

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तनु उपाध्याय

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Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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