देशभर में बदल रहा मौसम का मिजाज, पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी के बाद मैदानी क्षेत्रों में घुली ठंडक
देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों जैसे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी हिस्सों में बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है। इसका असर मैदानी हिस्सों में भी साफ तौर पर देखा जा रहा है, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हवाओं में हल्की ठंडक घुलने लगी है। दूसरी ओर, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण भारत के कई राज्यों में अगले सात दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी जारी की है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान भी जताया गया है।
दक्षिण भारत के इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, 23 अक्टूबर तक तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में भी व्यापक वर्षा का अनुमान है। आईएमडी के मुताबिक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 18-19 अक्टूबर तथा 21-23 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि 20 अक्टूबर को यहां बहुत भारी बारिश की भी संभावना है। इसके अलावा केरल और माहे में 18 से 23 अक्टूबर तक, तटीय कर्नाटक में 20 से 22 अक्टूबर तक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 18 से 23 अक्टूबर तक भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।
पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 17 अक्टूबर को समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान गोवा, तमिलनाडु और केरल में बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा रिकॉर्ड की गई। वहीं तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में सात से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर ध्यान देने और जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी है।
तेज हवाओं, आंधी और बिजली गिरने का खतरा
बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने दक्षिण भारत के कई हिस्सों में तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी है। केरल, माहे और लक्षद्वीप में गरज-चमक, बिजली गिरने तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है, जो बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में भी इसी तरह की मौसमी परिस्थितियां बन सकती हैं। उत्तर और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 21 अक्टूबर तक 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के आसार हैं, जिनके झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकते हैं। पश्चिम भारत में गोवा, कोंकण, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में भी 19 से 20 अक्टूबर तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ आंधी की संभावना जताई गई है।
विभिन्न चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तर हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर पश्चिमी विक्षोभ एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है। इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान, दक्षिण-पश्चिमी मध्य प्रदेश, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर तमिलनाडु से सटे दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर भी चक्रवाती परिसंचरण बने हुए हैं। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से तक टर्फ लाइन फैली है तथा पूर्व-मध्य अरब सागर में कर्नाटक तट से कोमोरिन क्षेत्र तक भी टर्फ बनी हुई है। इन तमाम मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण दक्षिण भारत में बारिश और आंधी की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं।