गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस 2026 समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रगति, नक्सलवाद के खात्मे और विपक्ष की राजनीतिक भूमिका पर खुलकर अपने विचार रखे।
भारत की आर्थिक मजबूती और अडिग संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में देश के बड़े संकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी देश कोई बड़ा और दूरगामी फैसला लेगा, तो रास्ते में रुकावटें और तूफानों जैसी चुनौतियां आएंगी, लेकिन भारत अब रुकने वाला नहीं है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी के दौर के बीच भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और विकास दर को उन्होंने दुनिया के लिए एक मिसाल बताया।
विपक्ष पर कड़ा प्रहार: 'विरोध पक्ष नहीं, अवरोध पक्ष'
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली सहित देश के अन्य हिस्सों में चल रहे आंदोलनों पर पीएम मोदी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का विपक्ष अब 'विरोध पक्ष' की भूमिका से आगे बढ़कर 'अवरोध पक्ष' बन गया है। राजनीतिक हताशा और निराशा के चलते विपक्ष देश के विकास के रास्तों में बाधाएं पैदा कर रहा है। विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापार और अर्थव्यवस्था को हो रहे नुकसान को आम जनता और देश को भुगतना पड़ रहा है, जबकि देश की जनता सब कुछ बहुत करीब से देख रही है।
नक्सलवाद का खात्मा और दिमागी नक्सलवाद की चेतावनी
आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा दावा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि मार्च 2026 तक देश का कोई भी जिला नक्सलवाद से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं रह गया है। सरकार ने जनता से किए गए वादे के अनुसार सुनियोजित रणनीति के तहत काम करते हुए नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि दूरदराज के इलाकों से भले ही हिंसक नक्सलवाद का सफाया हो गया हो, लेकिन 'दिमागी नक्सलियों' का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे वैचारिक और दिमागी नक्सली लगातार देश को खंडित करने की साजिशें रच रहे हैं, जिन्हें सफल नहीं होने दिया जाएगा।
सुरक्षा बलों के बलिदान को नमन और विकास की मुख्यधारा
नक्सलवाद के खिलाफ इस लंबी और कठिन लड़ाई में भारतीय सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को प्रधानमंत्री ने आदरपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए हमारे जवानों ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है और देश उनकी इस शहादत को कभी नहीं भूलेगा। हिंसा और खौफ के साए में जीने वाले देश के कई दूरदराज इलाके अब शांति और सुरक्षा की स्थापना के बाद विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं के सामने शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए और बेहतर अवसर खुल रहे हैं।
देश को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने की अपील
संबोधन के अंत में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने देश को एकजुट रखने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने देशवासियों को आगाह किया कि कुछ ताकतें लगातार देश में सामाजिक और क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने के प्रयास कर रही हैं, जिनके खिलाफ पूरे देश को एकजुट होकर मुकाबला करना होगा। राष्ट्रीय एकता को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने सभी नागरिकों से मिलकर देश की सुरक्षा और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ने की अपील की।