अमित शाह पर 2018 की टिप्पणी से जुड़ा था मामला, स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने दर्ज कराई थी शिकायत
उत्तर प्रदेश की एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में बरी कर दिया है। यह मामला साल 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री और तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणियों से जुड़ा हुआ था। सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, यह मुकदमा सुल्तानपुर के स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा दर्ज कराया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने एक जनसभा या बयान के दौरान अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं, जिससे उनकी और पार्टी की छवि को ठेस पहुंची है। इस शिकायत के आधार पर अदालत में कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाई गई थी।
फरवरी में अदालत में पेश हुए थे राहुल गांधी
इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान इसी वर्ष फरवरी में राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए थे। अदालत में सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से स्पष्ट इनकार किया था। उन्होंने इस पूरी शिकायत को राजनीति से प्रेरित बताया था और कहा था कि उन्हें अनावश्यक रूप से कानूनी दांव-पेच में घसीटा जा रहा है।
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने अदालत के समक्ष उनका पक्ष रखा था। उनके वकील ने इस मामले को पूरी तरह से आधारहीन करार दिया था और अदालत से अनुरोध किया था कि इस याचिका को खारिज किया जाए। डिफेंस पक्ष की दलीलों और सबूतों के आधार पर अदालत ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए कांग्रेस नेता को राहत दी और उन्हें इस मामले से बरी कर दिया।