कसमार थाने के भीतर भाजपा कार्यकर्ता पर हमले का आरोप, एसपी ने बेरमो एसडीपीओ को सौंपी जांच
झारखंड के बोकारो जिले में कसमार थाने के भीतर एक भाजपा कार्यकर्ता की पिटाई का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक प्रतिनिधिमंडल जिला अध्यक्ष सुरेंद्र राज के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक (एसपी) नाथू सिंह मीना से मिला और थानेदार पर कार्रवाई की मांग उठाई। इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से बेरमो एसडीपीओ को पूरे घटनाक्रम की जांच का आदेश दिया गया है।
घटना के संबंध में जिलाध्यक्ष ने जानकारी दी कि भाजपा कार्यकर्ता अजय कुमार उर्फ अजय भारती को कसमार थाने के थानेदार कुंदन कुमार ने किसी कार्य से थाने बुलाया था। जब वे थाने पहुंचे, तो वहां पहले से ही कुछ अन्य लोग मौजूद थे। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के सामने ही उन लोगों ने अजय कुमार पर हमला कर दिया और उन्हें पीटकर घायल कर दिया। भाजपा नेताओं ने इसे पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बताते हुए थानेदार की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने एसपी से की मुलाकात
पार्टी कार्यकर्ता पर हुए हमले की सूचना मिलते ही बोकारो जिला भाजपा संगठन सक्रिय हो गया। जिलाध्यक्ष सुरेंद्र राज के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने एसपी नाथू सिंह मीना को पूरी घटना से अवगत कराया। नेताओं ने मांग की कि थानेदार कुंदन कुमार के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए और घटना में शामिल फरार मुख्य आरोपित को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।
इस प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष के अलावा जिला उपाध्यक्ष रामलाल सोरेन, जिला मंत्री एंजेला सिंह, बोकारो नगर अध्यक्ष विशाल गौतम, नगर उपाध्यक्ष राज रंजन, अमित कुमार, महामंत्री लाल बाबू सिंह और ममता गोस्वामी सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद रहे।
थानेदार और पुलिस पक्ष का बयान
दूसरी ओर, कसमार थानेदार कुंदन कुमार ने भाजपा नेताओं द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि थाने के अंदर इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है। यह विवाद थाने के बाहर बाजार क्षेत्र में हुआ था। थानेदार के अनुसार, घटना की सूचना मिलने और पीड़ित अजय कुमार की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त होने के बाद पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर ली थी।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में नामजद एक आरोपित सत्यवर्द्धन जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया और उसे अदालत में पेश किया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों पक्ष आपसी रिश्तेदार (गोतिया) हैं और उनके बीच पहले से ही जमीन से जुड़ा पुराना विवाद चला आ रहा है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है।