झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अनुरोध के बावजूद धनबाद जिला प्रशासन बाबूडीह स्थित बाड़ामुड़ी खटाल को खाली कराने की कार्रवाई पर अड़ा हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर शुक्रवार को भी बाड़ामुड़ी के निवासियों को हटाने के लिए नोटिस देने की प्रक्रिया जारी रही, जिससे वहां रह रहे दो से अधिक परिवारों के बीच संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बाबूडीह क्षेत्र के बारामुड़ी खटाल में लगभग दो दशकों से यानी वर्ष 2005 से 200 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें पूर्व में प्रशासन द्वारा ही वहां बसाया गया था, जिसके बाद उन्होंने अपने आशियाने बनाकर अपनी आजीविका चलानी शुरू की। हालांकि, अब जिला प्रशासन द्वारा इन बस्तियों को हटाने के लिए लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं, जिसके खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिल रहा है।
झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का हस्तक्षेप
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महानगर संगठन सचिव सुधीर कुमार यादव और सुंदर प्रसाद यादव द्वारा इस मामले की सूचना राज्य आयोग को दिए जाने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ कदम उठाया गया। आयोग के चेयरमैन जानकी प्रसाद यादव के निर्देश पर सदस्य सचिव विनोद कुमार बांक ने 29 अक्टूबर 2026 को धनबाद उपायुक्त को आधिकारिक पत्र भेजा।
आयोग के पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वर्ष 2005 से रह रहे गरीब परिवारों को अचानक बिना किसी पुख्ता व्यवस्था के हटाया जाना उचित नहीं है। अचानक बेदखल किए जाने से इन परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा और उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी बाधित होगी। आयोग ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इस बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। साथ ही यह भी सुझाव दिया है कि खटाल के लोगों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच किसी वरिष्ठ समिति से कराई जाए और यदि जरूरत पड़े तो इन परिवारों का विधिवत पुनर्वास किया जाए।
धनबाद उपायुक्त का पक्ष और प्रशासनिक मजबूरियां
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा पत्र भेजे जाने के संबंध में पूछे जाने पर धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस तरह का कोई भी पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। डीसी ने कहा कि प्रशासन किसी भी नागरिक को बेवजह उजाड़ने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बाड़ामुड़ी क्षेत्र में सड़क पर अतिक्रमण, आपराधिक गतिविधियों की शिकायतें और मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ देने जैसी समस्याओं पर रोक लगाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने को लेकर शासन की ओर से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही जिला प्रशासन अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहा है।
आयोग के अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि धनबाद के बाड़ामुड़ी में दो दशक से अधिक समय से पिछड़ा समाज के दो सौ से ज्यादा परिवार रह रहे हैं और जब उन्हें खुद प्रशासन ने वहां बसाया था, तो अब उन्हें अचानक इस प्रकार उजाड़ना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने पुष्टि की कि आयोग की ओर से धनबाद के डीसी को अनुरोध पत्र भेजने के साथ ही इस विषय पर बातचीत भी की गई है, जिस पर डीसी ने विचार करने का आश्वासन दिया है। आयोग ने इस पूरी समस्या के एक स्थायी और मानवीय समाधान की मांग की है।