सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की गायन और नृत्य प्रतिभा को मिलेगा बड़ा मंच, जेपीसी और जेसीईआरटी की ओर से की गई हैं व्यापक तैयारियां
झारखंड के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की छिपी हुई कला और प्रतिभा को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से आयोजित 'झारखंड स्कूल आइडल 2026' (झारखंड स्कूल टैलेंट सर्च) का राज्य स्तरीय ग्रैंड फिनाले 31 अक्टूबर 2026 को राजधानी रांची के ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस (Audrey House) में आयोजित किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित आयोजन को लेकर राज्यभर के स्कूली विद्यार्थियों और शिक्षा विभाग में खासा उत्साह देखा जा रहा है।आयोजक और उद्देश्य
यह भव्य प्रतियोगिता झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को उनकी छिपी हुई प्रतिभा दिखाने के लिए एक उपयुक्त और बड़ा मंच प्रदान करना है। इसके माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के उन बच्चों को भी अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है, जो संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा को व्यापक स्तर पर नहीं दिखा पाते हैं।जिला और प्रमंडल स्तर से पहुंचे शीर्ष प्रतिभागी
ग्रैंड फिनाले तक पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को कई चरणों की प्रतियोगिताओं से गुजरना पड़ा है। जिला और प्रमंडल (संभागीय) स्तर पर आयोजित 'सुर-ताल संग्राम' प्रतियोगिता के जरिए इन प्रतिभाशाली बच्चों का चयन किया गया है। जानकारी के अनुसार, विभिन्न प्रमंडलों से कुल चयनित 96 या शीर्ष 40 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी इस ग्रैंड फिनाले में अपनी कला का शानदार प्रदर्शन करेंगे। ये सभी छात्र मुख्य रूप से गायन (Singing) और नृत्य (Dance) विधाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे।विशेष प्रशिक्षण और ग्रूमिंग सत्र
अंतिम चरण के मुकाबले से पहले सभी चयनित बच्चों के कौशल को और अधिक निखारने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में मंच पर उतरने से पूर्व सभी बच्चों को तराशने के उद्देश्य से 29 और 30 अक्टूबर को रांची स्थित 'झारखंड शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद' (JCERT) परिसर में विशेष प्रशिक्षण और ग्रूमिंग सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा बच्चों को मंच संचालन, गायन और नृत्य की बारीकियों से अवगत कराया गया है ताकि वे फाइनल मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। यह प्रतियोगिता राज्य के पांचों प्रमंडलों के स्कूली बच्चों के हुनर को तराशने और उन्हें एक बड़ी राज्य स्तरीय पहचान दिलाने का एक सशक्त माध्यम साबित हो रही है।