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झारखंड पुलिस का हाई-टेक अवतार, 1000 से ज्यादा अधिकारी ले रहे वैज्ञानिक ट्रेनिंग

झारखंड पुलिस का हाई-टेक अवतार, 1000 से ज्यादा अधिकारी ले रहे वैज्ञानिक ट्रेनिंग

बदलते दौर के साथ अपराध के तरीके भी तेजी से हाई-टेक होते जा रहे हैं, और इसी चुनौती से पार पाने के लिए झारखंड पुलिस ने भी अपनी रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव किया है। अपराधियों पर शिकंजा कसने और न्याय प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से झारखंड पुलिस अपने जांच अधिकारियों को वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान (Scientific and Technical Investigation) के गुर सिखा रही है। इस विशेष पहल के तहत अब तक राज्यभर के एक हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जो आने वाले दिनों में राज्य की कानून व्यवस्था को एक नया आयाम देने का काम करेगा।

केंद्रीय एजेंसियों के विशेषज्ञों से मिल रही है ट्रेनिंग

इस मेगा ट्रेनिंग प्रोग्राम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें देश की शीर्ष केंद्रीय जांच एजेंसियों (Central Investigation Agencies) के अनुभवी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। एएसआई (ASI) से लेकर दारोगा, इंस्पेक्टर और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को आधुनिक फॉरेंसिक साइंस, डिजिटल एविडेंस कलेक्शन, और साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन के उन्नत तरीकों से रूबरू कराया जा रहा है। पारंपरिक पुलिसिंग के दिनों को पीछे छोड़ते हुए अब झारखंड पुलिस का यह दस्ता अपराध की हर एक परत को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सुलझाने के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है।

आगामी 12 से 16 अक्टूबर को होगा विशेष सत्र

जांच की गुणवत्ता में सुधार लाने की यह प्रक्रिया यहीं रुकने वाली नहीं है। आगामी 12 से 16 अक्टूबर 2026 के दौरान राजधानी रांची के होटवार स्थित प्रतिष्ठित अनुसंधान प्रशिक्षण विद्यालय में एक और बड़ा विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में अधिकारियों को बेहतर और प्रभावी अनुसंधान (Effective Investigation) के व्यावहारिक तौर-तरीके सिखाए जाएंगे। इस सत्र की सबसे खास बात यह है कि इसे हाइब्रिड मोड यानी ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया जा रहा है, ताकि सुदूर जिलों के अधिकारी भी अपनी ड्यूटी प्रभावित किए बिना इस हाई-लेवल ट्रेनिंग का हिस्सा बन सकें।

नए कानूनों और यूएपीए (UAPA) की बारीकियों पर विशेष जोर

देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों जैसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के मैदानी क्रियान्वयन को लेकर भी झारखंड पुलिस बेहद गंभीर नजर आ रही है। पुलिस मुख्यालय की ओर से पहले ही इन तीनों नए कानूनों के सूक्ष्म और सटीक प्रयोग को लेकर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

इसके अलावा, हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के दिग्गज विशेषज्ञों के जरिए राज्य के अनुसंधान पदाधिकारियों को गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) पर विशेष मास्टरक्लास दी गई थी। झारखंड में नक्सल प्रभावित और आतंकी गतिविधियों से जुड़े जितने भी संवेदनशील मामले दर्ज हैं, उनमें इस कड़े कानून का इस्तेमाल किया जाता है। एनआईए के विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों को समझाया कि ऐसे मामलों में कोर्ट में टिकने वाले पुख्ता सबूत कैसे जुटाए जाएं और डिजिटल या भौतिक साक्ष्यों का संकलन किस प्रकार किया जाना चाहिए, ताकि अपराधियों को सजा दिलाने में कोई कानूनी पेंच न फंसे।

मासिक आधार पर चल रही है क्षमता निर्माण की प्रक्रिया

यह कोई इक्का-दुक्का या औपचारिकता वाला कार्यक्रम नहीं है, बल्कि झारखंड पुलिस महकमे में क्षमता निर्माण (Capacity Building) की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बन चुकी है। हर महीने आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए अलग-अलग विषयों पर विशेष कोर्स डिजाइन किए जा रहे हैं। राज्य के पुलिस नेतृत्व का मानना है कि जब तक विवेचक यानी जांच अधिकारी तकनीकी रूप से दक्ष नहीं होंगे, तब तक अपराधियों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) को मनमुताबिक स्तर पर नहीं पहुंचाया जा सकता।

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों को अदालतों में मजबूती से पेश करना।
  • नया लीगल फ्रेमवर्क: BNS, BNSS और BSA के तहत तेज और पारदर्शी जांच।
  • विशेष कानून: UAPA जैसे गंभीर मामलों की गुणवत्तापूर्ण और त्रुटिहीन विवेचना।
  • हाइब्रिड ट्रेनिंग: रांची के होटवार स्थित विद्यालय में ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाओं का संचालन।

आम जनता में बढ़ा है विश्वास

पुलिस के इस आधुनिकीकरण और ट्रेनिंग अभियान से आम जनता और न्यायविदों के बीच भी एक सकारात्मक संदेश गया है। अदालतों में अक्सर तकनीकी खामियों या कमजोर सबूतों के कारण आरोपियों के छूटने का जोखिम रहता है, लेकिन इस तरह की प्रोफेशनल ट्रेनिंग से पुलिसिया जांच का स्तर काफी ऊंचा उठेगा। आने वाले महीनों में झारखंड के हर जिले में इन प्रशिक्षित अधिकारियों की तैनाती से पुलिसिंग का चेहरा पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा, जो राज्य में अपराध नियंत्रण और कानून के राज को और अधिक सुदृढ़ करने का काम करेगा।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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