रांची के चिकित्सा जगत में स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम उठाया गया है। राजधानी के जाने-माने पैनासिया सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में विश्व हृदय दिवस के अवसर पर एक विशेष और नि:शुल्क कार्डियक हेल्थ चेक-अप कैंप का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आम जनता के बीच हृदय स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं को दूर करना और उन्हें समय रहते सतर्क करना था। इस आयोजन में शहर के तमाम हिस्सों से आए 100 से अधिक मरीजों और जागरूक नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी सेहत की जांच कराई।
बढ़ती हृदय समस्याओं के बीच जागरूकता की पहल
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित जीवनशैली के कारण दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। कम उम्र में भी लोगों को कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसीं बात को ध्यान में रखते हुए पैनासिया हॉस्पिटल द्वारा इस कैंप का आयोजन किया गया था। शिविर में आए लोगों की न केवल सामान्य स्वास्थ्य जांच की गई, बल्कि उनके ब्लड प्रेशर, शुगर और ईसीजी से जुड़े विभिन्न टेस्ट भी नि:शुल्क किए गए ताकि हृदय संबंधी जोखिमों का समय रहते आकलन किया जा सके।
अस्पताल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का एक और सबसे बड़ा आकर्षण सीपीआर (CPR) और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) का व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल का दौरा पड़ने के शुरुआती कुछ मिनट मरीज की जान बचाने के लिए सबसे अहम होते हैं। ऐसे में यदि आसपास मौजूद लोग सीपीआर की सही तकनीक जानते हैं, तो मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों ने साझा किए दिल की सेहत से जुड़े राज
कार्यक्रम के दौरान अस्पताल के जाने-माने कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिनव कुमार ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे हमारे खान-पान और मानसिक तनाव का सीधा असर हमारे दिल पर पड़ता है।
हार्ट अटैक या हृदय रोग अचानक नहीं आते, बल्कि हमारा शरीर लंबे समय से इसके संकेत दे रहा होता है। जरूरत है तो बस उन शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचानने और नियमित रूप से अपनी मेडिकल जांच कराने की। - डॉ. अभिनव कुमार, कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट
डॉ. कुमार ने लोगों को धूम्रपान से दूर रहने, नियमित रूप से वॉक या एक्सरसाइज करने और अपने दैनिक आहार में हरी सब्जियों व फलों को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि किस तरह से उच्च रक्तचाप (High BP) और डायबिटीज को नियंत्रित रखकर दिल की कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
आपात स्थिति में कैसे बचाएं जान? मिला प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
शिविर का सबसे व्यावहारिक और जीवनरक्षक हिस्सा बीएलएस (BLS) और सीपीआर (CPR) का लाइव डेमोंस्ट्रेशन रहा। ट्रेनर विशाल सिंह ने बहुत ही सरल और प्रभावी तरीके से लोगों को सिखाया कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक दिल का दौरा पड़े या वह बेहोश होकर गिर पड़े, तो तुरंत क्या करना चाहिए।
सीपीआर प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:
- मरीज के बेहोश होने पर तुरंत उसकी नब्ज और सांस की जांच करें।
- मरीज को समतल और कठोर जमीन पर लिटाकर छाती के बीचों-बीच अपने दोनों हाथों से दबाव (Compression) दें।
- दबाव की गति एक मिनट में लगभग 100 से 120 बार होनी चाहिए।
- तुरंत नजदीकी अस्पताल या एम्बुलेंस सेवा को कॉल करें।
प्रशिक्षण सत्र में हिस्सा लेने वाले लोगों ने पुतले (Manikin) पर खुद हाथ आजमाकर सीपीआर देने का अभ्यास किया। प्रतिभागियों का कहना था कि इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण हर नागरिक के लिए अनिवार्य होना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर वे किसी कीमती जान को बचा सकें।
समाज की साझा जिम्मेदारी है स्वास्थ्य सुरक्षा
कार्यक्रम के समापन पर पैनासिया सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीओओ मानस लाभ ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना केवल अस्पतालों और डॉक्टरों का व्यावसायिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक सरोकार है।
मानस लाभ ने आगे कहा, "हार्ट केयर और मेडिकल अवेयरनेस आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। हमारा अस्पताल भविष्य में भी इस तरह के जनहितैषी स्वास्थ्य शिविर, मेडिकल स्क्रीनिंग और जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन लगातार करता रहेगा, ताकि समाज के हर वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।"
भविष्य के लिए प्रेरणा
इस नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि सही समय पर सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो बड़ी से बड़ी स्वास्थ्य आपदाओं से मुकाबला किया जा सकता है। कैंप में शामिल हुए मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों की इस पहल की जमकर सराहना की। लोगों का मानना है कि ऐसे जागरूकता अभियानों से न केवल लोगों में स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता आती है, बल्कि वे अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क भी हो जाते हैं।