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Kajari Teej 2026: आज रखा जा रहा है कजरी तीज का व्रत, पूजा थाली में इन 5 चीजों के बिना अधूरी है पूजा

Kajari Teej 2026: आज रखा जा रहा है कजरी तीज का व्रत, पूजा थाली में इन 5 चीजों के बिना अधूरी है पूजा

पति की लंबी उम्र, खुशहाल वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ रखा जाने वाला महापर्व कजरी तीज आज यानी 31 अगस्त 2026, सोमवार को बेहद धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। उत्तर भारत के कई प्रमुख राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। पंचांग के अनुसार, यह व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है।

अखंड सौभाग्य का प्रतीक है कजरी तीज का पर्व

सनातन संस्कृति में तीज के त्योहारों का विशेष स्थान है। हरियाली और कजरी तीज मुख्य रूप से प्रकृति, प्रेम और समर्पण के प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का पुनर्मिलन हुआ था। इसी पौराणिक प्रसंग के आधार पर माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया था। यही वजह है कि सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए इस कठिन व्रत का पालन करती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से गौरी-शंककर की पूजा-अर्चना करती हैं।

पूजा थाली में सोलह श्रृंगार का महत्व

कजरी तीज के पावन अवसर पर माता पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। हालांकि, यदि आपके पास श्रृंगार की पूरी सोलह चीजें उपलब्ध न भी हों, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। धर्मशास्त्रों के जानकारों के अनुसार, सुहाग से जुड़ी कुछ बेहद खास और प्रमुख चीजों को पूजा की थाली में शामिल करने मात्र से ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इन वस्तुओं को माता रानी को अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं और आपसी प्रेम प्रगाढ़ होता है।

पूजा थाली में जरूर शामिल करें ये 5 चीजें

आइए विस्तार से जानते उन पांच अनिवार्य चीजों के बारे में जिन्हें कजरी तीज की पूजा थाली में रखना बेहद जरूरी माना गया है:

  • सिंदूर - अखंड सौभाग्य का प्रतीक: कजरी तीज की पूजा थाली का सबसे पहला और मुख्य हिस्सा सिंदूर है। सिंदूर को स्त्री के सुहाग, पवित्रता और अखंड सौभाग्य का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं पूजा के दौरान मां पार्वती को सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर उसी सिंदूर से अपनी मांग भरती हैं। इसे पति की लंबी आयु और दीर्घायु का वरदान प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
  • मेहंदी - वैवाहिक जीवन में खुशहाली: हिंदू संस्कृति में मेहंदी को केवल श्रृंगार की वस्तु नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का संवाहक माना जाता है। कजरी तीज पर मां पार्वती को मेहंदी अवश्य अर्पित करें। पूजा संपन्न होने के बाद इस मेहंदी को प्रसाद के रूप में अपने हाथों पर जरूर रचाएं। माना जाता है कि हाथों में जितनी गहरी मेहंदी रचती है, वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी का रिश्ता उतना ही मजबूत और मधुर होता है।
  • लाल या हरी चूड़ियां - प्रकृति और प्रेम का रंग: इस पावन व्रत की पूजा में कांच या लाख की लाल और हरी चूड़ियों का होना अनिवार्य है। हरा रंग प्रकृति, हरियाली और जीवन में नए उल्लास का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ऊर्जा और सुहाग का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि इस दिन महिलाएं पारंपरिक रूप से हरे या लाल रंग की पोशाक पहनती हैं और हाथों में मेल खाती हुई चूड़ियां सजाती हैं।
  • बिंदी - सौभाग्य एवं सौंदर्य की पहचान: सोलह श्रृंगार में माथे पर सजी बिंदी स्त्री के सौंदर्य और सुहागिन होने की पहचान है। पूजा थाली में लाल रंग की गोल बिंदी का पत्ता अवश्य रखें। माता पार्वती को बिंदी अर्पित करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है और पारिवारिक जीवन में कभी भी सुख-शांति की कमी नहीं होती है।
  • सुहाग की चुनरी या वस्त्र: माता रानी को अर्पित करने के लिए एक छोटी लाल या गुलाबी चुनरी भी पूजा थाली का अहम हिस्सा होनी चाहिए। माता को चुनरी ओढ़ाकर सुहागन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं।

कजरी तीज व्रत के दौरान किन नियमों का रखें ध्यान?

धार्मिक अनुष्ठानों की अपनी कुछ मर्यादाएं और नियम होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य माना जाता है। कजरी तीज के इस पवित्र व्रत को करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

  • यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है जिसमें पूरे दिन और रातभर अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग किया जाता है (निर्जला उपवास)।
  • व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान-ध्यान करके तथा मां गौरी की पुनः पूजा-अर्चना करने के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।
  • इस पूरे दिन अपने मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना चाहिए। किसी से भी वाद-विवाद करने या किसी के प्रति मन में द्वेष या गलत विचार लाने से बचना चाहिए।
  • कजरी तीज के दिन सुहागिन महिलाओं को काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। इस दिन इन रंगों को पूरी तरह वर्जित माना गया है।
  • पूजा के दौरान सोलह श्रृंगार करना बेहद शुभ फलदायी होता है। इसलिए संभव हो तो पूरी सज-धज के साथ ही पूजा स्थल पर बैठें।
  • वस्त्रों के चयन में हरे, लाल, पीले या गुलाबी रंगों को प्राथमिकता दें, क्योंकि ये रंग सौभाग्य और सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं।

कुंवारी कन्याओं के लिए भी है खास महत्व

कजरी तीज का व्रत केवल सुहागिन महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि योग्य वर की प्राप्ति के लिए कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत का पालन करती हैं। मान्यता है कि जो अविवाहित लड़कियां सच्चे मन से माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं, उन्हें मनचाहे और योग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विवाह में आ रही किसी भी प्रकार की रुकावट या बाधा इस व्रत के प्रभाव से स्वतः समाप्त हो जाती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो कजरी तीज का पर्व भारतीय संस्कृति में महिलाओं के आपसी प्रेम, संस्कृति और अटूट विश्वास का अनूठा संगम है। आज के दिन देश के विभिन्न कोनों में पारंपरिक लोकगीतों (कजरी गायन) के साथ इस त्योहार को मनाया जा रहा है। यदि आप भी आज यह व्रत रख रही हैं, तो पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा संपन्न करें, ताकि माता पार्वती और महादेव की असीम कृपा आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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