सरकारी दफ्तरों में अक्सर बाबुओं के चक्कर काटते-काटते लोगों के जूते घिस जाते हैं, लेकिन कई बार कुछ ऐसे अनोखे वाकये सामने आ जाते हैं जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाते हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां शस्त्र लाइसेंस (Gun License) को अपने नाम कराने पहुंचे एक युवक को जिलाधिकारी (DM) ने कुछ ऐसा कह दिया कि वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया।
मुंह में गुटखा और शस्त्र लाइसेंस की अर्जी
मामला कानपुर कलेक्ट्रेट का है। वरासत के आधार पर अपने पिता का शस्त्र लाइसेंस अपने नाम ट्रांसफर कराने के लिए एक युवा आवेदक दफ्तर पहुंचा था। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद जब उसे डीएम के सामने पेश किया गया, तो नजारा थोड़ा अजीब था। युवक के मुंह में पान मसाला या गुटखा दबा हुआ था और वह उसे चबा रहा था।
सरकारी दफ्तर की गरिमा और एक जिम्मेदार नागरिक से जुड़ी जिम्मेदारी को देखते हुए डीएम ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने कागजों से नजर हटाकर सीधे युवक की तरफ देखा और बड़े ही अनोखे अंदाज में उसे सीख दी।
'पहले पान मसाला छोड़ो, तब सोचेंगे'
सूत्रों के मुताबिक, जब युवक अपनी फाइल लेकर डीएम के सामने खड़ा हुआ, तो अधिकारी ने उससे कहा कि पहले अपने मुंह से पान मसाला छोड़ो। हथियार जैसी खतरनाक और संवेदनशील चीज संभालने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से अनुशासित होना बहुत जरूरी है। जो शख्स अपनी सेहत और आदतों पर काबू नहीं रख सकता, उसे सुरक्षा के लिए हथियार देना कितना जायज है? डीएम की इस दो टूक बात ने युवक को सकते में डाल दिया।
परिवार और ग्राम प्रधान से मांगा गया शपथ पत्र
सिर्फ गुटखा छोड़ने की नसीहत पर ही बात खत्म नहीं हुई। शस्त्र लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकने और आवेदक की मानसिक स्थिति व पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच के लिए डीएम ने कुछ ऐसी शर्तें रख दीं, जिन्होंने हर किसी का ध्यान खींचा।
- पत्नी का शपथ पत्र: आवेदक की पत्नी से यह लिखित में लिया जाएगा कि उसे अपने पति को शस्त्र लाइसेंस दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है और घर में किसी तरह के घरेलू विवाद की स्थिति नहीं है।
- पिता और बाबा का एफिडेविट: परिवार के बुजुर्गों की सहमति भी अनिवार्य कर दी गई है।
- ग्राम प्रधान का प्रमाण पत्र: गांव के जिम्मेदार प्रतिनिधि यानी ग्राम प्रधान से भी एक शपथ पत्र लाने को कहा गया है, जिसमें यह प्रमाणित हो कि युवक का चरित्र और आचरण गांव में उत्तम है और वह किसी आपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं है।
क्यों उठाया गया ऐसा सख्त कदम?
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि आज के समय में हथियारों का लाइसेंस पाना जितना आसान समझा जाता है, उसके सामाजिक परिणाम उतने ही गंभीर हो सकते हैं। कानपुर प्रशासन इन दिनों शस्त्र लाइसेंसों के मामलों में बेहद सतर्कता बरत रहा है। सड़क पर रोब दिखाने, हवा में फायरिंग करने या पारिवारिक कलह के चलते लाइसेंसी हथियारों के दुरुपयोग के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।
यही वजह है कि अब आवेदकों की केवल कागजी पात्रता ही नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत आदतों, सामाजिक आचरण और पारिवारिक सहमति को भी परखा जा रहा है ताकि लाइसेंस किसी गलत हाथ में न जाए।
सोशल मीडिया पर हो रही है चर्चा
यह मामला अब कानपुर के प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बन गया है। लोग डीएम के इस फैसले की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को इसी तरह की सख्ती दिखानी चाहिए ताकि हथियारों के लाइसेंस का स्टेटस सिंबल की तरह इस्तेमाल होना बंद हो सके। वहीं, दूसरी ओर वह युवक अब अपनी पत्नी, पिता और ग्राम प्रधान से शपथ पत्र बनवाने के चक्कर में दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
