बनारस यानी काशी का नाम आते ही मन में घाटों की छटा और शांत गंगा का एक विहंगम दृश्य उभर आता है। लेकिन इन दिनों देव दीपावली और पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार रहने वाली काशी के कुछ इलाकों में हालात बिल्कुल जुदा हैं। एक तरफ जहां मुख्य धारा में गंगा नदी का जलस्तर कम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर की दूसरी महत्वपूर्ण नदी 'वरुणा' उफान पर है। इस विरोधाभास ने स्थानीय प्रशासन और नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की नींद उड़ा दी है।
आम तौर पर लोगों का यह मानना होता है कि जब मुख्य नदी (गंगा) का पानी कम होगा, तो उसकी सहायक नदियां भी शांत हो जाएंगी। हालांकि, प्रकृति के अपने नियम और भौगोलिक परिस्थितियां कई बार इस समीकरण को पूरी तरह बदल देती हैं। वरुणा नदी का यह तेवर इस समय काशी के शहरी भूगोल के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
वाराणसी में वरुणा नदी क्यों ले रही है रौद्र रूप?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गंगा का जलस्तर घट रहा है, तब वरुणा नदी क्यों उफान पर है? इसके पीछे एक वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण छिपा है। जानकारों के अनुसार, जब गंगा नदी का जलस्तर अपने पीक पर होता है और फिर अचानक घटना शुरू होता है, तो गंगा का बैकवाटर (उल्टा बहने वाला पानी) वरुणा नदी के मुहाने पर दबाव बनाता है।
इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों में स्थानीय स्तर पर हुई भारी बारिश का पानी भी नालों और छोटी जलधाराओं के जरिए वरुणा में आकर गिरता है। वरुणा की भौगोलिक बनावट और शहरीकरण के कारण जल निकासी की धीमी गति मिलकर इसके जलस्तर को अचानक बढ़ा देती है। यही वजह है कि गंगा के घटने के बावजूद वरुणा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर गया है और यह उफान पर है।
कौन-से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
वरुणा के इस आक्रामक तेवर से वाराणसी के कई निचले रिहायशी इलाकों में पानी घुस आया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नदी के बढ़ते जलस्तर की चपेट में मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्र आए हैं:
- सरैया: नदी के सबसे पास बसा यह इलाका जलमग्न हो चुका है।
- पक्खीपुरा: यहां गलियों में पानी भर जाने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।
- ढेलवरिया: इस क्षेत्र के निचले मकानों में पानी घुसने से घरेलू सामान खराब हो गया है।
- नक्खीघाट: ट्रैफिक और आवागमन पर इसका सीधा असर पड़ा है।
- आदि केशव घाट के आसपास के इलाके: यह संगम के करीब होने के कारण सबसे पहले प्रभावित होता है।
इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए रोजाना का कामकाज ठप पड़ गया है। कई घरों की भूतल की मंजिलें पानी में डूब चुकी हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों या अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ रही है।
प्रशासन की ओर से क्या हो रही है कार्रवाई?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें पूरी तरह से मुस्तैद हो गई हैं। प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त की जा रही है और लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को सतर्क रहने की अपील की जा रही है। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्यों के तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- बाढ़ राहत शिविरों की स्थापना की गई है जहां विस्थापित लोगों के रहने और खाने-पीने का पुख्ता इंतजाम है।
- फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए नावों का संचालन किया जा रहा है।
- स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तैनात किया गया है ताकि जलभराव से फैलने वाली बीमारियों (जैसे डायरिया, मलेरिया) से बचा जा सके।
- नुकसान का आंकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीमों को भी फील्ड में उतार दिया गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से शुरुआती मदद मिलनी शुरू हो गई है, लेकिन पानी का स्तर और बढ़ने की आशंका ने उनकी चिंता को दोगुना कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और upstream से आने वाले पानी पर अधिकारियों की पैनी नजर बनी हुई है।
