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अमेरिका में मोहन भागवत के दौरे पर मचा बवाल, USCIRF चीफ ने की वीजा रद्द करने की मांग

अमेरिका में मोहन भागवत के दौरे पर मचा बवाल, USCIRF चीफ ने की वीजा रद्द करने की मांग

भारतीय सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब अमेरिका से एक बेहद सनसनीखेज और कड़ा बयान सामने आया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं, जिस पर अमेरिकी संस्था 'यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम' (USCIRF) के कमिश्नर आसिफ महमूद ने तीखी आपत्ति जताई है। आसिफ महमूद ने न केवल मोहन भागवत की इस यात्रा पर गहरी चिंता व्यक्त की है, बल्कि उनके वीजा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और आरएसएस के सदस्यों पर अमेरिका में प्रतिबंध लगाने की मांग तक कर डाली है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंध बेहद संवेदनशील और मजबूत दौर से गुजर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के धार्मिक और वैचारिक संगठनों से जुड़े नेताओं के दौरों पर हमेशा से ही बारीक नजर रखी जाती है, लेकिन किसी अमेरिकी सरकारी आयोग के प्रमुख द्वारा इस तरह की खुलकर मांग सामने आना एक बड़े कूटनीतिक भूचाल का संकेत दे रहा है।

आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपने संगठन के विस्तार, वैचारिक संवाद और प्रवासी भारतीयों के बीच संपर्क साधने के उद्देश्य से अक्सर विभिन्न देशों के दौरे करते हैं। उनके इस अमेरिकी दौरे का मकसद भी भारतीय प्रवासियों से जुड़ना और सांस्कृतिक मूल्यों को साझा करना है। हालांकि, USCIRF के वाइस चेयरमैन या कमिश्नर के रूप में अपनी बात रखते हुए आसिफ महमूद ने संघ की विचारधारा और उसकी नीतियों को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं।

आसिफ महमूद का दावा है कि इस तरह के संगठनों के प्रमुखों का अमेरिका में प्रवेश देश के धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत हो सकता है। उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) से अपील की है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और कड़े कदम उठाए।

USCIRF की भूमिका और उसका प्रभाव

आपको बता दें कि USCIRF यानी यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक स्वतंत्र अमेरिकी संघीय सरकार की एजेंसी है। यह दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करती है और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को अपनी सिफारिशें भेजती है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि USCIRF की सिफारिशें अमेरिकी प्रशासन के लिए बाध्यकारी (Binding) नहीं होती हैं, लेकिन ये कूटनीतिक दबाव बनाने में बहुत बड़ा असर रखती हैं।

अतीत में भी इस आयोग ने भारत के आंतरिक मामलों और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर कई बार अपनी रिपोर्ट्स में तीखी टिप्पणियां की हैं, जिन्हें भारत सरकार हमेशा से खारिज करती आई है। भारत का हमेशा से यह स्पष्ट रुख रहा है कि इस तरह के अमेरिकी आयोगों को भारत के घरेलू मामलों और आंतरिक लोकतंत्र पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

कूटनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएं

जैसे ही यह खबर भारत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में फैली, राजनीतिक विश्लेषकों के बीच बहस छिड़ गई। जानकारों का मानना है कि आसिफ महमूद का यह बयान व्यक्तिगत या एक विशेष वैचारिक झुकाव का परिणाम हो सकता है, लेकिन इसका द्विपक्षीय संबंधों पर बहुत बड़ा असर पड़ना मुश्किल है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और यहां के वैचारिक संगठनों के नेताओं का इस प्रकार विरोध करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कूटनीतिक प्रोटोकॉल दोनों के दायरे में बहस का विषय बन गया है।

  • क्या वीजा रद्द हो सकता है? कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, किसी देश के प्रमुख संगठन के नेता का वीजा केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर रद्द करना बहुत मुश्किल होता है, जब तक कि कोई ठोस कानूनी कारण न हो।
  • प्रवासी भारतीयों में आक्रोश: अमेरिका में रहने वाले हिंदू और भारतीय समुदाय के लोगों ने इस मांग की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह अमेरिका में रह रहे लाखों प्रवासियों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान पर हमला है।


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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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