कानपुर में प्रकृति का एक नया रूप देखने को मिल रहा है, जिससे शहर के कई इलाकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद शहर के कई निचले इलाकों में संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खासकर पनकी सुंदर नगर क्षेत्र में स्थिति तब गंभीर हो गई जब नदी का पानी और बारिश का असर residential areas (आवासीय क्षेत्रों) में नजर आने लगा। इस प्राकृतिक आपदानुमा स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह से हरकत में आ गया है।
मौके पर पहुंचे नगर आयुक्त, खुद संभाली कमान
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बिना किसी देरी के खुद मोर्चा संभाल लिया। मंगलवार को उन्होंने सीधे तौर पर पनकी-सुंदर नगर के जलभराव वाले प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। वीआईपी गाड़ियों के काफिले से उतरकर उन्होंने क्षेत्रीय पार्षद के साथ पैदल ही जलभराव वाले रास्तों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने केवल अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया, बल्कि सीधे स्थानीय नागरिकों से रूबरू होकर उनकी परेशानियों को विस्तार से सुना।
निरीक्षण के दौरान उनके साथ जोनल अधिकारी, जोनल स्वच्छता अधिकारी, जोनल अभियंता के साथ-साथ जलकल विभाग और मार्ग प्रकाश (स्ट्रीट लाइट) विभाग के तमाम जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों को मौके पर ही मुस्तैद रहने और त्वरित कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए गए।
क्यों बिगड़े हालात? पांडु नदी का बढ़ा जलस्तर
स्थलीय निरीक्षण के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि पांडु नदी का जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ गया है। नदी का पानी अपने सामान्य प्रवाह से बाहर आकर आसपास की बस्तियों और कॉलोनियों में प्रवेश कर रहा है। इसके चलते पनकी सुंदर नगर के लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव की वजह से न सिर्फ घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, बल्कि बच्चों के स्कूल जाने, कामकाजी लोगों के दफ्तर जाने और दैनिक जरूरत के सामान लाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पानी भरने से आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है और लोगों के मन में संक्रामक बीमारियों फैलने का डर भी सताने लगा है।
नगर आयुक्त की दो टूक: 'लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी'
हालात का जायजा लेने के बाद नगर आयुक्त ने प्रशासनिक अमले को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, पानी की निकासी और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन की ओर से दिए गए प्रमुख निर्देश:
- सघन सफाई अभियान: प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर सफाई कराई जाए ताकि गंदगी और कचरा जमा न हो।
- सिल्ट और स्लज की निकासी: नालियों और सड़कों पर जमा सिल्ट और गाद को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए ताकि पानी का बहाव अवरुद्ध न हो।
- रोशनी की मु मुकम्मल व्यवस्था: मार्ग प्रकाश (स्ट्रीट लाइट) विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जलभराव वाले रास्तों पर लाइटों की व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए ताकि रात के समय लोगों को गड्ढे या पानी की गहराई का अंदाजा लगाने में परेशानी न हो।
- आपसी समन्वय: सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें ताकि जनता को तुरंत राहत मिल सके।
क्षतिग्रस्त सड़कों और गड्ढों की मरम्मत के निर्देश
जलभराव के इस संकट के बीच सड़कों की बदहाली ने समस्याओं को और बढ़ा दिया है। निरीक्षण के दौरान मुख्य मार्गों और संपर्क मार्गों पर बने बड़े-बड़े गड्ढों तथा पानी के दबाव से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों पर भी नगर आयुक्त की नजर पड़ी। उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए संबंधित जोनल अभियंता को तुरंत तलब किया।
नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि सड़कों की मरम्मत, रीकार्पेटिंग और रखरखाव के लिए तत्काल प्रभाव से प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए, ताकि बारिश या जलभराव का दौर थमते ही युद्ध स्तर पर पैच वर्क और सड़क सुधार का काम शुरू किया जा सके।
जनसुरक्षा और नागरिक सुविधाएं सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि इस आपदा की स्थिति में आम जनता को कम से कम असुविधा हो। स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराने के भी संकेत दिए गए हैं ताकि जलजनित बीमारियों के खतरे को समय रहते रोका जा सके।
फिलहाल, स्थानीय लोग प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से कुछ हद तक राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पांडु नदी का जलस्तर कब घटता है और कब उन्हें इस जलभराव के स्थाई मुक्ति मिलती है। नगर निगम की टीमें लगातार इलाकों में कैंप कर रही हैं और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।