उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और सुशासन को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर अपने सख्त रुख को स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर दो टूक शब्दों में कहा है कि यह मुहिम न तो कभी रुकी है और न ही भविष्य में कभी रुकेगी। सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि आम जनता के हक पर डाका डालने वाले किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो।
जीरो टॉलरेंस नीति: दावों से आगे बढ़कर धरातल पर एक्शन
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि की जनता ने वर्तमान सरकार को सेवा और सुशासन की जो पवित्र जिम्मेदारी सौंपी है, उस विश्वास की रक्षा करना शासन का सबसे बड़ा धर्म है। अक्सर राजनीतिक मंचों पर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मौजूदा सरकार ने दावों के बजाय जमीन पर ठोस और कठोर कार्रवाई करके दिखाई है।
बीते कुछ समय में राज्य के भीतर कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां घूसखोरों और भ्रष्ट अधिकारियों पर कानून का शिकंजा कसा गया है। सरकार की ओर से यह संदेश साफ कर दिया गया है कि पद, प्रतिष्ठा या प्रशासनिक रसूख अब भ्रष्टाचार के आड़े नहीं आ पाएगा। कानून अपनी पूरी निष्पक्षता और दृढ़ता के साथ अपना काम कर रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जनता की सक्रिय भागीदारी जरूरी
किसी भी व्यवस्था से भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए केवल प्रशासनिक मशीनरी का सक्रिय होना काफी नहीं होता, बल्कि उसमें आम नागरिकों का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सीधा संवाद करते हुए अपील की है कि वे इस मुहिम में सरकार के मजबूत सहयोगी बनें।
यदि शासन-प्रशासन के किसी भी स्तर पर कोई सरकारी कर्मचारी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति किसी कार्य के एवज में रिश्वत की मांग करता है, तो जनता को चुप बैठने के बजाय तुरंत आवाज उठानी चाहिए। चुप रहना भी एक तरह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है।
1064 हेल्पलाइन: भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी का अचूक हथियार
शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुरक्षित बनाया गया है। राज्य सरकार द्वारा संचालित 1064 (दस चौंसठ) हेल्पलाइन नंबर को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने जनता को आश्वस्त किया है कि यदि कोई नागरिक इस नंबर पर भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी से जुड़ी पुख्ता शिकायत दर्ज कराता है, तो उसकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।
शिकायतकर्ता की गोपनीयता सरकार की प्राथमिकता है। नाम उजागर होने के डर से किसी को भी पीछे हटने की आवश्यकता नहीं है। सूचना मिलते ही नियमों के तहत त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस हेल्पलाइन के जरिए मिलने वाली शिकायतों पर जिस प्रकार से त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं, उससे भ्रष्ट तत्वों में खलबली मच गई है। शासन स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर एक शिकायत की गंभीरता से मॉनिटरिंग हो।
शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता
पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेही किसी भी लोक कल्याणकारी राज्य की नींव होती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसना ही नहीं है, बल्कि पूरी शासन प्रणाली को इतना पारदर्शी बनाना है कि गड़बड़ी की गुंजाइश ही न बचे। जब सरकारी तंत्र जनता के प्रति जवाबदेह बनता है, तो आम नागरिकों का शासन व्यवस्था पर विश्वास और अधिक प्रगाढ़ होता है।
मुख्यमंत्री धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने कभी भी किसी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया है और न ही भविष्य में कभी ऐसा किया जाएगा। रसूखदारों के दबाव में आकर फाइलों को दबाने या मामलों को रफा-दफा करने की संस्कृति अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।
निरंतरता और दृढ़संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा अभियान
वर्ष 2026 के इस दौर में जहां डिजिटल युग तेजी से आगे बढ़ रहा है, सरकारी सेवाओं को भी ऑनलाइन और पेपरलेस बनाकर मानवीय हस्तक्षेप को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद यदि कहीं से भी अनियमितता या भ्रष्टाचार की बू आती है, तो राज्य सरकार का विजिलेंस विभाग और संबंधित एजेंसियां पूरी मुस्तैदी से एक्शन ले रही हैं।
अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सेवा, सुशासन और पारदर्शी प्रशासन के मार्ग पर चलते हुए यह भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा। प्रदेश की जनता से यह अपेक्षा की जाती है कि वे डर या संकोच को त्यागकर आगे आएं और 1064 हेल्पलाइन का उपयोग कर एक स्वच्छ, ईमानदार और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाएं।