व्यापारी वर्ग के सामने आ रही लगातार चुनौतियों और प्रशासनिक स्तर पर हो रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान हो चुका है। उत्तर प्रदेश के व्यापारिक जगत में सुगबुगाहट तेज हो गई है क्योंकि राजधानी लखनऊ से लेकर पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक के व्यापारी अब एक मंच पर इकट्ठा होने जा रहे हैं। आगामी 13 सितंबर को औद्योगिक नगरी कानपुर में एक विशाल प्रांतीय महासम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश भर के दिग्गज व्यापारी नेता और आम व्यापारी शिरकत करेंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों के अधिकारों की रक्षा करना और प्रशासनिक ज्यादतियों के खिलाफ एक मजबूत रणनीति तैयार करना है।
सिविल लाइंस के मर्चेंट चैंबर हॉल में सजेगा मंच
प्रांतीय महासम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए कानपुर के सिविल लाइंस स्थित दुधवा बंगला कार्यालय में मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल रजिस्टर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप शुक्ला ने की, जबकि इसका कुशल संचालन जिला अध्यक्ष जेपी यादव द्वारा किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 13 सितंबर को सुबह ठीक 10 बजे सिविल लाइंस स्थित प्रतिष्ठित मर्चेंट चैंबर हॉल में इस महासम्मेलन का भव्य आगाज होगा।
तैयारी बैठक के दौरान आयोजकों ने बताया कि इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से व्यापारियों का पहुंचना शुरू हो गया है। सुदूर जिलों से आने वाले व्यापारी नेताओं के स्वागत और उनकी सहभागिता को सुगम बनाने के लिए विशेष कमेटियों का गठन किया गया है। स्थानीय व्यापारिक इकाइयों में भी इस सम्मेलन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
अधिकारियों के रवैये पर फूटा गुस्सा, अब बर्दाश्त नहीं होगा उत्पीड़न
बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप शुक्ला ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब अधिकारियों द्वारा व्यापारियों का किया जा रहा किसी भी प्रकार का उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभिन्न विभागों के माध्यम से छोटे और बड़े व्यापारियों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे व्यापार करना मुश्किल होता जा रहा है।
डॉ. शुक्ला ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, 'व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आज उन्हीं को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि समय रहते प्रशासनिक रवैया नहीं सुधरा, तो यह महासम्मेलन केवल एक बैठक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक बड़े आंदोलन की नींव साबित होगा।'
कानपुर की हालिया घटना पर गहरा आक्रोश
हाल के दिनों में कानपुर में एक व्यापारी के साथ हुई दर्दनाक घटना और उसकी हत्या ने पूरे व्यापारिक समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार की बैठक में इस गंभीर मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा की गई और सभी उपस्थित सदस्यों ने इस पर तीव्र रोष व्यक्त किया। व्यापारियों ने एक स्वर में मांग की कि इस जघन्य हत्याकांड के सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ ऐसी सख्त कानूनी कार्रवाई हो जो समाज में एक कड़ा संदेश दे सके।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए व्यापार मंडल ने प्रशासन को एक तरह से अल्टीमेटम दे दिया है। नेताओं का कहना है कि यदि न्याय मिलने में देरी हुई, तो व्यापारी वर्ग चुपचाप बैठने वाला नहीं है और सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
सम्मेलन की प्रमुख रूपरेखा और मांगें
इस प्रांतीय महासम्मेलन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों और मांगों पर व्यापक मंथन किया जाएगा:
- व्यापार सुरक्षा कानून: प्रदेश में लंबे समय से लंबित व्यापारी सुरक्षा अधिनियम को सख्ती से लागू करने की मांग।
- कर प्रणालियों की जटिलताएं: जीएसटी और अन्य टैक्स से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने और छापेमारी के नाम पर हो रहे उत्पीड़न को रोकने के उपाय।
- आपराधिक घटनाओं पर अंकुश: व्यापारियों पर हो रहे हमलों, रंगदारी और लूटपाट की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पुलिस सुरक्षा का दायरा बढ़ाना।
- क्षतिपूर्ति और न्याय: हाल ही में पीड़ित व्यापारी परिवारों को उचित मुआवजा और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना।
प्रदेश भर के दिग्गजों की रहेगी मौजूदगी
इस महासम्मेलन को सफल बनाने के लिए कानपुर जिला इकाई के साथ-साथ प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी दिन-रात एक कर रहे हैं। मंगलवार की बैठक में बड़ी संख्या में प्रमुख व्यापारी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से जेपी यादव, मधु सिंह, आपा पटेल, कीर्ति अहिरवार, अनिल शुक्ला, रजत सिंह गौड़, हकीम खान, प्रांजल शुक्ला, शैलेंद्र मिश्रा, आशीष त्रिपाठी, विनोद पांडे, ओमप्रकाश, चेतन गुप्ता, कुलदीप तिवारी, राहुल पाल, नदीम, महेश सिंह, विनु गुप्ता, प्रेम पांडे, प्रदीप तिवारी, गोपी वर्मा, ओमजी द्विवेदी, ज्योति रावत और संदीप शुक्ला समेत दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आंदोलन की चेतावनी: सरकार और प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें
13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन ने स्थानीय प्रशासन और शासन की धड़कनों को बढ़ा दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश के व्यापारी एक मंच पर आकर कोई बड़ा फैसला लेते हैं, तो उसका असर आगामी राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। व्यापारी नेताओं ने साफ कर दिया है कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके बुनियादी अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए है।
बहरहाल, सभी की निगाहें अब 13 सितंबर को मर्चेंट चैंबर हॉल में होने वाले इस महासम्मेलन पर टिकी हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इस मंच से व्यापारी वर्ग सरकार को क्या अल्टीमेटम देता है और प्रशासन उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाता है।