सुरक्षित माने जाने वाले गर्ल्स हॉस्टल के भीतर जब छात्राओं की निजता पर इस तरह का गंभीर प्रहार होता है, तो पूरा समाज स्तब्ध रह जाता है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। शहर के व्यस्त और पॉश इलाकों में शुमार मोहद्दीपुर क्षेत्र के एक गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम में चालू हालत में एक एंड्रॉइड मोबाइल मिलने से मंगलवार देर रात भारी हंगामा मच गया। इस घटना के सामने आने के बाद से हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं में भारी डर और रोष का माहौल है।
कैसे खुला इस घिनौने कृत्य का राज?
घटना की शुरुआत 8 सितंबर की रात को हुई। हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा जब रोजाना की तरह बाथरूम इस्तेमाल करने गई, तो उसकी नजर अचानक ऊपर टिनशेड में फंसे एक सैमसंग कंपनी के स्मार्टफोन पर पड़ी। शुरुआत में छात्रा को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब उसने गौर से देखा तो पाया कि उस मोबाइल फोन का कैमरा ऑन यानी चालू हालत में था और उसका लेंस पूरी तरह से बाथरूम के भीतर की ओर केंद्रित था।
हॉस्टल के नियमों और अपनी सुरक्षा को लेकर सजग उस छात्रा ने बिना देर किए अपने ही फोन से इस स्थिति का वीडियो बना लिया, ताकि बाद में कोई सबूत से इनकार न कर सके। इसके तुरंत बाद उसने हॉस्टल की अन्य छात्राओं को इस बात की जानकारी दी। खबर फैलते ही हॉस्टल की अन्य लड़कियां भी मौके पर इकट्ठा हो गईं और सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई।प्रारंभिक जांच में सामने आए गंभीर तथ्य
जब छात्राओं ने मिलकर उस बरामद मोबाइल फोन की शुरुआती जांच की, तो उनके होश उड़ गए। फोन की गैलरी और रिकॉर्डिंग फाइल्स को देखने पर पता चला कि उसमें पहले से ही कई छात्राओं के नहाते वक्त और बाथरूम का इस्तेमाल करते हुए वीडियो रिकॉर्ड हो चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार, उस वीडियो फुटेज में करीब 5 से 6 अलग-अलग छात्राओं के बाथरूम के अंदर होने के दृश्य कैद मिले।
यह दृश्य देखते ही छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने हॉस्टल परिसर में जमकर हंगामा शुरू कर दिया। छात्राओं की सुरक्षा के साथ इस तरह के खिलवाड़ की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और डायल 112 की एंट्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स वीकल) और कैंट थाने की पुलिस दल-बल के साथ तुरंत मोहद्दीपुर स्थित उस गर्ल्स हॉस्टल पहुंच गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले उस एंड्रॉइड मोबाइल फोन को अपने कब्जे में लिया और हॉस्टल में मौजूद छात्राओं व प्रबंधन से पूछताछ शुरू की।
पुलिस के अनुसार, इस हॉस्टल में कुल 20 कमरे बने हुए हैं जिनमें लगभग 26 छात्राएं निवास करती हैं। ये सभी छात्राएं शहर के विभिन्न प्रतिष्ठित कॉलेजों में पढ़ाई करने के साथ-साथ सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी हुई हैं। ऐसे में इस तरह की घटना उनके मानसिक सुकून और सुरक्षा दोनों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
महिला वार्डेन का अजीबोगरीब और हैरान करने वाला बयान
जब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हॉस्टल की महिला वार्डेन से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने जो सफाई दी उसने सबको और अधिक चौंका दिया। वार्डेन का दावा था कि बाथरूम में इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड और अन्य गंदगी को इधर-उधर फेंक दिया जाता था, जिससे हॉस्टल में काफी गंदगी फैल रही थी।
इसी गंदगी फैलाने वाले का पता लगाने के लिए रात के करीब 10 बजे उस मोबाइल फोन को रिकॉर्डिंग मोड पर चालू करके बाथरूम में रखा गया था। हालांकि, वार्डेन के इस तर्क पर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या साफ-सफाई की निगरानी के लिए किसी की निजता का उल्लंघन करने और उसका वीडियो बनाने का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
डिजिटल साक्ष्य और पुलिस की आगे की कानूनी प्रक्रिया
मौके पर मौजूद कुछ छात्राओं ने सुरक्षा की दृष्टि से अपने मोबाइल्स में भी इस घटना से जुड़े वीडियो क्लिप्स सुरक्षित कर लिए थे। पुलिस की शुरुआती जांच के दौरान कुछ वीडियो को डिलीट किए जाने की बात भी सामने आ रही है। इसके साथ ही छात्राओं के फोन्स से भी कुछ फुटेज हटवाए जाने की चर्चा है, लेकिन इसके बावजूद कई वीडियो के सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर प्रसारित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
कैंट थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) जितेंद्र सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने मोबाइल फोन को अपने कब्जे में ले लिया है और उसकी तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी तक लिखित तहरीर का इंतजार किया जा रहा है। तहरीर मिलते ही संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल प्रबंधन की जवाबदेही
इस घटना ने देश भर के उन तमाम पीजी और गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जहाँ दूर-दराज से आकर बेटियां पढ़ाई करती हैं। माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए बड़े शहरों में भेजते हैं, लेकिन जब हॉस्टल के भीतर ही इस तरह के मामलों की परतें खुलती हैं, तो यह व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा साबित होता है।
- निजता का हनन: बाथरूम जैसी निजी जगह पर इस तरह कैमरे छिपाकर रखना गंभीर अपराध है।
- प्रबंधन की लापरवाही: वार्डेन या हॉस्टल स्टाफ द्वारा इस तरह के कदम उठाए जाना अक्षम्य है।
- कानूनी कार्रवाई: पुलिस तकनीकी टीम की मदद से यह खंगाल रही है कि इस कृत्य के पीछे असल में किसका हाथ था।
फिलहाल, गोरखपुर पुलिस इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए मोबाइल की कॉल डिटेल, डिलीट किए गए डेटा और हॉस्टल के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। शहर भर में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहा है।