झारखंड में चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को अधिक पारदर्शी, सुगम और जनता के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में एसआईआर (SIR) के तहत आने वाले दावा-आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया अब पूरी तरह से व्यवस्थित होगी। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर विशेष निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिससे आम नागरिकों को लंबी लाइनों और अनावश्यक भीड़ से राहत मिल सकेगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने इस पूरी प्रक्रिया की खुद कमान संभालते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि हर एक नागरिक के अधिकार और सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाए।
दावा-आपत्ति सुनवाई में अब लागू होगा टोकन सिस्टम
अक्सर यह देखा जाता है कि जब भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने या सुधार के लिए दावा-आपत्ति की सुनवाई होती है, तो संबंधित कार्यालयों में भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। इस भीड़भाड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासन ने एक स्मार्ट और व्यवस्थित तरीका अपनाया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी उपायुक्तों सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में मुख्य रूप से यह तय किया गया कि अब दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान कार्यालयों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक भीड़ नहीं लगने दी जाएगी।
भीड़ को नियंत्रित करने और प्रत्येक नागरिक को उचित समय देने के लिए 'टोकन सिस्टम' लागू किया जा रहा है। इसके तहत एक साथ अधिक लोगों को बुलाने के बजाय, टोकन के आधार पर क्रमवार तरीके से सुनवाई की जाएगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुगमता आएगी, बल्कि आम जनता को भी घंटों अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा और समुचित अवसर दिया जाएगा। प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच के बाद ही नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं का होगा विशेष पंजीकरण
लोकतंत्र के इस सबसे बड़े उत्सव में नई पीढ़ी की भागीदारी को सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य के तहत, उन तमाम युवाओं को मतदाता सूची से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है जो हाल ही में 18 वर्ष के हुए हैं या होने वाले हैं। निर्वाचन आयोग के तय मानकों के अनुसार, राज्यभर में युवा मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया की कड़ी समीक्षा की जा रही है ताकि कोई भी पात्र नागरिक इस अधिकार से वंचित न रह जाए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि शून्य तथा एक से पांच 'फार्म-6' वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए। ऐसे मतदान केंद्रों की सूची की सूक्ष्म समीक्षा करते हुए बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने क्षेत्र में ऐसे नए और युवा पात्र भारतीय नागरिकों की पहचान करें, जिनकी आयु एक अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूरी हो रही है, लेकिन उनका नाम अभी तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं किया गया है।
- सभी पात्र युवाओं से निर्धारित प्रक्रिया के तहत 'फार्म-6' और आवश्यक घोषणा-पत्र प्राप्त किए जाएं।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी योग्य युवा मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से न छूटे।
- साहिबगंज जैसी किसी भी प्रकार की पिछली अनियमितता की पुनरावृत्ति रोकने के लिए डेटा और दस्तावेजों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
- लंबित मामलों और प्रतिदिन होने वाले निस्तारण की जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए।
पारदर्शिता और कड़ाई: किसी भी अनियमितता पर होगी त्वरित कार्रवाई
चुनावी प्रणाली की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रशासन किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। हाल ही में साहिबगंज जिले में सामने आई अनियमितता का जिक्र करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को चेताया है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी अन्य जिले में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और निर्वाचन डेटा पर बेहद प्रभावी और डिजिटल निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं भी कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो बिना किसी देरी के नियमानुसार सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ELC) के कार्यक्रमों की रूपरेखा
युवाओं में मतदान के प्रति जागरूकता फैलाने और उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों से अवगत कराने के लिए शिक्षा संस्थानों की मदद ली जा रही है। राज्य स्तर पर आगामी 19 एवं 20 नवंबर को आयोजित होने वाले इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारियां अभी से आरंभ करने के निर्देश दे दिए गए हैं। इन कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए प्रत्येक स्तर पर ईएलसी कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए जाएंगे और उनकी स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
स्कूलों और कॉलेजों के स्तर पर विशेष कार्यशालाओं और प्रतियोगिताओं की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों के बीच ईसीनेट का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा सके। इसके साथ ही, युवाओं को सरकार और आयोग द्वारा चलाई जा रही डिजिटल मतदाता सेवाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी ताकि वे तकनीकी रूप से भी पूरी तरह सशक्त हो सकें।
शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर
आम नागरिकों और मतदाताओं की शिकायतों को सुनने और उनका समय पर समाधान करने के लिए तकनीकी माध्यमों का भी भरपूर उपयोग किया जा रहा है। नेशनल वोटर्स सर्विस पोर्टल (NVSP) पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, ईसीनेट की 'बुक ए कॉल' सुविधा के माध्यम से मतदाताओं द्वारा दर्ज कराई जाने वाली समस्याओं और जिज्ञासाओं पर भी समयबद्ध तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, ताकि लोकतंत्र की इस पूरी प्रक्रिया में जनता का भरोसा अटूट बना रहे।