देवभूमि उत्तराखंड में युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे नशे के काले कारोबार पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे आधुनिक और कड़ा कदम उठाया है। राज्य की राजधानी देहरादून में ड्रग्स के बढ़ते नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए अधिकारियों ने कमर कस ली है। अब केवल सतही कार्रवाई करने के बजाय उन तमाम 'हॉटस्पॉट' को तकनीक के जरिए टारगेट किया जाएगा, जहां इस अवैध कारोबार की जड़े सबसे गहरी हैं। इस रणनीति के तहत अब पूरे जिले में जीआईएस (GIS) मैपिंग का सहारा लिया जाएगा, जिससे अपराधियों का बच निकलना नामुमकिन हो जाएगा।
जिला स्तरीय एनकार्ड समिति की बैठक में बनी ठोस रणनीति
बुधवार को देहरादून के कलेक्ट्रेट सभागار में जिला स्तरीय एनकार्ड (NCORD) समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के दिशा-निर्देशों के क्रम में यह बैठक अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के दौरान अधिकारियों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कैसे नशे का यह धीमा जहर युवा पीढ़ी को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है।
एडीएम स्मृता परमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि नशा केवल कानून और व्यवस्था से जुड़ा एक साधारण मामला भर नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर हमारी युवा पीढ़ी के भविष्य और देश की अस्मिता पर एक गंभीर हमला है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकी और सामाजिक सहभागिता का एक मजबूत चक्रव्यूह तैयार करना होगा, ताकि इस अवैध धंधे में संलिप्त हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके।
जीआईएस मैपिंग से होगी हर एक गतिविधि की डिजिटल निगरानी
ड्रग्स के इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन ने मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। पुलिस और प्रशासनिक अमला मिलकर उन सभी संवेदनशील क्षेत्रों की जीआईएस मैपिंग करेगा, जिन्हें नशे का गढ़ माना जाता है। इन इलाकों में मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त, तस्करों की आवाजाही और सेवन के ठिकानों को डिजिटल नक्शे पर चिन्हित किया जाएगा।
इस तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस को उन क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने में मदद मिलेगी। एक बार हॉटस्पॉट फिक्स होने के बाद वहां पुलिस की गश्त बढ़ाई जाएगी और एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत ताबड़तोड़ छापेमारियां की जाएंगी। आबकारी विभाग को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे पोस्त की अवैध खेती पर पूरी तरह रोक लगाएं और जहां भी ऐसे संकेत मिलें, वहां तुरंत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
स्कूल और कॉलेजों तक पहुंचेगी जागरूकता की मुहिम
प्रशासन की इस नई कार्ययोजना का दायरा केवल अपराधियों की धरपकड़ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सुधार और पुनर्वास को भी बराबर की प्राथमिकता दी गई है। शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग संयुक्त रूप से मिलकर शिक्षण संस्थानों में एक व्यापक अभियान चलाएंगे।
- विद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यशालाएं: छात्र-छात्राओं को नशे के भयानक दुष्परिणामों से रूबरू कराया जाएगा।
- संवाद सत्र: युवाओं के साथ सीधे संवाद के जरिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत करने के उपाय बताए जाएंगे।
- पुनर्वास की पहल: जो युवा पहले ही नशे के दलदल में फंस चुके हैं, उन्हें चिन्हित कर स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक पुनर्वास केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
- नियमित समीक्षा: विभिन्न विभागों के अधिकारी अपने स्तर पर चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों की हर हफ्ते समीक्षा करेंगे।
समन्वित प्रयासों से बदलेगी तस्वीर
बैठक में मुख्य रूप से स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन, आबकारी और समाज कल्याण विभाग के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. मनोज कुमार शर्मा, सीओ अंकित कंडारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल और आबकारी निरीक्षक शिव प्रसाद व्यास ने अपने-अपने विभागों की अब तक की प्रगति रिपोर्ट साझा की।
अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि जब तक सभी विभाग आपसी तालमेल (Coordination) के साथ काम नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या की जड़ें उखाड़ना मुश्किल होगा। पुलिस तस्करों पर शिकंजा कसेगी, तो वहीं स्वास्थ्य विभाग पीड़ितों के इलाज और काउंसलिंग की जिम्मेदारी संभालेगा।
नशे के सौदागरों के लिए उल्टी गिनती शुरू
उत्तराखंड जैसे शांत और धार्मिक राज्य में ड्रग्स के फैलते नेटवर्क को रोकने के लिए प्रशासन का यह कदम बेहद सराहनीय और समय की मांग है। आम जनता और अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। अब देखना यह होगा कि जीआईएस मैपिंग और जमीनी स्तर पर होने वाली इन सख्त कार्रवाइयों के बाद ड्रग्स माफियाओं के इस साम्राज्य पर किस हद तक लगाम लग पाती है। स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में देवभूमि में नशे का कारोबार करने वालों की खैर नहीं होगी।