कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला है। राज्य सरकार में मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की घोषणा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी आंखें नम हो गईं और वे फफककर रो पड़े। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्वारा लगातार भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच उन्हें आखिरकार अपने पद से हटना पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि महज़ 25 दिनों के भीतर ही उन्हें दूसरी बार यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम की चर्चा जोरों पर है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।दूसरी बार देना पड़ा कैबिनेट से इस्तीफा
यह कोई पहला मौका नहीं है जब बी नागेंद्र को इस तरह के विवादों के चलते अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी हो। इससे पहले भी वह महर्षि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन फंड से जुड़े कथित अवैध इस्तेमाल के आरोपों के घेरे में आए थे। उस समय भी उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी या बढ़ते दबाव के चलते पद छोड़ा था। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों और फेरबदल के बाद उनकी दोबारा कैबिनेट में धमाकेदार वापसी हुई थी, लेकिन यह वापसी भी ज्यादा लंबी नहीं टिक पाई और विवादों ने उनका पीछा एक बार फिर छोड़ दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद भावुक नजर आए बी नागेंद्र ने मीडिया के सामने दावा किया कि वह अपनी मर्जी से यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने अपनी सफाई में यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर और सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह एक दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने सीधे तौर पर विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ ताकतें यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं कि देश का कोई आदिवासी और वंचित वर्ग का नेता आगे बढ़े और मजबूत स्थिति हासिल करे।
कौन हैं बी नागेंद्र?
राजनीतिक पटल पर बी नागेंद्र का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्तमान समय में वह बेल्लारी रूरल विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधायक हैं। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत पर नजर डालें तो वह पहले कुडलिगी विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक के तौर पर चुने गए थे। इसके बाद साल 2013 के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और उसी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि, बाद में उन्होंने बीजेपी से राहें जुदा कर लीं और कांग्रेस में शामिल हो गए।
बी नागेंद्र अनुसूचित जनजाति (ST) के तहत आने वाले वाल्मीकि नायक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। अपने शुरुआती राजनीतिक और व्यावसायिक जीवन में उनका नाम बेल्लारी के खनन माफिया और विवादित शख्सियतों से भी जोड़ा जाता रहा है। बेल्लारी माइनिंग क्षेत्र से आयरन ओर के कथित गैर-कानूनी परिवहन के मामलों में भी उनका नाम चर्चा में रहा है। साल 2023 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने बेल्लारी रूरल सीट से बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी, जहां उन्होंने बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व परिवहन मंत्री बी श्रीरामुलु को लगभग 29,500 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी।
इस्तीफे की असली वजह और वाल्मीकि घोटाला
बी नागेंद्र के इस्तीफे के पीछे महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड में हुई फंड की भारी गड़बड़ियां मुख्य वजह बनी हैं। विपक्ष लगातार हमलावर था और इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। नागेंद्र ने मीडिया के सामने कहा कि वह पूरी तरह से बेकसूर हैं, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा चलाए जा रहे दुष्प्रचार और बेवजह के आरोपों के कारण वह अपनी पार्टी और सरकार को किसी भी तरह की शर्मिंदगी से बचाना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने खुद ही पद छोड़ने का फैसला किया।
विपक्षी दलों—विशेषकर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर)—ने इस कथित घोटाले को लेकर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन की पूरी तैयारी कर ली थी। विपक्षी नेताओं ने रायचूर से बल्लारी तक एक बड़े पैदल मार्च का ऐलान किया था, जिसे सितंबर के शुरुआती दिनों में निकाला जाना था। इसके अलावा, राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी सदन के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला था। बढ़ते हंगामे और गतिरोध के कारण विधानसभा सत्र को निर्धारित समय से पहले ही तीन दिन छोटा कर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ गया था।
क्या है बहुचर्चित वाल्मीकि घोटाला?
यह पूरा विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े फंड के कथित अवैध और अनधिकृत ट्रांसफर से जुड़ा हुआ है। यह संस्था सीधे तौर पर संबंधित मंत्री के प्रशासनिक नियंत्रण के दायरे में आती है। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब साल 2025 के मई महीने की 26 तारीख को कॉर्पोरेशन के अकाउंट्स सुपरिटेंडेंट चंद्रशेखर पी ने आत्महत्या कर ली।
इस दुखद घटना के बाद जब उनके कमरे की तलाशी ली गई और उनका सुसाइड नोट सामने आया, तो उसमें बेहद चौकाने वाले खुलासे हुए। चंद्रशेखर ने अपने डेथ नोट में गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा था कि कॉर्पोरेशन के बैंक खातों से लगभग 187 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बिना किसी कानूनी इजाजत या वैध प्रक्रिया के चुपचाप दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई थी। इस खुलासे के बाद से ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया था, और तब से लेकर अब तक यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
राजनीतिक भविष्य पर मंडराते सवाल
बी नागेंद्र के इस दूसरे इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ जहां विपक्ष इसे अपनी नैतिक और राजनीतिक जीत के रूप में देख रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल के लिए यह स्थिति असहज पैदा करने वाली है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक जाकर असली दोषियों को बेनकाब कर पाती हैं या फिर यह मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने कर्नाटक की सियासत को पूरी तरह से गरमा दिया है और जनता की नजरें अब इस मामले में होने वाले अगले बड़े खुलासे पर टिकी हुई हैं।
