भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया और अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश के सबसे बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के मेगा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ (IPO) को मार्केट रेगुलेटर की तरफ से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) समूह की इस प्रमुख डिजिटल और टेलीकॉम आर्म के इस कदम से भारतीय प्राइमरी मार्केट में भूचाल आना तय माना जा रहा है।
देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ
लगभग 3.8 अरब डॉलर (करीब भारतीय मुद्रा में भारी-भरकम राशि) के इस आईपीओ के साथ ही यह भारत के शेयर बाजार के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी लिस्टिंग बनने जा रही है। इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) का आईपीओ सबसे बड़ा माना जाता था, जिसने बाजार से करीब 2.95 अरब डॉलर जुटाए थे। लेकिन जियो का यह नया पब्लिक इश्यू उस पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस आईपीओ का आना ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों (Retail Investors) और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) की जबरदस्त भागीदारी देखने को मिल रही है। पिछले कुछ हफ्तों से प्राइमरी मार्केट में लिक्विडिटी का प्रवाह इस बात का गवाह है कि निवेशक नए और बड़े अवसरों की तलाश में हैं।
चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा ऑपरेटर
रिलायंस जियो (Reliance Jio) वर्तमान में चीन मोबाइल (China Mobile) के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी और भारत की नंबर वन मोबाइल ऑपरेटर कंपनी है। जून के अंत तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के पास 53.3 करोड़ से अधिक एक्टिव सब्सक्राइबर्स का विशाल बेस मौजूद है। सिर्फ कॉलिंग और डेटा तक सीमित रहने के बजाय, पिछले कुछ वर्षों में जियो ने अपनी पहुंच का दायरा काफी बढ़ाया है।
आज के समय में कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और एंटरप्राइज नेटवर्क सर्विसेज जैसे एडवांस्ड टेक सेक्टर्स में भारी विविधता (Diversification) हासिल कर ली है। इसी वजह से निवेशकों के बीच इस आईपीओ को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
आईपीओ की रूपरेखा और शेयरों की स्थिति
प्रास्पेक्टस के अनुसार, आकाश अंबानी के नेतृत्व वाली इस कंपनी की योजना इस आईपीओ के जरिए कुल 270 मिलियन (27 करोड़) शेयर जारी करने की है। वर्तमान में पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की लगभग 66.4% हिस्सेदारी है। इसके अलावा, ग्लोबल टेक दिग्गज मेटा (Meta) के पास करीब 9.9% और गूगल (Google) के पास लगभग 7.7% हिस्सेदारी है।
- कुल शेयरों का निर्गम: 270 मिलियन शेयर
- रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी: ~66.4%
- मेटा की हिस्सेदारी: ~9.9%
- गूगल की हिस्सेदारी: ~7.7%
वित्तीय मोर्चे पर कर्ज से मुक्ति और रणनीति
जून महीने में ही सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए गए थे। अब अप्रूवल मिलने के बाद कंपनी ने अपनी भविष्य की योजनाओं पर काम तेज कर दिया है।
कंपनी से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, इस आईपीओ से मिलने वाली कुल आय का एक बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम (Reliance Jio Infocomm) के लगभग 275 अरब रुपये (लगभग 3.3 अरब डॉलर) के भारी-भरकम कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कंपनी पूरी तरह से डेट-फ्री या बेहद मजबूत वित्तीय स्थिति की ओर अग्रसर होगी।
दिलचस्प बात यह है कि वित्तीय वर्ष के दौरान भले ही कंपनी के रेवेन्यू और सब्सक्राइबर बेस में लगातार जोरदार इजाफा हुआ हो, लेकिन इंटरनल ऑप्टिमाइजेशन के चलते मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कर्मचारियों की संख्या में लगभग 21% की गिरावट दर्ज की गई थी और यह घटकर 27,935 रह गई थी।
बाजार पर इसका क्या असर होगा?
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी स्ट्रैटेजी डायरेक्टर क्रांथी बाथिनी का कहना है कि यह समय जियो के लिए प्राइमरी मार्केट में उतरने का बिल्कुल सही मौका है। उन्होंने कहा, "इस लिस्टिंग के बाद निवेशकों को रिलायंस इंडस्ट्रीज से अलग स्वतंत्र रूप से जियो के मूल्यांकन (Valuation) का स्पष्ट पैमाना मिल जाएगा, जिससे इस टेलीकॉम दिग्गज के प्रदर्शन पर निवेशकों का फोकस और अधिक पैना हो जाएगा।"
बाजार के जानकारों का यह भी मानना है कि वर्तमान में जिस तरह की लिक्विडिटी घरेलू संस्थानों और रिटेल इन्वेस्टर्स के पास है, उससे इस मेगा आईपीओ को एंकर निवेशकों और आम जनता दोनों तरफ से बंपर सब्सक्रिप्शन मिलने की पूरी उम्मीद है। आने वाले दिनों में इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ की तारीखों और प्राइस बैंड को लेकर आधिकारिक घोषणाएं की जा सकती हैं, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
