उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक शहर वाराणसी में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहुत बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। रविवार, 20 सितंबर 2026 की दोपहर को वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और एक कुख्यात नक्सली के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में 30 लाख रुपये का इनामी नक्सली मारा गया। मारा गया नक्सली कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का खतरनाक कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता था। इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं.
कैसे बिछाया गया एटीएस द्वारा जाल?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूपी एटीएस को पिछले कुछ दिनों से इनपुट मिल रहा था कि झारखंड और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर इलाकों में सक्रिय कुछ बड़े नक्सली कमांडर किसी बड़ी आपराधिक और विध्वंसक वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसी सुरागकशी के आधार पर एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन कुमार राय के नेतृत्व में एक विशेष टीम पिछले कुछ घंटों से वाराणसी के रामनगर इलाके में सादे कपड़ों में तैनात थी।
रविवार को दोपहर के वक्त सुरक्षा एजेंसियों को पुख्ता सूचना मिली कि टीपीसी का शीर्ष कमांडर बृजेश गंझू अपने एक अन्य साथी के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर टेगरा मोड़ से मुगलसराय की तरफ जाने वाला है। एटीएस की टीम ने तत्परता दिखाते हुए रामनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस रूट पर सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया और संदिग्धों को दबोचने का जाल बिछाया.
मोटरसाइकिल छोड़कर की ताबड़तोड़ फायरिंग
जब एटीएस की टीम ने संदिग्ध मोटरसाइकिल पर सवार बृजेश गंझू और उसके साथी को रुकने का इशारा किया, तो वे घबरा गए। कानून के शिकंजे में फंसता देख बृजेश ने भागने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, चलती बाइक से अचानक कूदकर बृजेश गंझू ने अपनी अत्याधुनिक पिस्टल निकाली और सीधे एटीएस की टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
यह हमला इतना अचानक और खतरनाक था कि सुरक्षाकर्मियों को संभलने का बहुत कम मौका मिला। नक्सलियों की ओर से चलाई गई गोलियां सीधे एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन कुमार राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण को निशाना बनाकर चलाई गईं। हालांकि, गनीमत यह रही कि दोनों पुलिसकर्मियों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई और वे सुरक्षित रहे।
जवाबी कार्रवाई में ढेर हुआ 30 लाख का इनामी
अपनी टीम पर जानलेवा हमला होता देख एटीएस ने भी आत्मरक्षार्थ और त्वरित जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। दोनों तरफ से कुछ ही मिनटों में कई राउंड गोलियां चलीं। पुलिस बल की पेशेवर और सटीक जवाबी फायरिंग से नक्सली बृजेश गंझू बच नहीं सका। उसके शरीर पर कई गोलियां लगीं, जिसके बाद वह जमीन पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
मुठभेड़ के तुरंत बाद एटीएस ने इलाके को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया और घायल नक्सली को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, डॉक्टरों की टीम ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी सांसे थम चुकी थीं।
कौन था बृजेश गंझू? लंबा-चौड़ा था आपराधिक इतिहास
पुलिस रिकॉर्ड और खुफिया दस्तावेजों के अनुसार, मारा गया नक्सली बृजेश गंझू पुत्र पंचू गंझू, मूल रूप से लूटू गांव, थाना लावालौंग, जनपद चतरा (झारखंड) का रहने वाला था। वह झारखंड और आसपास के इलाकों में आतंक का दूसरा नाम बन चुका था। वह प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का मुख्य कमांडर था और उस पर राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियों की भी पैनी नजर थी।
बृजेश की दहशत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस पर कुल 30 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था। इसमें से झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तरफ से 5 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। उस पर अपहरण, हत्या, रंगदारी, लेवी वसूलना और सुरक्षा बलों पर हमलों के दर्जनों गंभीर मामले झारखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज थे।
घटना के बाद इलाके में हाई अलर्ट
वाराणसी जैसी शांत जगह पर इस तरह की मुठभेड़ होने से सनसनी फैल गई है। घटना की सूचना मिलते ही वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। फॉरेंसिक टीम (FSL) को तुरंत घटनास्थल पर बुलाया गया, जिसने मौके से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य, गोलियों के खोखे और अन्य सामग्रियां बरामद की हैं।
पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वाराणसी में बृजेश गंझू का स्थानीय स्तर पर कौन मददगार था और वह यहां किस बड़ी साजिश को अंजाम देने आया था। उसके साथ मोटरसाइकिल पर मौजूद दूसरा साथी कौन था, जो मौके से फरार होने में कामयाब रहा, उसकी तलाश में भी उत्तर प्रदेश और झारखंड की पुलिस ने संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बृजेश गंझू का मारा जाना नक्सली संगठनों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने जिस प्रकार से झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज किया है, उससे इनका नेटवर्क लगातार कमजोर होता जा रहा है। एटीएस की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि अपराधियों और नक्सलियों के लिए देश में कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है।