वाराणसी की पावन भूमि पर एक बड़ी और सनसनीखेज एंटी-टेरर कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) ने एक भीषण मुठभेड़ के दौरान 30 लाख रुपये के कुख्यात इनामी नक्सली को ढेर कर दिया है। पिछले आठ लंबे वर्षों से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) समेत देश की कई राज्यों की पुलिस को इस खतरनाक नक्सली की सरगर्मी से तलाश थी। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि यह अपराधी लंबे समय से पुलिस और खुफिया तंत्र की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था।
काशी में कमांडो का घेराव और मुठभेड़
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूपी एटीएस को एक पुख्ता खुफिया इनपुट मिला था कि कई बड़ी वारदातों में शामिल रहा यह इनामी नक्सली वाराणसी और उसके आसपास के इलाकों में छिपा हुआ है। इस इनपुट पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एटीएस की विशेष कमांडो यूनिट ने एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत एक संदिग्ध ठिकाने को चारों तरफ से घेर लिया। खुद को चारों तरफ से घिरा देख कुख्यात नक्सली ने अपनी पहचान छिपाने और बचने के लिए पुलिस बल पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
सुरक्षा बलों ने अपनी पोजीशन लेते हुए संयम और सूझबूझ का परिचय दिया, लेकिन जब अपराधी की तरफ से लगातार गोलियां बरसाई गईं, तो एटीएस कमांडोज ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस भीषण गोलीबारी में 30 लाख का इनामी नक्सली गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ के दौरान इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया था, लेकिन पुलिस ने स्थिति पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया।
आठ साल से थी एनआईए को तलाश
मार गिराए गए इस नक्सली पर देश के कई अलग-अलग राज्यों में सुरक्षा बलों पर हमले, हत्या, और बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने के गंभीर मामले दर्ज थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस पर 30 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया था। पिछले लगभग आठ वर्षों से एनआईए और तमाम राज्यों की पुलिस इसकी टोह में लगी हुई थी। यह नक्सली भूमिगत होकर अपने संगठन के लिए नए कैडर तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने का काम कर रहा था।
सुरक्षा व्यवस्था और आगे की जांच
घटना की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। वाराणसी कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और फॉरेंसिक टीम को साक्ष्य संकलन के लिए लगाया गया है। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वाराणसी में इसके कौन-कौन स्थानीय मददगार थे और यह यहां किस बड़ी साजिश को अंजाम देने के फिराक में था।
इस एनकाउंटर को उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। एटीएस की इस बड़ी कार्रवाई से देश भर के नक्सल विरोधी अभियानों को एक नया संबल मिला है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इसके पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए आगे की ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।