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काशी से गूंजा भारत-रूस मैत्री का संदेश, गंगा तट पर ब्रिक्स की सफलता की कामना

काशी से गूंजा भारत-रूस मैत्री का संदेश, गंगा तट पर ब्रिक्स की सफलता की कामना

सनातन संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विख्यात काशी की पावन धरा से एक बार फिर भारत और अटूट अंतरराष्ट्रीय मित्रता का संदेश पूरी दुनिया में गूंजा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत और रूस के दशकों पुराने मधुर संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने तथा आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की सफलता के लिए देव दीपावली और गंगा आरती की तर्ज पर विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया। मोक्षदायिनी मां गंगा के तट पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति किस प्रकार वैश्विक शांति और बंधुत्व की भावना को बल देती है।

सामने घाट पर गूंजे भारत-रूस मैत्री के जयकारे

वाराणसी के ऐतिहासिक सामने घाट पर 'नमामि गंगे' के तत्वावधान में एक भव्य और भावनात्मक आयोजन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर मां गंगा की विधिवत आरती की और दोनों देशों के बीच की ऐतिहासिक दोस्ती के दीर्घजीवी होने की कामना की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता को पूर्ण सफलता मिलना था।

आरती स्थल पर मौजूद लोगों के हाथों में भारत और रूस के राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे थे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संयुक्त तस्वीरें भी आकर्षण का केंद्र थीं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब मां गंगा की आरती उतारी गई, तो पूरा वातावरण हर हर गंगे और भारत-रूस की दोस्ती अमर रहे के जयकारों से गूंज उठा। इस आयोजन ने यह दर्शाया कि भारत का आम नागरिक भी देश की कूटनीति और वैश्विक साझेदारियों के प्रति कितना जागरूक और सचेत है।

ब्रिक्स सम्मेलन और वैश्विक नेतृत्व पर टिकी हैं निगाहें

वर्तमान वर्ष 2026 में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रहा ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। काशी में हुई इस विशेष प्रार्थना में ब्रिक्स के सफल आयोजन और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती और मजबूत होती भूमिका के लिए भी आशीर्वाद मांगा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक शासन, बहुपक्षीय सुधारों, तकनीकी नवाचार, स्थिरता और समावेशी विकास जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा होनी है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत तमाम सदस्य और भागीदार देशों के शीर्ष नेता शिरकत कर रहे हैं। ऐसे में भारत की कूटनीतिक दक्षता दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है और काशी के लोगों ने मां गंगा से प्रार्थना की है कि यह सम्मेलन पूरी तरह सफल हो।

व्यापार, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में नए आयाम की उम्मीद

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भारत और रूस के रिश्ते किसी कूटनीतिक समझौतों से परे, आपसी भरोसे की मजबूत नींव पर टिके हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह द्विपक्षीय मुलाकात दोनों देशों के व्यापारिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को एक बिलकुल नई दिशा प्रदान करेगी।

श्री शुक्ला ने कहा, "बदलते समय के साथ दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन, उन्नत तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। शीर्ष नेतृत्व की इस वार्ता से इन सभी क्षेत्रों में नए और अभूतपूर्व द्वार खुलेंगे, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।"

आतंकवाद और वैश्विक चुनौतियों पर साझा रुख

आज के दौर में दुनिया के सामने आतंकवाद, कट्टरवाद, सीमा पार उग्रवाद और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसी कई गंभीर चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। काशी के इस अनुष्ठान के दौरान इन वैश्विक मुद्दों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि दुनिया भर के शांतिप्रिय देशों को आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को और सख्त करना होगा।

यह उम्मीद जताई गई कि ब्रिक्स मंच के माध्यम से वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ एक साझा और कड़ा संदेश पूरी दुनिया को दिया जाएगा। वैश्विक शांति, स्थिरता और मानव कल्याण के लिए भारत और रूस जैसी बड़ी ताकतों का साथ मिलकर काम करना आज के समय की सबसे बड़ी अनिवार्यता बन चुका है।

काशी से उठी विश्व कल्याण की गूंज

भारतीय संस्कृति की मूल भावना हमेशा से 'वसुधैव कुटुंबकम्' यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, की रही है। काशी की धरती से जब भी कोई प्रार्थना उठती है, उसका दायरा केवल स्थानीय नहीं बल्कि वैश्विक होता है। गंगा तट पर मौजूद तमाम प्रबुद्ध नागरिकों ने एक स्वर में यह कामना की कि दुनिया के किसी भी कोने में अशांति न रहे और संपूर्ण मानवता का कल्याण हो।

इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में राजेश शुक्ला के साथ-साथ सुभाष श्रीवास्तव, लल्लन सिंह, महेंद्र तिवारी, विनोद सिंह, राम सिंह, प्रमोद कुमार पाण्डेय, राजकपूर सिंह, कृष्णानंद, आशीष कुमार राय और केदारनाथ त्रिपाठी सहित शहर के कई गणमान्य नागरिक और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने पूरी श्रद्धा के साथ मां गंगा को दीप अर्पित किए और भारत के यशस्वी भविष्य की कामना की।

अंततः, काशी के घाटों से उठा यह मैत्री संदेश केवल दो देशों के बीच कूटनीतिक जुड़ाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो महान सभ्यताओं के बीच के अटूट विश्वास का जीवंत दस्तावेज है। आने वाले दिनों में जब दोनों देशों के शीर्ष नेता द्विपक्षीय मंच पर आमने-सामने होंगे, तो करोड़ों भारतीयों की उम्मीदें और काशी की यह गंगा-प्रार्थना उस संवाद को और अधिक सार्थक बनाने में अपनी अदृश्य ऊर्जा जरूर प्रदान करेगी।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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