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BRICS में भारत का बड़ा दांव, UPI से जुड़ेंगे सदस्य देशों के पेमेंट सिस्टम

BRICS में भारत का बड़ा दांव, UPI से जुड़ेंगे सदस्य देशों के पेमेंट सिस्टम

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में साल 2026 में एक नया और बड़ा मोड़ आया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन को आसान बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कूटनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव पेश किया है। ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों के सामने एक ऐसा विजन रखा है जो आने वाले समय में वैश्विक भुगतान प्रणाली की तस्वीर बदल सकता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अब समय आ गया है कि ब्रिक्स देश अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर एक-दूसरे के पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ें, स्थानीय मुद्राओं (लोकल करेंसी) में व्यापार को प्राथमिकता दें और डिजिटल कॉमर्स को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।


ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूत पहल

यह दो दिवसीय महत्वपूर्ण बिजनेस फोरम ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब पूरी दुनिया कई तरह की भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है। एक तरफ जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष अपने चरम पर है, वहीं दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी प्रशासन की नई टैरिफ नीतियों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। ऐसे दौर में ब्रिक्स देशों की यह बैठक दुनिया भर के निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए बेहद खास बन गई है। भारत इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जो शनिवार से आधिकारिक तौर पर शुरू हो रहा है। इस माहौल में भारत का यह प्रस्ताव ग्लोबल साउथ (Global South) को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

UPI की वैश्विक ताकत: सालाना 250 अरब ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार

अपने संबोधन के दौरान वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सफलता का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) आज ग्लोबल फिनटेक सेक्टर का बेताज बादशाह बन चुका है। भारत में यूपीआई के जरिए होने वाले सालाना ट्रांजेक्शन का आंकड़ा अब 250 अरब को पार कर चुका है, जो पूरी दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन का आधे से अधिक हिस्सा है।

इस तकनीक की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह सीमाओं को लांघ चुकी है। पीयूष गोयल ने दुनिया के सामने आंकड़े रखते हुए बताया कि वर्तमान में यूपीआई दुनिया के 11 देशों में आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा रहा है। इसी सफलता के आधार पर उन्होंने ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों और सहयोगी देशों को खुला न्योता दिया है कि वे भारत के साथ मिलकर अपने पेमेंट सिस्टम को एकीकृत (integrate) करें।

"आज, यूपीआई को 11 देशों में स्वीकार किया जाता है, और मैं ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों से आग्रह करूंगा कि वे हमारे पेमेंट सिस्टम को जोड़ें, एक-दूसरे की लोकल करेंसी में व्यापार करें, डिजिटल व्यापार को वैश्विक बनाएं और भविष्य की उभरती तकनीकों के लिए मिलकर काम करें।" - पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री

दुनिया के कुल व्यापार का एक-चौथाई हिस्सा है BRICS

ब्रिक्स के मौजूदा स्वरूप और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी पर रोशनी डालते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह समूह अब दुनिया की एक बड़ी आर्थिक ताकत बन चुका है। आज BRICS दुनिया के कुल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत यानी एक-चौथाई हिस्सा नियंत्रित करता है। इस महा-समूह का विस्तार अब 11 देशों तक हो चुका है, जिसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं।

इन 11 देशों के सामूहिक प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये देश:

  • दुनिया की कुल आबादी का 49.5 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं।
  • वैश्विक जीडीपी (Global GDP) का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों के पास है।
  • वैश्विक व्यापार में इनकी सीधी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत है।

इतनी विशाल आबादी और आर्थिक क्षमता के बावजूद यदि ये देश डॉलर या पश्चिमी देशों की पारंपरिक वित्तीय प्रणालियों पर निर्भर रहते हैं, तो वैश्विक झटकों का असर इनकी अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा पड़ता है। यही वजह है कि भारत लोकल करेंसी यानी आपसी व्यापार में अपनी मुद्राओं के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है ताकि बाहरी मुद्रा संकट से बचा जा सके।

भारत की भूमिका: दुनिया की 'फार्मेसी' से लेकर मैन्युफैक्चरिंग हब तक

वाणिज्य मंत्री ने वैश्विक मंच पर भारत की बदलती छवि और उसकी सप्लाई चेन क्षमताओं का भी मजबूती से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत आज ब्रिक्स देशों के आपसी व्यापार का एक केंद्रीय और अहम स्तंभ बन चुका है। भारत से होने वाले कुल मैन्युफैक्चर्ड एक्सपोर्ट में इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक सामानों का योगदान सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ है।

इसके साथ ही, भारत को दुनिया भर में 'फार्मेसी' के रूप में जाना जाता है, जो किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराता है। पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के बाजार खोल0ने का आह्वान करते हुए कहा, "हम BRICS को इन और दूसरे ऐसे प्रोडक्ट्स के लिए एक अहम मार्केट के तौर पर देखते हैं, जिन्हें भारत एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर दुनिया तक पहुंचाना चाहता है।" उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे अपने आयात नियमों को सरल बनाएं, रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान करें और कंसाइनमेंट की तेजी से मंजूरी (क्लियरेंस) में सहयोग करें ताकि व्यापार की गति धीमी न पड़े।

डेटा और डिजिटल ट्रेड पर जोर: भविष्य की तकनीक

पारंपरिक वस्तुओं के व्यापार के अलावा, इस बिजनेस फोरम में डिजिटल ट्रेड और भविष्य की उभरती तकनीकों (Emerging Technologies) पर भी विशेष चर्चा हुई। आज के दौर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकें वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार दे रही हैं, तब ब्रिक्स देशों का एक साथ आना बहुत जरूरी हो गया है। भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जो ओपन-सोर्स मॉडल तैयार किया है, उसे दुनिया भर के विकासशील देश अपनाना चाहते हैं।

यदि ब्रिक्स देश अपने पेमेंट गेटवे को UPI जैसी उन्नत प्रणालियों के साथ जोड़ने में सफल हो जाते हैं, तो इससे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन (Cross-border transactions) में लगने वाला समय कुछ सेकंड्स में सिमट जाएगा और साथ ही भारी-भरकम ट्रांजेक्शन फीस से भी राहत मिलेगी।

निष्कर्ष: क्या बदलेगी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था?

पीयूष गोयल द्वारा ब्रिक्स बिजनेस फोरम में दिया गया यह प्रस्ताव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब वैश्विक वित्तीय मंच पर केवल एक दर्शक या भागीदार नहीं, बल्कि एक लीडर की भूमिका निभा रहा है। UPI को वैश्विक स्तर पर ले जाने की यह रणनीति पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले वित्तीय नेटवर्क (जैसे SWIFT) के समानांतर एक मजबूत और सुरक्षित विकल्प तैयार कर सकती है। यदि ब्रिक्स देश इस प्रस्ताव पर गंभीरता से अमल करते हैं, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में भारत का डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर वैश्विक व्यापार का नया मानक बन जाएगा, जिससे आम नागरिकों से लेकर बड़े कारोबारियों तक को सीधा फायदा पहुंचेगा।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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