उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर एक बड़ी और प्रेरणादायक खबर सामने आ रही है। साल 2023 और 2024 के दौरान प्रशासनिक मूल्यांकन में पिछड़ने वाला वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट अब राज्य के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले पुलिस कमिश्नरेट में शुमार हो चुका है। मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी पोर्टल 'सीएम डैशबोर्ड' की अगस्त माह की ताजा रैंकिंग में वाराणसी पुलिस ने लंबी छलांग लगाते हुए पूरे प्रदेश में पांचवां स्थान हासिल किया है। यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित रणनीति, पुलिस आयुक्त की कड़ी मॉनिटरिंग और मैदानी स्तर पर किए गए व्यापक सुधारों का बड़ा हाथ है।
50 मानकों पर कसा गया पैमाना, 22 में मिली नंबर वन पोजीशन
किसी भी शहर की पुलिसिंग कितनी प्रभावी है, इसका अंदाजा लगाने के लिए सीएम डैशबोर्ड पर कुल 50 प्रमुख प्रदर्शन सूचकांक यानी की परफॉर्मेंस इंडेक्स (KPI) का मूल्यांकन किया जाता है। इन तमाम कड़े और पारदर्शी मानकों पर जब वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के कामकाज को परखा गया, तो परिणाम बेहद सुखद रहे। कमिश्नरेट ने कुल 22 KPI में पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि 6 अन्य महत्वपूर्ण मानकों में टॉप-5 के भीतर अपनी जगह बनाई है।
इस मूल्यांकन में अपराध नियंत्रण, विवेचनाओं का समयबद्ध निस्तारण, वांछित और इनाम घोषित अपराधियों की धड़पकड़, डायल-112 की रिस्पांस स्पीड, महिला सुरक्षा, गौ तस्करी और एनडीपीएस अधिनियम के मामलों पर विशेष रूप से गौर किया जाता है। वाराणसी पुलिस ने इन सभी जटिल पैमानों पर शानदार काम करते हुए अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है।
महिला अपराध और एससी-एसटी मामलों में शत-प्रतिशत सटीक कार्रवाई
महिला सुरक्षा हमेशा से सरकार और पुलिस प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। वाराणसी कमिश्नरेट ने इस मोर्चे पर अनुकरणीय मिसाल पेश की है। महिला अपराधों से जुड़े बेहद संवेदनशील मामलों जैसे कि दुष्कर्म, हत्या, शीलभंग, अपहरण और दहेज मृत्यु से जुड़े मामलों में विवेचना का त्वरित निस्तारण और अभियुक्तों के खिलाफ शत-प्रतिशत (100%) कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। इसी का नतीजा है कि इस श्रेणी में वाराणसी को प्रदेश में पहला स्थान मिला।
ठीक इसी तरह, एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में भी विवेचनाओं को तेजी से पूरा करते हुए अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई, जिसके चलते कमिश्नरेट ने इस मोर्चे पर भी नंबर वन पोजीशन बरकरार रखी। इसके अलावा, गोवध निवारण अधिनियम के मामलों में भी शत-प्रतिशत प्रभावी कार्रवाई करते हुए वाराणसी पुलिस ने अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। आबकारी अधिनियम, गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) और गुंडा एक्ट के तहत अपराधियों की कमर तोड़ने के मामले में भी कमिश्नरेट का प्रदर्शन पूरे सूबे में सर्वश्रेष्ठ रहा है।
डायल-112 का कमाल: महज 4.90 मिनट में मौके पर पहुंच रही पीआरवी
आपातकालीन परिस्थितियों में जनता को कम से कम समय में पुलिस सहायता उपलब्ध कराना किसी भी आधुनिक पुलिस बल की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। इस कसौटी पर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने शानदार सफलता हासिल की है। अगस्त महीने के आंकड़ों के मुताबिक, डायल-112 की पुलिस रिस्पांस वीइकल (PRV) का औसत प्रतिक्रिया समय (Response Time) महज 4.90 मिनट दर्ज किया गया।
आंकड़े बताते हैं कि कुल 20,191 आपातकालीन प्रकरणों में पुलिस ने 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर त्वरित प्रतिक्रिया दी। इस बेहतरीन टाइम मैनेजमेंट और कॉलर संतुष्टि के मामले में भी कमिश्नरेट ने प्रदेश में पहला स्थान अपने नाम किया है। आपातकाल में जनता का यह भरोसा पुलिस की कार्यशैली में आए सकारात्मक बदलाव को साफ तौर पर दर्शाता है।
अग्नि सुरक्षा और नागरिक सेवाओं में भी लहराया परचम
सिर्फ अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि नागरिक सेवाओं और सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी वाराणसी पुलिस ने अव्वल प्रदर्शन किया है।
- अग्नि सुरक्षा: एनओसी और आग से सुरक्षा के आकलन से जुड़े सभी मामलों में 100 प्रतिशत कार्रवाई पूरी कर वाराणसी ने शीर्ष स्थान हासिल किया।
- सत्यापन सेवाएं: कर्मचारी सत्यापन, घरेलू सहायिका सत्यापन और किरायेदार सत्यापन जैसे संवेदनशील मामलों में शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया।
- नागरिक पोर्टल सेवाएं: सीसीटीएनएस शिकायतें, कार्यक्रम प्रदर्शन के अनुरोध, जुलूस की अनुमति और विरोध-हड़ताल से जुड़े मामलों में भी शत-प्रतिशत सफलता दर्ज की गई।
- पॉक्सो एक्ट: पॉक्सो एक्ट के मामलों में अभियुक्तों के खिलाफ शत-प्रतिशत प्रभावी कार्रवाई करते हुए कमिश्नरेट ने पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
इसके अलावा, जघन्य अपराधों में विवेचना का निस्तारण 96.42 प्रतिशत और वांछित अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई 94.92 प्रतिशत रही, जिससे कमिश्नरेट को चौथा स्थान मिला। गैंगस्टर एक्ट के तहत लंबित विवेचनाओं का निस्तारण 98.00 प्रतिशत और वांछितों के खिलाफ कार्रवाई 99.47 प्रतिशत दर्ज की गई। जोन काशी, वरुणा और गोमती में पंजीकृत मुकदमों में कुल 93.71 प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण विवेचना निस्तारण किया गया है, जो पुलिस की पेशेवर दक्षता को बयां करता है।
70वें पायदान से टॉप-5 तक पहुंचने की दिलचस्प कहानी
यह प्रगति रातों-रात हासिल नहीं हुई है। अगर बीते वर्षों पर नजर डालें, तो साल 2023 और 2024 के दौरान सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग में वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं थी और यह अमूमन 70वें पायदान के आसपास झूलती रहती थी। इस सुस्त स्थिति को बदलने के लिए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई।
लगातार साप्ताहिक समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हुआ, मैदानी पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई और हर एक थाने की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाई गई। पुलिसिंग के विभिन्न मानकों पर निरंतर निगरानी रखने और कार्य की गति में तेजी लाने का ही यह परिणाम है कि आज वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने सूबे के शीर्ष पांच जिलों और कमिश्नरेट में अपना नाम दर्ज करा लिया है। स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने भी पुलिस के इस कायापलट की सराहना की है, जिससे पुलिस और जनता के बीच का रिश्ता और अधिक मजबूत हुआ है।