जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) कठुआ के इंटर्न डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन अब एक गंभीर रूप अख्तियार करता जा रहा है। अपनी लंबे समय से लंबित मांगों और विशेष तौर पर इंटर्नशिप भत्ते (Stipend) में बढ़ोतरी को लेकर इन डॉक्टरों की हड़ताल सोमवार को लगातार आठवें दिन भी जारी रही। प्रशासन और सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस समाधान न मिलने के कारण डॉक्टरों ने अब और भी कड़ा रुख अपनाने का फैसला कर लिया है।
लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े डॉक्टर
बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू की तरफ से डॉक्टरों को मौखिक आश्वासन जरूर मिला था, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ जुबानी वादों से उनका काम नहीं चलने वाला है। डॉक्टरों की साफ मांग है कि सरकार की तरफ से उनकी मांगों को लेकर या तो लिखित में आदेश जारी किया जाए या फिर सार्वजनिक रूप से एक समयबद्ध (Time-bound) समाधान का आश्वासन दिया जाए। मौखिक बयानों से विश्वास उठ चुका है, क्योंकि पिछले कई हफ्तों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं, धरातल पर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है।
8 सितंबर से 24 घंटे के लिए इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह ठप
परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत एक बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। डॉक्टरों के निर्णय के अनुसार, 8 सितंबर को सुबह 9 बजे से अगले 24 घंटों के लिए अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह से निलंबित (Suspend) रखा जाएगा। इस बड़े फैसले से स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इमरजेंसी सेवाएं बंद होने से सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
मरीजों की परेशानी पर डॉक्टरों का स्पष्टीकरण
इमरजेंसी सेवाएं बंद करने के फैसले पर जब डॉक्टरों से बात की गई, तो उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी। डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों के जीवन और उनकी तकलीफों को अच्छी तरह समझते हैं। यह कदम किसी भी तरह से मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटना नहीं है। बल्कि, यह सोया हुआ प्रशासन और सरकार की नींद खोलने का एक शांतिपूर्ण तरीका है, ताकि वे मजबूर होकर इन युवाओं की वाजिब मांगों पर ध्यान दें।
कैंडल मार्च निकालकर जताया विरोध
सोमवार की शाम को स्थिति को शांतिपूर्ण लेकिन मुखर तरीके से दर्ज कराने के लिए इंटर्न डॉक्टरों ने एक भव्य कैंडल मार्च भी निकाला। हाथों में मोमबत्तियां थामे इन युवा डॉक्टरों ने परिसर में मार्च करते हुए अपनी एकता का प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की जाती और उनकी समस्याओं के समाधान की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की जाती, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।
आगे क्या हो सकता है?
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस मामले का कोई बीच का रास्ता नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन पूरे जम्मू-कश्मीर राज्य में और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है। मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली के लिए अब सबकी नजरें प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इन युवा डॉक्टरों को कैसे मनाते हैं।