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मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का नया ब्लूप्रिंट, समय पर होंगे एग्जाम और रिजल्ट

मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का नया ब्लूप्रिंट, समय पर होंगे एग्जाम और रिजल्ट

शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ उसकी समयबद्धता और अनुशासन में छिपी होती है। जब तक प्रवेश प्रक्रिया से लेकर परीक्षा और परिणामों के ऐलान तक का चक्र एक तय कैलेंडर के हिसाब से नहीं चलता, तब तक विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका रहता है। इसी मुख्य बिंदु को केंद्र में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहद अहम और दूरगामी कदम उठाने का ऐलान किया है। राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अकादमिक सत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए हर चरण का समय पर पूरा होना अनिवार्य है।

राजधानी भोपाल के एलएनसीटी विश्वविद्यालय में हाल ही में आयोजित एक उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान शिक्षा व्यवस्था की दशा और दिशा पर गंभीर मंथन किया गया। ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर आधारित इस दो दिवसीय आयोजन में देश भर के दिग्गज शिक्षाविद्, कुलगुरु और शोधार्थी एकत्रित हुए। इस दौरान मंत्री इन्दर सिंह परमार ने अपने संबोधन में वर्तमान शिक्षा प्रणाली की कमियों पर बेबाकी से बात की और उसके समाधान के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाने पर जोर दिया।

समयबद्धता के बिना शिक्षा अधूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री परमार ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि प्रवेश समय पर न हो, कक्षाएं नियमित न चलें और परिणाम महीनों की देरी से आएं, तो वह शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों के साथ न्याय नहीं कर सकती। उन्होंने दो टूक कहा कि:

प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम में समयबद्धता शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता की मूल आवश्यकता है। समय पर प्रवेश, नियमित अध्ययन-अध्यापन, निर्धारित समय पर परीक्षा एवं परिणाम तथा अकादमिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किए बिना विद्यार्थियों का समग्र एवं न्यायसंगत मूल्यांकन संभव नहीं है।

यही वजह है कि सरकार अब केवल कागजी दावों तक सीमित न रहकर ज़मीन पर ठोस बदलाव लाने की तैयारी कर चुकी है। अकादमिक कैलेंडर की एक-एक तारीख का सख्ती से पालन करवाना अब उच्च शिक्षा विभाग की प्राथमिकता बन गया है।

कक्षाओं में उपस्थिति के लिए ‘सार्थक ऐप’ का इस्तेमाल

शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों का अलगाव और कक्षाओं में घटती उपस्थिति आज के समय में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इस समस्या से पार पाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। मंत्री परमार ने घोषणा की कि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अब आगामी सत्र से ‘सार्थक ऐप’ का उपयोग किया जाएगा।

इस डिजिटल पहल के जरिए छात्रों की क्लासरूम में मौजूदगी पर पैनी नज़र रखी जाएगी। इसके माध्यम से न केवल बंक मारने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद का स्तर भी सुधरेगा। जब छात्र नियमित रूप से कक्षा में आएंगे, तभी वे भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय को गहराई से समझ पाएंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020: एक राष्ट्रीय संकल्प

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विभिन्न आयामों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री परमार ने इसे केवल एक नीतिगत दस्तावेज मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह देश के सर्वांगीण विकास का एक राष्ट्रीय संकल्प है। यह नीति हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने और आधुनिक दुनिया की जरूरतों के साथ कदमताल करने का अवसर देती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि:

  • परीक्षाएं केवल रटी-रटाई विद्या को मापने का पैमाना नहीं होनी चाहिए।
  • मूल्यांकन पद्धति ऐसी हो जो छात्र की चिंतन क्षमता और सृजनात्मकता को परखे।
  • भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली में सहजता से पिरोया जाए।
  • विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा और कौशल को बाहर लाने के लिए पारदर्शी तंत्र विकसित हो।

मूल्यांकन व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी

पारंपरिक परीक्षा प्रणालियों में अक्सर छात्र के केवल एक या दो दिन के प्रदर्शन को उसके सालभर की मेहनत का पैमाना मान लिया जाता है, जिसे मंत्री परमार ने अनुचित बताया। उनका मानना है कि परीक्षा छात्र की प्रतिभा, क्षमता, कौशल और उसकी संभावनाओं को पहचानने का माध्यम बननी चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा कभी भी शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि वह संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास की बात करती है।

इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य यही है कि एक ऐसी आदर्श परीक्षा और मूल्यांकन पद्धति का खाका तैयार किया जाए, जो न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के विश्वविद्यालयों के लिए एक मिसाल या अनुकरणीय मॉडल बन सके।

दिग्गज शिक्षाविदों का मंथन

इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश के कई जाने-माने शिक्षाविदों और विचारकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और मंथन में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान:

  • शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने अपने विचार रखे।
  • मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कड़ेल ने वैचारिक प्रस्तुतियां दीं।
  • पूर्व कुलपति डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज और शिक्षाविद् डॉ. रविंद्र कान्हेरे ने मूल्यांकन सुधारों पर सुझाव दिए।
  • मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. खेम सिंह डेहरिया और आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा भी इस दौरान सक्रिय रूप से मौजूद रहे।

देशभर से आए विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों, परीक्षा नियंत्रकों और विषय-विशेषज्ञों के सामूहिक बौद्धिक मंथन से जो निष्कर्ष निकलेंगे, उन्हें आने वाले समय में मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम और परीक्षा तंत्र में शामिल किया जाएगा।

भविष्य की दिशा और निष्कर्ष

यह पूरा घटनाक्रम इस बात का गवाह है कि मध्य प्रदेश अब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश का अगुआ बनने की राह पर निकल पड़ा है। समयबद्धता, तकनीक का इस्तेमाल (जैसे सार्थक ऐप), और भारतीय ज्ञान परंपरा का अनूठा मेल यदि ज़मीन पर पूरी शिद्दत से उतरता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलेगा। डिग्री केवल एक कागज़ का टुकड़ा बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि वह छात्र के वास्तविक कौशल और ज्ञान का प्रमाण बनेगी। आने वाले दिनों में इन प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक नया सवेरा देखने को मिल सकता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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