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पटना के फतुहा में बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, अंचल कार्यालय का किया घेराव

पटना के फतुहा में बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, अंचल कार्यालय का किया घेराव

पटना के फतुहा में गहराया बाढ़ का संकट, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

बिहार की राजधानी पटना के फतुहा इलाके में कुदरत का कहर इन दिनों अपने चरम पर है। गंगा और पुनपुन नदियों के उफान पर होने के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि प्रशासनिक सुस्ती और राहत सामग्री न मिलने से नाराज सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों का सब्र सोमवार को आखिरकार टूट गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने फतुहा प्रखंड सह अंचल कार्यालय का जोरदार घेराव किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया।

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब उनके घर पानी में डूब चुके हैं और खाने के लाले पड़े हैं, तब प्रशासन कागजी दावों में व्यस्त है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल को मौके पर तैनात करना पड़ा।

गंगा और पुनपुन के जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

सितंबर के इस महीने में भी मूसलाधार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने तबाही मचा रखी है। पटना जिले के फतुहा क्षेत्र में गंगा और पुनपुन नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं, जिससे इनका पानी निचले और दियारा इलाकों में तेजी से फैल रहा है। स्थिति यह है कि दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट चुका है।

लोग अपने आशियानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। कई परिवारों ने सड़क के किनारे या ऊंचे बांधों पर प्लास्टिक की पन्नी तानकर शरण ली है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा है कि संभलने का मौका तक नहीं मिला।

राहत सामग्री और पशुचारे का घोर अभाव

बाढ़ की इस विभीषिका के बीच सबसे बड़ी समस्या राहत सामग्री और पशुचारे की किल्लत बन गई है। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आपदा के इतने दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई सुधि लेने नहीं आया।

  • मुख्य परेशानियां जिनका सामना ग्रामीण कर रहे हैं:
  • प्रभावित इलाकों में पीने के साफ पानी की भारी कमी है।
  • बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूध और सूखे राशन का कोई इंतजाम नहीं है।
  • मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था न होने से किसान खासे चिंतित हैं।
  • चिकित्सकीय सहायता और दल की भारी कमी बनी हुई है।

ग्रामीणों का दर्द इन शिकायतों में साफ झलक रहा था कि इंसानों के साथ-साथ उनके मूक पशु भी भूखे रहने को विवश हैं। बाढ़ के पानी में घिरे लोग अपने स्तर पर ही किसी तरह गुजारा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो नाकाफी साबित हो रहा है।

फतुहा को 'बाढ़ प्रभावित क्षेत्र' घोषित करने की उठी मांग

अंचल कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपते हुए अपनी कुछ प्रमुख और तत्काल प्रभाव से पूरी होने वाली मांगें रखीं। ग्रामीणों की सबसे पहली मांग यह है कि सरकार फतुहा क्षेत्र को तुरंत आधिकारिक तौर पर 'बाढ़ प्रभावित क्षेत्र' घोषित करे।

इसके साथ ही लोगों ने मांग की है कि:

  • बाढ़ के कारण गिरे मकानों और डूबी फसलों का तुरंत आकलन कराया जाए।
  • नुकसान के एवज में प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा जल्द से जल्द दिया जाए।
  • राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए और वहां भोजन-पानी की पुख्ता व्यवस्था हो।
  • आवागमन के लिए पर्याप्त मात्रा में नौकाओं (बो्ट्स) का संचालन किया जाए।

प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया और चेतावनी

हंगामे और घेराव की सूचना मिलने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और अंचल के वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित भीड़ को शांत कराने का प्रयास किया और जल्द से जल्द हरसंभव मदद पहुंचाने का भरोसा दिया। अधिकारियों ने कहा कि राहत सामग्री वितरण का कार्य तेजी से शुरू किया जा रहा है और किसी भी पीड़ित को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा।

हालांकि, ग्रामीणों का गुस्सा अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ घंटों में ज़मीनी स्तर पर राहत कार्य शुरू नहीं हुए और भोजन-पशुचारा नहीं बांटा गया, तो वे इस आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाने के लिए बाध्य होंगे। इस स्थिति पर अब पूरे जिले की निगाहें टिकी हैं कि प्रशासन कितनी जल्दी इन संकटग्रस्त लोगों तक राहत पहुंचा पाता है।

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नसीम अहमद

नसीम अहमद

Writer (स्थानीय खबरें)

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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