राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम इलाके सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बहुमंजिला इमारत हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र और गैरकानूनी निर्माणों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार दोपहर को हुई इस वीभत्स घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जहाँ 30 साल पुरानी पाँच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस हृदयविदारक हादसे में 6 मासूम छात्रों समेत कुल 7 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद से ही पूरे इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल है। इस बीच, इस पूरे प्रकरण में दिल्ली पुलिस और नगर निगम (MCD) ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है।
मुख्य आरोपी मकान मालिक राजस्थान से गिरफ्तार
हादसे के ठीक बाद से ही मुख्य आरोपी और भवन का मालिक हरिराम बंसल अपनी जान बचाकर भूमिगत हो गया था। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था। दिल्ली पुलिस ने उसकी धरपकड़ के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी को दबोचने के लिए जिला पुलिस, स्पेशल स्टाफ और विभिन्न ऑपरेशन यूनिट्स के विशेष पुलिसकर्मियों को मिलाकर कुल 10 अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था। इन सभी टीमों का नेतृत्व एक एडिशनल डीसीपी रैंक के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे थे।
दिल्ली और हरियाणा के कई संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी करने के बाद, आखिरकार पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। लंबी मशक्कत और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने मुख्य आरोपी हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत दिल्ली लाया गया है, जहाँ पुलिस हिरासत में उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह खंगालने का प्रयास कर रही हैं कि इस पुरानी और जर्जर इमारत में नियमों को ताक पर रखकर पीजी का संचालन कौन और किसकी शह पर कर रहा था। इस मामले में लापरवाही से जुड़े तमाम कानूनी और तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
MCD का हंटर: 5 वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर तत्काल प्रभाव से निलंबित
सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। इस भीषण हादसे के पीछे प्रशासनिक लापरवाही को मुख्य कारण मानते हुए निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। MCD के विजिलेंस विभाग की तरफ से जारी किए गए अलग-अलग आधिकारिक आदेशों के अनुसार, दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर (DC) सहित कुल 5 शीर्ष अधिकारियों और वरिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन सभी के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Proceedings) लंबित रखी गई है।
MCD द्वारा निलंबित किए गए अधिकारियों के नाम इस प्रकार हैं:
- राकेश कुमार: डिप्टी कमिश्नर (दक्षिण जोन)
- रणवीर सिंह: सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE / दक्षिण जोन)
- ललित कुमार गोयल: एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE – बिल्डिंग)
- सुनील चौहान: असिस्टेंट इंजीनियर (AE – बिल्डिंग)
- आशीष कुमार: जूनियर इंजीनियर (JE – बिल्डिंग)
किस नियम के तहत हुई यह बड़ी कार्रवाई?
नगर निगम आयुक्त के स्पष्ट निर्देशों और अनुपालन के तहत जारी इन आदेशों में यह बात साफ तौर पर उल्लेखित की गई है कि इन सभी अधिकारियों को 'DMC Services (Control & Appeal) Regulations, 1959' के Regulation 5(2) के प्रावधानों के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान इन अधिकारियों को नियमों के मुताबिक केवल निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) ही प्रदान किया जाएगा। हालांकि, जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में किसी खास और तात्कालिक अनियमितता का विस्तृत ब्योरा दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर क्षेत्र में चल रहे अवैध और जर्जर निर्माणों पर समय रहते पैनी नजर न रखने तथा अपनी ड्यूटी में भारी लापरवाही बरतने के कारण की गई है।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
घटना के चश्मदीदों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 1 बजे सत्य निकेतन की घनी आबादी वाले इलाके में स्थित यह 5 मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर पड़ी। इमारत इतनी पुरानी और जर्जर थी कि अंदर रहने वाले लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस दुर्घटना में कुल 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें 6 छात्र शामिल हैं जो वहाँ रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे थे। इसके अलावा एक मजदूर का शव भी मलबे से बाहर निकाला गया।
प्रशासन की त्वरित और तत्पर रेस्क्यू टीमों ने मलबे से अब तक कुल 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस भयानक हादसे ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण, अनधिकृत पीजी संचालन और बिल्डिंग बायर्स के नियमों की अनदेखी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आम जनता में इस बात को लेकर भारी रोष है कि आखिर कैसे बिना सुरक्षा मानकों के इतने बड़े पैमाने पर बहुमंजिला इमारतें चलाई जा रही थीं, जिन पर स्थानीय प्रशासन की नजर तक नहीं पड़ी।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक सुधार
फिलहाल, दिल्ली पुलिस और MCD की संयुक्त टीमें इस मामले की तह तक जाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं। मकान मालिक हरिराम की गिरफ्तारी के बाद अब कई अन्य चेहरों से भी पर्दा उठने की पूरी उम्मीद है जो इस अवैध निर्माण और संचालन में पर्दे के पीछे शामिल हो सकते हैं। प्रशासन यह भी सुनिश्चित करने में जुटा है कि दिल्ली के अन्य इलाकों में इस तरह के जर्जर और खतरनाक भवनों का सर्वे कराया जाए ताकि भविष्य में सत्य निकेतन जैसी किसी अन्य बड़ी त्रासदी को होने से समय रहते रोका जा सके।