लखनऊ की पावन धरती पर शिक्षा और प्रतिभा का एक ऐसा महाकुंभ सजा, जिसने देश के भविष्य यानी नौनिहालों के भीतर कुछ कर गुजरने की एक नई अलख जगा दी। अवसर था 13वें इंडिया जीनियस अवॉर्ड समारोह-2026 का, जहां उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आए मेधावी छात्रों का हुजूम देखने को मिला। इस भव्य आयोजन ने साबित कर दिया कि यदि बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा को सही समय पर पहचान और उचित मंच मिल जाए, तो वे आसमान छूने की ताकत रखते हैं। कार्यक्रम के दौरान न सिर्फ मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया, बल्कि शिक्षा जगत के उन गुमनाम नायकों यानी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को भी सराहा गया जो पीढ़ियों को गढ़ने में दिन-रात एक कर रहे हैं।
भव्य दीप प्रज्वलन के साथ हुआ समारोह का आगाज
राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित होली पब्लिक स्कूल का सभागार सोमवार, 07 सितंबर 2026 को खचाखच भरा हुआ था। बच्चों की आंखों में सपने और चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। इस शानदार समारोह का औपचारिक शुभारंभ उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उनके साथ मंच पर शिक्षा जगत और प्रशासनिक क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं। कार्यक्रम की शुरुआत में ही पूरे सभागार में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया, जब विभिन्न जिलों से आए 800 से अधिक विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति से इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में हरिश चंद्र श्रीवास्तव, लेफ्टिनेंट कर्नल विवेक गुप्ता और राहुल सेन सक्सेना ने भी शिरकत की। इन दिग्गजों ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें जीवन में कभी हार न मानने और निरंतर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि आज के ये बाल वैज्ञानिक, गणितज्ञ और मेधावी कल के भारत की तकदीर लिखने वाले हैं।
आद्या साहा और अर्णव शर्मा ने रचा नया इतिहास
समारोह का सबसे रोमांचक और बहुप्रतीक्षित पल वह था जब मुख्य विजेताओं के नामों की घोषणा की गई। हाथरस के बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल के छात्र अर्णव शर्मा और मैनपुरी की सुदिति ग्लोबल एकेडमी की छात्रा आद्या साहा को संयुक्त रूप से वर्ष 2026 के सर्वोच्च ‘इंडिया जीनियस’ के सम्मान से नवाजा गया। इन दोनों की उपलब्धि ने उनके जिलों के साथ-साथ पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है।
खास तौर पर कक्षा 03 की नन्हीं छात्रा आद्या साहा ने तो इतिहास ही रच दिया। इंडिया जीनियस अवॉर्ड के पूरे 13 वर्षों के इतिहास में आद्या इतनी कम उम्र में यह प्रतिष्ठित खिताब हासिल करने वाली पहली और सबसे कम उम्र की छात्रा बन गई हैं। उनकी इस असाधारण उपलब्धि पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। आद्या की इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, बस जरूरत होती है उसे सही दिशा और मार्गदर्शन मिलने की।
मेधावियों को मिले साइकिल, टैबलेट और ढेरों पदक
बच्चों की मेहनत और लगन को केवल जुबानी तारीफों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें ठोस प्रोत्साहन राशि और उपहार भी दिए गए। समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 25 मेधावी विद्यार्थियों को अत्याधुनिक साइकिलें प्रदान की गईं, ताकि वे अपनी स्कूल की यात्रा को और सुगम बना सकें। इसके अलावा डिजिटल युग की जरूरतों को समझते हुए 12 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को हाई-टेक टैबलेट भी भेंट किए गए।
इन बड़े पुरस्कारों के अलावा प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाले सभी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक के साथ-साथ प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। बच्चों के चेहरों पर इन पुरस्कारों को पाकर जो मुस्कान थी, वह देखने लायक थी। यह पल उनके अभिभावकों के लिए भी बेहद गर्व और भावुक करने वाला था, जिन्होंने अपने बच्चों की सफलता के लिए कड़ा संघर्ष किया है।
शिक्षकों और स्कूल प्रशासनों का भी हुआ राष्ट्रीय सम्मान
किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे एक योग्य गुरु का हाथ होता है। इस बात को समझते हुए 13वें इंडिया जीनियस अवॉर्ड समारोह में शिक्षा जगत से जुड़े 100 से अधिक प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, प्रबंधकों और समन्वयकों को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर के सम्मानों से नवाजा गया।
इस कड़ी में अवध कॉलेजिएट, लखनऊ की प्रबंध निदेशक जतिंदर वालिया को उनके बेहतरीन नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता के लिए 'राष्ट्रीय उत्कृष्ट विद्यालय प्रशासन सम्मान-2026' से अलंकृत किया गया। शिक्षकों के सम्मान से यह स्पष्ट हुआ कि समाज में शिक्षा की नींव को मजबूत करने वालों का योगदान कभी अनदेखा नहीं किया जाता।
अपर्णा यादव बोलीं- बच्चों की प्रतिभा ही देश की असली पूंजी
समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने आयोजकों की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लगातार 13 वर्षों से इस प्रकार का मंच प्रदान करना कोई साधारण बात नहीं है। यह आयोजन बच्चों के भीतर छिपी हुई क्षमता को बाहर निकालने और उन्हें राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
"बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उचित अवसर एवं सम्मान प्रदान करना न केवल उनके व्यक्तिगत आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ाता है, बल्कि यह देश के उज्ज्वल और सशक्त भविष्य की मजबूत नींव भी रखता है। आज के ये बच्चे कल के भारत का नेतृत्व करेंगे।" — अपर्णा यादव, उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश
आयोजकों ने साझा की 13 वर्षों की गौरवशाली यात्रा
इंडिया जीनियस अवॉर्ड ओलंपियाड-2026 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमित श्रीवास्तव ने इस संस्था की 13 साल लंबी यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस संस्था का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं है, बल्कि देश के दूर-दराज के इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों की प्रतिभा को खोजना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें आगे बढ़ने के सुनहरे अवसर उपलब्ध कराना है।
अमित श्रीवास्तव ने गर्व के साथ साझा किया कि इन 13 वर्षों में हजारों विद्यार्थियों ने इस मंच के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है और जीवन में बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। उन्होंने इस वर्ष के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष: एक प्रेरणादायक शाम
समारोह के समापन पर एक सकारात्मक और ऊर्जावान माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह बता दिया कि आने वाले समय में देश के युवा शिक्षा, विज्ञान और कला के क्षेत्र में नए मील के पत्थर स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लखनऊ के इस प्रतिष्ठित मंच से उठी सफलता की यह गूंज दूर-दूर तक युवाओं को प्रेरित करती रहेगी।