केरल विधानसभा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए आज पेश करेगी ऐतिहासिक प्रस्ताव, देश में बनी ऐसी पहली विधानसभा
केरल में कांग्रेस नीत सरकार सोमवार को राज्य विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करने जा रही है, जिसमें केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का आग्रह किया जाएगा। इसके साथ ही केरल विधानसभा देश की ऐसी पहली विधानसभा बन जाएगी, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर औपचारिक प्रस्ताव लेकर आ रही है।
विधानसभा के बुलेटिन के अनुसार, इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन द्वारा सदन में पेश किया जाएगा। यह घटनाक्रम 16वीं केरल विधानसभा के दूसरे सत्र की शुरुआत के साथ हो रहा है।
प्रस्ताव की प्रमुख मांगें और बिंदु
यह प्रस्ताव केवल मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य अहम राजनीतिक और चुनावी सुधारों की मांग भी शामिल की गई है:
- मतदाता सूची में सुधार: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में आई विसंगतियों को दूर करके उन सभी पात्र मतदाताओं के मताधिकार को बहाल किया जाए, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
- चयन समिति का पुनर्गठन: चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए बनाई जाने वाली समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल किया जाए।
- निष्पक्षता और साख की बहाली: प्रस्ताव में कहा गया है कि आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा हो रहे हैं, इसलिए चुनाव आयोग की साख को बहाल करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना अनिवार्य कदम है।
- लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन: प्रस्ताव के मसौदे में आरोप लगाया गया है कि तकनीकी हेरफेर और अनियमितताओं के माध्यम से अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, हाशिए के वर्गों और युवाओं के मतदान अधिकारों से वंचित किया जाना लोकतांत्रिक सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।
विधानसभा का दलीय समीकरण और राजनीतिक पृष्ठभूमि
कुल 140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के पास 102 विधायक हैं, जबकि CPI(M) नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के पास 35 विधायक हैं। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 3 विधायक हैं। चूंकि कांग्रेस और CPI(M) दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर CEC को हटाने के चल रहे विरोध प्रदर्शन और अभियान का हिस्सा हैं, इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि यह प्रस्ताव विधानसभा में आसानी से पारित हो जाएगा। अतीत में भी ऐसे कई मौके आए हैं जब CPI(M) और कांग्रेस के समर्थन से केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए हैं।
हालांकि प्रस्ताव में यह जिक्र किया गया है कि 'एसआईआर' की आड़ में लाखों पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, लेकिन इसमें केरल राज्य का कोई विशिष्ट संदर्भ नहीं दिया गया है, जहां यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पिछले विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे। राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से पात्र मतदाताओं को हटाए जाने को लेकर न तो कांग्रेस और न ही CPI(M) ने उस समय कोई विशेष शिकायत दर्ज कराई थी।
पिछले साल एसआईआर के खिलाफ पारित हुआ था प्रस्ताव
इससे पहले पिछले साल सितंबर में, तत्कालीन LDF सरकार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री पिनारावी विजयन ने विधानसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 118 के तहत एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उस प्रस्ताव में चुनाव आयोग से देश भर में SIR लागू करने के अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया गया था। उस समय केरल विधानसभा देश की पहली ऐसी विधानसभा बनी थी जिसने SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। उस प्रस्ताव में आशंका जताई गई थी कि चुनाव आयोग का यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने का एक प्रयास है।