पत्रकारिता को अक्सर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, जहां एक पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी कलम और उसकी पैनी निगाहें मानी जाती हैं। लेकिन जब कोई कलम का सिपाही विपरीत परिस्थितियों में इंसानियत का ऐसा पाठ पढ़ाता है, जो सीधे जिंदगी और मौत के बीच की दीवार बन जाए, तो वह सम्मान का असली हकदार बन जाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा के एक युवा पत्रकार ने, जिनकी बहादुरी और सूझबूझ ने आज एक हंसते-खेलते परिवार को उजड़ने से बचा लिया।
रामगढ़ प्रेस क्लब में उमड़ा सम्मान का सैलाब
शुक्रवार को रामगढ़ प्रेस क्लब के परिसर में एक बेहद खास और प्रेरणादायक माहौल देखने को मिला। अवसर था झारखंड के माटी के लाल और पत्रकार अनिल विश्वकर्मा के सम्मान समारोह का। इस गरिमामयी आयोजन में जिले भर के पत्रकारों ने शिरकत की और अनिल की उस अदम्य साहस व मानवीय संवेदना को सलाम किया, जिसने संकट के समय एक पुलिसकर्मी को नया जीवनदान दिया।
समारोह के दौरान प्रेस क्लब के सचिव धर्मेंद्र पटेल और पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार उर्फ बिरू ने संयुक्त रूप से अनिल विश्वकर्मा को अंगवस्त्र, आकर्षक मोमेंटो और पुष्पगुच्छ (बुके) भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर किसी की जुबान पर बस एक ही चर्चा थी कि कैसे एक पत्रकार ने अपनी सूझबूझ से मौत को मात दे दी।
जब एक पल की देरी छीन सकती थी जिंदगी
घटना उस समय की है जब हजारीबाग जिला बल के सिपाही आनंद कुमार और उनका परिवार अचानक एक भयंकर मेडिकल इमरजेंसी की चपेट में आ गया। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कुछ ही पलों में सब कुछ खत्म हो सकता था। जिस जगह पर यह हादसा हुआ, वहां से किसी भी अस्पताल की दूरी और तुरंत मेडिकल सहायता का मिलना लगभग असंभव सा प्रतीत हो रहा था। अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी सिपाही आनंद कुमार की जान पर भारी पड़ सकती थी।
लेकिन कहते हैं न कि जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय। उस विकट परिस्थिति में भगवान बनकर वहां मौजूद थे पत्रकार अनिल विश्वकर्मा। अनिल को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिसुसिटेशन) देने का तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त था। बिना एक पल गंवाए, बिना यह सोचे कि आगे क्या होगा, अनिल ने अपनी जानकरी और ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए तुरंत सिपाही आनंद को सीपीआर देना शुरू कर दिया।
सीपीआर तकनीक ने दिखाई अपनी जादुई असर
चिकित्सकीय जानकारों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट या सांस रुकने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं, जिन्हें 'गोल्डन ऑवर्स' कहा जाता है। यदि इस दौरान मरीज को सही तरीके से चेस्ट कंप्रेशन यानी सीपीआर मिल जाए, तो उसकी बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। अनिल विश्वकर्मा ने बिल्कुल यही किया। उनकी त्वरित कार्रवाई ने आनंद कुमार के शरीर में रुकी हुई सांसों को फिर से जागृत कर दिया।
इस साहसिक कदम के बारे में बात करते हुए रामगढ़ प्रेस क्लब के सचिव धर्मेंद्र पटेल ने गर्व के साथ कहा, 'पत्रकारिता का दायरा केवल खबरें लिखना या चलाना नहीं है। एक सच्चा पत्रकार समाज का अंग होता है और संकट की हर घड़ी में लोगों की सहायता करना उसका नैतिक कर्तव्य भी है। सीपीआर में ट्रेंड हमारे साथी अनिल विश्वकर्मा ने न सिर्फ राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक बड़े दोहरे सदमे से बचाया, बल्कि हजारीबाग जिला बल के सिपाही आनंद कुमार और उनके पूरे परिवार को एक नया जीवनदान दिया है। आज सिपाही आनंद अपने बच्चों और परिवार के बीच सुरक्षित खड़े हैं, तो इसका पूरा श्रेय अनिल की सूझबूझ को जाता है।'
समारोह में मौजूद रहे जिले के कई गणमान्य पत्रकार
इस प्रेरणादायक सम्मान समारोह में रामगढ़ प्रेस क्लब के तमाम पदाधिकारी और सदस्य उत्साह के साथ मौजूद रहे। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वालों में उपाध्यक्ष प्रदीप राज बब्लू, संयुक्त सचिव दिलीप कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष दुर्वेज आलम, कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण कुमार, सुरेंद्र सिंह, रितेश कश्यप, तरुण बागी, ज्योति सिंह, प्रिंस वर्मा और संजय नायक सहित कई अन्य पत्रकार प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि अनिल का यह कार्य पूरे पत्रकार जगत के लिए गर्व का विषय है।
मानवता की यह मिसाल देगी आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा
आज के इस आधुनिक दौर में जहां अक्सर संवेदनशीलता के कम होने की बातें कही जाती हैं, वहीं नेमरा गांव के इस पत्रकार ने यह साबित कर दिया है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। जरूरत है तो बस सूझबूझ, साहस और सही समय पर सही कदम उठाने की। अनिल विश्वकर्मा की यह कहानी न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर हर मंच पर उनकी इस बहादुरी की सराहना की जा रही है। यह घटना हमें सिखाती है कि बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और सीपीआर जैसी जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी हर आम और खास इंसान को होनी चाहिए, ताकि आपातकाल में किसी कीमती जान को बचाया जा सके।