पंजाब के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में पिछले दिनों हुए भारी बवाल और हिंसा के मामले में पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 27 और 28 सितंबर को परिसर में भड़की हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और नेशनल हाईवे को जाम करने जैसी गंभीर घटनाओं के सिलसिले में कानून का शिकंजा कसते हुए कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई ने पूरे शैक्षणिक जगत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि गिरफ्तार किए गए लोगों में एक बड़ा हिस्सा खुद यूनिवर्सिटी के छात्रों का ही है।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सात छात्र और दो बाहरी गिरफ्तार
कपूरथला पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों में से सात अलग-अलग राज्यों के एलपीयू के ही छात्र हैं, जबकि दो अन्य आरोपी यूनिवर्सिटी से बाहर के बताए जा रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की एसआईटी (विशेष जांच दल) लगातार डिजिटल साक्ष्यों को खंगालने में जुटी हुई है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान फगवाड़ा के रहने वाले गगनदीप और जसप्रीत कुमार के रूप में हुई है। इनके अलावा सोनीपत से जेम्स दहिया, हमीरपुर से आशुतोष, जम्मू से अंतरिक्ष दत्ता और साहिल सिंह, तथा महाराष्ट्र से कृष्णा कुमार और भविष्य करण को दबोचा गया है। इन सभी पर विरोध प्रदर्शन के नाम पर भारी हिंसा फैलाने और कानून हाथ में लेने का गंभीर आरोप है।
मिग-23 विमान पर चढ़ने वाला नाबालिग भी हिरासत में
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सोशल मीडिया पर एक तस्वीर सबसे ज्यादा वायरल हुई थी, जिसमें एक युवक यूनिवर्सिटी परिसर में शान से खड़े ऐतिहासिक मिग-23 लड़ाकू विमान के ऊपर चढ़ा हुआ नजर आ रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक नाबालिग छात्र को भी हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि यही वह नाबालिग छात्र था जो प्रदर्शन के दौरान उस फाइटर जेट पर चढ़ गया था। इस हरकत की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल गए थे, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस पर विशेष रूप से टिकी हुई थी।
DIG और SSP ने प्रेसवार्ता में किए बड़े खुलासे
जालंधर रेंज के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) नवीन सिंगला ने कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव तूरा के साथ एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया के सामने घटना की परतें खोलीं और अब तक की गई पुलिस कार्रवाई का पूरा ब्योरा रखा।
डीआईजी नवीन सिंगला ने बताया कि सतनामपुरा थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 163 के तहत कुल 20 लोगों को नामजद किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष एसआईटी का गठन किया गया था। इस एसआईटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विभिन्न डिजिटल स्रोतों, यूनिवर्सिटी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और मीडिया रिपोर्ट्स का बारीकी से विश्लेषण किया है।
आगजनी, लूट और पुलिस पर हमले के पुख्ता सबूत
पुलिस जांच में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था, बल्कि इसके आड़ में सुनियोजित तरीके से उपद्रव किया गया। पुलिस का दावा है कि वीडियो फुटेज के जरिए कई लोगों की पहचान की गई है, जिनकी भूमिका यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी करने, कथित तौर पर लूटपाट करने, नेशनल हाईवे को ब्लॉक करने और पुलिस कर्मियों पर हमला करने में रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह तो अभी शुरुआत है। मामले की हर एक पहलू से गहनता से जांच की जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने का सिलसिला लगातार जारी है।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी रडार पर
इस हिंसा को हवा देने और भीड़ को उकसाने में सोशल मीडिया की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने एलपीयू के ही एक पूर्व छात्र और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फरहत देव को भी इस मामले में चिन्हित कर लिया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, लेकिन पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस अब तक इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े लगभग 40 ऐसे लोगों की पहचान करने में सफल रही है जिनकी इस उपद्रव में संलिप्तता पाई गई है। फगवाड़ा सदर थाने में भी एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें पुलिस वाहनों को निशाना बनाने, उन पर हमला करने और आगजनी फैलाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
मूल यौन उत्पीड़न के मामले पर असमंजस बरकरार
गौरतलब है कि एलपीयू में यह पूरा विवाद कथित तौर पर एक यौन उत्पीड़न के मामले से शुरू हुआ था। इस मूल मामले को लेकर भी पुलिस की जांच समानांतर रूप से जारी है। हालांकि, पुलिस के सामने इस मामले में एक बड़ी पहेली यह बनी हुई है कि तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक कथित पीड़िता की आधिकारिक तौर पर पहचान नहीं हो पाई है।
सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस यूनिवर्सिटी के विभिन्न छात्रों, फैकल्टी मेंबर और कर्मचारियों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि आखिर इस अफवाह या घटना की असल जड़ कहां तक जुड़ी थी।
सुरक्षा व्यवस्था और आगे की राह
इस घटना के बाद से एलपीयू परिसर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी छात्रों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।