उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में 28 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस लंबे आंदोलन के कारण प्रदेश के कई जिलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्वास्थ्य सेवाएँ गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों के मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन, गैर-संचारी रोगों (NCD) की स्क्रीनिंग, टेलीमेडिसिन सुविधा और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की देखरेख में CHO प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके अनिश्चितकालीन धरने पर चले जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रभावित होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
प्रमुख माँगे और आंदोलन का नेतृत्व
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सनत सिंह के नेतृत्व में यह आंदोलन चलाया जा रहा है। संघ और प्रदर्शनकारी CHO की प्रमुख मांगों में मुख्य रूप से नियमितीकरण करना, उनके लिए एक पृथक कैडर का गठन करना, वेतन एवं मानदेय से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना, लंबित प्रोत्साहन राशि का समय पर भुगतान करना और सेवा संबंधी अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना शामिल है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी इन न्यायसंगत मांगों को प्रशासन के समक्ष रखते आए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। मजबूरन उन्हें अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतरकर अनिश्चितकालीन धरना देना पड़ रहा है।
प्रशासन और शासन से संवाद की अपेक्षा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखना है, तो शासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। आंदोलनरत CHO प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित कर उनकी समस्याओं का समयबद्ध और व्यावहारिक समाधान निकाला जाना आवश्यक है, ताकि ग्रामीण अंचल के आम नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ मिलने में कोई बाधा न आए।