शारदीय नवरात्रि के अवसर पर बरेली की रश्मि छाबड़ा की सफलता उन तमाम महिलाओं के लिए एक मजबूत मिसाल है, जो उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक बाधाओं को पीछे छोड़कर अपने सपनों की उड़ान भरना चाहती हैं। कभी 94 किलोग्राम वजन के मोटापे से परेशान होकर फिटनेस की राह पर निकलीं रश्मि आज पावरलिफ्टिंग की दुनिया में 'मिस एशिया' और 'मिस इंडिया' जैसे प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के रामपुर गार्डन की रहने वाली 40 वर्षीय रश्मि छाबड़ा ने वर्ष 2018 में स्थानीय जिम का रुख किया था। उस समय उनका मुख्य उद्देश्य केवल अपने बढ़े हुए वजन को नियंत्रित करना और खुद को स्वस्थ रखना था। जिम में उनके कोच देवेंद्र कुमार गंगवार ने उनकी शारीरिक क्षमता और प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने रश्मि को सामान्य फिटनेस से आगे बढ़कर पावरलिफ्टिंग और बॉडी बिल्डिंग की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे जिम उनकी दैनिक जीवनशैली का अहम हिस्सा बन गया और उन्होंने प्रतियोगिताओं के लिहाज से कड़ा अभ्यास शुरू कर दिया।
सामाजिक ताने और पारिवारिक चिंताएं
जब रश्मि ने भारी वजन उठाने और जिम में पसीना बहाना शुरू किया, तो उन्हें समाज की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लोगों ने तानें कसते हुए यह तक कहना शुरू कर दिया कि लड़कों की तरह बॉडी बनाने से उनका शारीरिक सौंदर्य और फिगर खराब हो जाएगा। इसके अलावा, परिवार के सदस्यों को भी उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता होने लगी, जिसके चलते उन्हें जिम जाने से रोकने के प्रयास भी किए गए। हालांकि, इन सभी बाधाओं और नकारात्मक टिप्पणियों के बावजूद रश्मि ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और पूरी एकाग्रता के साथ अपने लक्ष्य पर डटी रहीं।
प्रयासों का मिला फल: मिस इंडिया और मिस एशिया का ताज
रश्मि की कड़ी मेहनत का सफर आसान नहीं था। वर्ष 2023 में उन्हें पहली बार उत्तर प्रदेश की टीम से आधिकारिक प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिला, लेकिन उस प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। इस असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत किया। इसका परिणाम यह रहा कि वर्ष 2024 में उत्तराखंड के काशीपुर में आयोजित बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में उन्होंने 'मिस इंडिया' का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया। इसी वर्ष मेघालय में आयोजित प्रतियोगिता में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 'मिस एशिया' का ताज जीत लिया। इन बड़ी सफलताओं के बाद वही लोग, जो कभी उन्हें हतोत्साहित करते थे, बधाई देने उनके घर पहुंचे। रश्मि अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने कोच देवेंद्र पाल गंगवार को देती हैं।
गृहिणी से एथलीट तक का सफर और फिटनेस संदेश
रश्मि एक जिम्मेदार गृहिणी और मां की भूमिका भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। उनके पति का मेडिकल स्टोर है और उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें छोटी बेटी जिम्नास्टिक एथलीट है जबकि बड़ी बेटी एमबीए की पढ़ाई कर रही है। कभी 94 किलो वजन वाली रश्मि का वजन अब घटकर 65 किलोग्राम रह गया है। वे अपनी सेहत को बनाए रखने के लिए रोजाना डेढ़ घंटे का समय कसरत को देती हैं। आज की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए उनका कहना है कि युवाओं को शॉर्टकट या गलत तरीकों से बॉडी बनाने के चक्कर में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्हें जंक फूड से दूरी बनाकर पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर अंदर से मजबूत और स्वस्थ रहे।