इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से चल रहा इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन बुधवार को आपसी सहमति के बाद समाप्त हो गया।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के 150 से अधिक छात्र-छात्राएं 13 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिए जाने के नए फैसले पर सहमत हो गए हैं। जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और संस्थान के प्रबंधन के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद छात्रों ने अपनी चली आ रही हड़ताल और अनशन को आधिकारिक तौर पर खत्म करने की घोषणा कर दी है।
25 हजार की मांग के मुकाबले 13 हजार पर बनी रजामंदी
IVRI के छात्र 12 महीने की अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप के दौरान 25 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड देने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। इससे पहले इन इंटर्न डॉक्टरों को 6 महीने की अवधि के लिए केवल 3 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता था। छात्रों का तर्क था कि इंटर्नशिप के दौरान अस्पताल और प्रयोगशालाओं में काम का भारी दबाव रहता है, जिसके अनुपात में 3 हजार रुपये की राशि बेहद कम है। अपनी इस मांग के समर्थन में छात्रों ने अन्य राज्यों के विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में दिए जाने वाले भत्तों का भी हवाला दिया था।
अनशन के दौरान बिगड़ी थी छात्रा की तबीयत
स्टाइपेंड बढ़ाने के इस आंदोलन ने तब गंभीर रूप धारण कर लिया जब प्रदर्शन के तहत 9 छात्राएं क्रमिक भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठ गईं। आंदोलन के नौवें दिन मंगलवार को अनशन कर रही एक छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी। इस घटना के तुरंत बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया। इस देशव्यापी और बड़े आंदोलन में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि लद्दाख, राजस्थान और हरियाणा समेत कई अन्य दूरदराज राज्यों के छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे।
प्रशासनिक दखल और मैराथन बैठक के बाद निकला समाधान
छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद उपजे तनाव और छात्रों के कड़े रुख को देखते हुए बुधवार को प्रशासन सक्रिय हुआ। मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों और IVRI के वरिष्ठ प्रबंधकों ने प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधियों के साथ एक लंबी बैठक की। इस मैराथन बातचीत और अधिकारियों की ओर से दिए गए सकारात्मक आश्वासनों के बाद अंततः स्टाइपेंड को बढ़ाकर 13 हजार रुपये प्रतिमाह करने पर सहमति बन गई। मांग पूरी होने की घोषणा के बाद छात्रों ने राहत की सांस ली और खुशी जताते हुए अपनी हड़ताल तथा भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया।