मध्य प्रदेश की पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष पद यानी डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) की कुर्सी को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना का कार्यकाल आगामी नवंबर महीने में पूरा होने जा रहा है, जिसके चलते राज्य सरकार ने नए मुखिया के चयन की प्रक्रिया को समय रहते पटरी पर ले लिया है। प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अगला पुलिस प्रमुख कौन होगा, क्योंकि मध्य प्रदेश जैसे बड़े और संवेदनशील राज्य में कानून-व्यवस्था की कमान संभालना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है।
दिल्ली भेजे गए 12 सीनियर आईपीएस अधिकारियों के नाम
वल्लभ भवन और पुलिस मुख्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने नए डीजीपी के चयन के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पास योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों का एक पैनल भेज दिया है। इस पैनल में कुल 12 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। नियमानुसार, यूपीएससी इस सूची में से तीन सबसे उपयुक्त नामों को शॉर्टलिस्ट करके वापस राज्य सरकार को भेजेगी, जिसके बाद अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
भेजे गए इस पैनल में अलग-अलग बैच के दिग्गजों को जगह मिली है, जिससे यह साफ होता है कि रेस काफी दिलचस्प होने वाली है। इस लिस्ट में 1991 बैच के 3 अधिकारी, 1992 बैच के 3 अधिकारी और 1994 बैच के 4 अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य वरिष्ठता क्रम के अधिकारी भी इस दौड़ का हिस्सा हैं।
वरिष्ठता सूची में कौन है सबसे आगे?
वरिष्ठता के आधार पर तैयार किए गए इस पैनल में शीर्ष तीन नामों को लेकर पुलिस महकमे में कयासों का दौर शुरू हो गया है। आइए जानते हैं कि इस रेस में सबसे आगे कौन से नाम चल रहे हैं:
- वरुण कपूर (1991 बैच): वरिष्ठता क्रम में पहला नाम डीजी जेल वरुण कपूर का आता है। अपनी शानदार कार्यशैली और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले वरुण कपूर इस रेस में सबसे मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं।
- उपेंद्र जैन (1991 बैच): वरिष्ठता में दूसरा नाम डीजी ईओडब्ल्यू (EOW) उपेंद्र जैन का है। प्रशासनिक मामलों और जांच एजेंसियों में लंबा अनुभव रखने के कारण उनका नाम भी काफी चर्चा में है।
- प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (1991 बैच): तीसरा नाम डीजी होमगार्ड प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव का है। यदि उनके नाम पर मुहर लगती है, तो यह मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय होगा।
चयन की पूरी प्रक्रिया क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी राज्य में डीजीपी की नियुक्ति की एक तय प्रक्रिया होती है। इसके तहत:
- राज्य सरकार एक निश्चित सेवा वर्ष पूरा कर चुके वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार करती है।
- यह पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा जाता है।
- यूपीएससी, राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के नुमाइंदों की एक समिति इन नामों पर विचार करती है और योग्यता, अनुभव तथा सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तीन नाम छांटती है।
- इन तीन नामों में से राज्य सरकार किसी एक अधिकारी को प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त करती है।
आगामी महीनों में तय होगी तस्वीर
वर्तमान डीजीपी कैलाश मकवाना के नवंबर में सेवानिवृत्त होने से पहले ही यह औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी ताकि प्रशासनिक शून्यता की कोई स्थिति न बने। आने वाले कुछ हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि यूपीएससी की तरफ से किन तीन नामों पर मुहर लगती है और अंततः किसके हाथ में मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था की बागडोर आती है। पुलिस विभाग से लेकर राजनीतिक हलकों तक हर किसी की निगाहें अब दिल्ली और भोपाल के बीच होने वाली इन बैठकों और निर्णयों पर टिकी हुई हैं।