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जबलपुर नेशनल लोक अदालत: एक ही दिन में 10 हजार से ज्यादा मामलों का निपटारा, 65 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित

जबलपुर नेशनल लोक अदालत: एक ही दिन में 10 हजार से ज्यादा मामलों का निपटारा, 65 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित

न्याय की राह अक्सर लंबी और थका देने वाली मानी जाती है, जहाँ तारीख पर तारीख मिलने का सिलसिला आम आदमी की ऊर्जा और समय दोनों को सोख लेता है। लेकिन, जब आपसी सहमति और संवाद के जरिए बरसों पुराने विवाद चंद मिनटों में सुलझ जाएं, तो इसे न्याय व्यवस्था की एक बड़ी जीत ही कहा जाएगा। मध्य प्रदेश के संस्कारधानी शहर जबलपुर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ आयोजित नेशनल लोक अदालत ने मुकदमों के बोझ तले दबे हज़ारों लोगों के चेहरों पर राहत की मुस्कान बिखेर दी।

अदालतों में उमड़ी भीड़, एक ही दिन में हुआ बड़ा चमत्कार

शनिवार को जबलपुर जिले में जिला न्यायालय से लेकर तहसील स्तर तक एक अभूतपूर्व माहौल था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कुशल मार्गदर्शन और समन्वय से आयोजित इस नेशनल लोक अदालत में न्याय पाने और देने वालों का तांता लगा रहा। इस एक दिवसीय महाअभियान के दौरान कुल 10,264 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। सबसे खास बात यह रही कि इस दौरान कुल 65 करोड़ 67 लाख 64 हजार 222 रुपये की भारी-भरकम राशि के अवार्ड पारित किए गए, जिसने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

आम जनता को अदालती चक्करों से मुक्ति दिलाने के लिए इस बार व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। जिला न्यायालय जबलपुर के साथ-साथ सिहोरा और पाटन के तहसील न्यायालयों, कुटुम्ब न्यायालय (फैमिली कोर्ट) तथा श्रम न्यायालय में भी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष काउंटर और बेंच बनाई गई थीं।

77 खंडपीठों ने संभाली कमान, लंबित और प्रीलिटिगेशन मामलों पर चला समझौता

इस विशाल आयोजन को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुल 77 खंडपीठों (Benches) का गठन किया गया था। इन खंडपीठों के समक्ष विभिन्न प्रकार के मामलों को रखा गया, जहाँ दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर आपसी रजामंदी से मामलों को हमेशा के लिए खत्म करने की पहल की गई।

प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस लोक अदालत में दो श्रेणियों के मामलों पर मुख्य रूप से फोकस किया गया:

  • लंबित मामले: अदालतों में पहले से विचाराधीन 3,480 मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया।
  • प्रीलिटिगेशन मामले: अदालत की चौखट तक पहुँचने से पहले ही सुलझाए जाने वाले 6,784 मामलों को भी आपसी समझौते के आधार पर बंद किया गया।

किन-किन मामलों में मिली बड़ी राहत?

नेशनल लोक अदालत का दायरा काफी व्यापक था, जिसमें समाज के हर वर्ग से जुड़े विवादों को शामिल किया गया था। आपराधिक शमनीय मामलों से लेकर मोटर दुर्घटना के दर्दनाक हादसों तक, हर मोर्चे पर समझौते की बयार बही।

विभिन्न श्रेणियों में निराकृत मामलों का विवरण:

  • आपराधिक शमनीय प्रकरण: 494 मामलों का निपटारा किया गया।
  • एन.आई. एक्ट (चेक बाउंस): धारा 138 के तहत आने वाले 316 मामलों का समाधान हुआ।
  • मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा: 1,173 मामलों में पीड़ितों को मुआवजा मिला।
  • सिविल मामले: संपत्ति और अन्य दीवानी विवादों के 44 मामले सुलझे।
  • विवाह एवं पारिवारिक विवाद: टूटते रिश्तों को बचाने और आपसी रजामंदी से अलगाव के 98 पारिवारिक मामलों का निराकरण हुआ।
  • विद्युत अधिनियम: बिजली चोरी और बिल से जुड़े 160 मामलों का निपटारा हुआ।
  • अन्य प्रकृति के मामले: 61 अन्य लंबित प्रकरणों को भी सूची से बाहर किया गया।

वित्तीय लेन-देन और क्षतिपूर्ति दावों में करोड़ों के फैसले

लोक अदालत का सबसे प्रभावी पहलू वित्तीय मामलों का समाधान रहा, जहाँ दोनों पक्षों ने बड़े दिल का परिचय देते हुए लेन-देन के मामलों को हमेशा के लिए रफा-दफा कर दिया।

सबसे बड़ा वित्तीय अवार्ड मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा के मामलों में देखने को मिला। इन मामलों में कुल 43 करोड़ 69 लाख 39 हजार 519 रुपये की भारी-भरकम अवार्ड राशि पारित की गई, जिससे दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिला।

इसके अलावा, चेक बाउंस से जुड़े मामलों (एन.आई. एक्ट धारा 138) में कुल 6 करोड़ 54 लाख 38 हजार 736 रुपये की समझौता राशि तय की गई। बिजली विभाग से जुड़े 160 मामलों में 28 लाख 39 हजार 19 रुपये की राजस्व वसूली सुनिश्चित की गई।

आम नागरिकों और ट्रैफिक चालान से जुड़ी राहत

सिर्फ बड़े मामले ही नहीं, बल्कि आम आदमी से जुड़े छोटे-छोटे मामलों को भी इस लोक अदालत में प्राथमिकता दी गई। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले चालान से परेशान वाहन चालकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं था। ट्रैफिक चालान के 767 प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जिससे 1 लाख 98 हजार 800 रुपये की राशि वसूल की गई।

बैंक ऋण और रिकवरी से जुड़े मामलों में भी लोगों ने आगे बढ़कर सहयोग किया। बैंक रिकवरी के 296 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण करने के पश्चात लोक अदालत में समझौता राशि प्राप्त हुई, जिससे बैंकों और ग्राहकों दोनों को राहत मिली।

लोक अदालत: समय और धन की बचत का सर्वोत्तम माध्यम

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नेशनल लोक अदालतें भारतीय न्याय व्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही हैं। यहाँ न कोई हारता है और न कोई जीतता है, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से 'जीत-जीत' (Win-Win) की स्थिति बनती है। जबलपुर में आयोजित इस सफल लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर संवाद का रास्ता अपनाया जाए, तो बरसों पुराने विवाद कुछ ही घंटों में इतिहास बन सकते हैं। इस आयोजन ने जहाँ एक ओर अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम किया है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को महंगे वकीलों और लंबी अदालती तारीखों के मानसिक तनाव से भी मुक्ति दिलाई है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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