मध्य प्रदेश के संस्कारधानी शहर जबलपुर के घनी आबादी वाले इलाके में शनिवार, 12 सितंबर 2026 को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मिलौनीगंज मुख्य मार्ग पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बिजली विभाग के रखरखाव कार्य के दौरान दो जर्जर पोल अचानक भरभराकर सड़क पर आ गिरे। गनीमत यह रही कि यह घटना एक स्कूल के ठीक सामने हुई और उस वक्त कोई बड़ा जनूंसान नहीं हुआ, वरना एक बड़ी त्रासदी घटित हो सकती थी। इस घटना ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है।
कैसे हुआ यह भयानक हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, मिलौनीगंज से सुभाष मार्केट की ओर जाने वाला यह मुख्य मार्ग हमेशा काफी व्यस्त रहता है। शनिवार को विद्युत विभाग का लाइन स्टाफ इस इलाके में पुरानी और जर्जर हो चुकी लाइनों को हटाकर नई आर्मर्ड केबल डालने के महत्वपूर्ण काम में जुटा हुआ था। इसी प्रक्रिया के तहत विभाग का एक कर्मचारी एक पुराने बिजली के पोल पर चढ़ा।
लेकिन कर्मचारी के पोल पर पहुंचते ही एक बड़ी लापरवाही सामने आ गई। जमीन के अंदर से पूरी तरह गल चुके और कमजोर हो चुके उस पोल का निचला हिस्सा कर्मचारी के वजन का भार नहीं झेल सका। नतीजतन, पोल अचानक नीचे से टूट गया और सड़क पर आ गिरा। उस पोल के साथ ही उस पर चढ़ा हुआ बिजली विभाग का कर्मचारी भी नीचे जमीन पर आ गिरा।
तारों के खिंचाव से गिरा दूसरा पोल और गूंजे धमाके
एक पोल के गिरने से उससे जुड़े बिजली के तारों में भयंकर खिंचाव पैदा हो गया। इस भारी तनाव के कारण थोड़ी ही दूरी पर खड़ा दूसरा जर्जर पोल भी अपना संतुलन खो बैठा और वह भी सड़क पर आ गिरा। इनमें से एक पोल सड़क किनारे बने एक मकान की मजबूत दीवार से जा टिका, जबकि दूसरा पोल सीधे मुख्य सड़क के बीचों-बीच आ गिरा।
पोल गिरने के साथ ही बिजली के तार आपस में भिड़ गए, जिससे जोरदार शॉर्ट सर्किट हुआ। तारों से निकलती तेज चिंगारियों और एक के बाद एक हुए जोरदार धमाकों ने आसपास के इलाके में दहशत फैला दी। व्यस्त सड़क पर अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां से गुजर रहे लोग और दुकानदार अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
स्थानीय लोगों की मुस्तैदी से बची जान
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद स्थानीय नागरिकों ने अद्भुत साहस और तत्परता का परिचय दिया। लोगों ने बिना एक पल गंवाए मलबे और टूटे हुए तारों के बीच फंसे विद्युत विभाग के उस कर्मचारी को सुरक्षित बाहर निकाला। गनीमत यह रही कि घटना के वक्त स्कूल के ठीक सामने कोई भी स्कूली बच्चा या आम राहगीर मौजूद नहीं था, अन्यथा परिणाम बेहद घातक हो सकते थे। सड़क पर पोल और तार बिखर जाने के कारण यातायात भी कुछ समय के लिए पूरी तरह से बाधित हो गया, जिससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
विद्युत विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में विद्युत विभाग के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। नागरिकों का कहना है कि जब पोल का निचला हिस्सा पूरी तरह से सड़ चुका था और वह कमजोर था, तो बिना किसी तकनीकी जांच के कर्मचारी को उस पर चढ़ने की अनुमति क्यों दी गई?
इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक व्यस्त स्कूल के सामने और घनी आबादी वाले इलाके में बिना किसी उचित बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरे के इस तरह का खतरनाक काम क्यों कराया जा रहा था? यदि विभाग ने सुरक्षा मानकों का थोड़ा भी ध्यान रखा होता, तो इस तरह की नौबत ही नहीं आती।
क्षेत्रवासियों की मांग: हो जर्जर पोलों का तकनीकी सर्वे
मिलौनीगंज और आसपास के पुराने शहर के इलाकों में इस घटना के बाद से भय और गुस्से का माहौल है। रहवासियों ने जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि शहर के सभी पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में लगे जर्जर बिजली पोलों का तत्काल प्रभाव से तकनीकी सर्वे कराया जाए।
- कमजोर पोलों की पहचान: सर्वे के दौरान जितने भी जर्जर और कमजोर पोल मिले हैं, उन्हें तुरंत चिह्नित कर बदला जाए।
- सुरक्षा मानकों का पालन: रखरखाव या केबल बदलने के कार्य के दौरान अनिवार्य रूप से सुरक्षा घेरे (बैरिकेडिंग) का इस्तेमाल हो।
- लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई: इस प्रकार की घोर लापरवाही बरतने वाले मैदानी कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
फिलहाल, इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की उस सुस्ती को उजागर कर दिया है जो किसी बड़ी अनहोनी के होने का इंतजार करती है। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते शहर के जर्जर विद्युत नेटवर्क को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े आंदोलन किए जाएंगे।