भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश के खरगोन-बड़वानी लोकसभा क्षेत्र से सांसद गजेंद्र सिंह पटेल अपने एक विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। शुक्रवार देर रात एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदू समाज को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सांसद ने मंच से हिंदू युवाओं से अपील की कि वे संख्या बढ़ाने के लिए पांच बच्चे पैदा करें और साथ ही अपनी सुरक्षा के लिए हथियार भी रखें। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
जनसभा के दौरान दिया विवादित बयान
मिली जानकारी के अनुसार, सांसद गजेंद्र सिंह पटेल शुक्रवार देर रात एक स्थानीय कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। इसी दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और सनातन धर्म के भविष्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे तौर पर कहा कि वे सनातनी हैं और उन्हें अपनी बात रखने में किसी भी प्रकार का डर नहीं है।
अपने संबोधन में सांसद ने कहा, “हमें शादी करनी चाहिए और पांच बच्चे पैदा करने चाहिए।” उन्होंने आगे तर्क देते हुए कहा कि वर्तमान समय में सनातनी समुदायों के भीतर जन्म दर घटकर 1.9 प्रतिशत के आसपास रह गई है, जो कि चिंता का विषय है। उनके अनुसार, जनसांख्यिकी संतुलन बिगड़ रहा है, जिसका सीधा असर भविष्य की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।
'4 में से 1 हिंदू और 3 अन्य': सांसद का दावा
अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए भाजपा सांसद ने डेमोग्राफिक बदलावों की ओर इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में यदि कुल बच्चों का आकलन किया जाए, तो उनमें से औसतन एक बच्चा ही हिंदू परिवार से होता है, जबकि बाकी के तीन बच्चे अन्य समुदायों से होते हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी विशेष समुदाय का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों का साफ तौर पर मानना है कि उनका इशारा मुस्लिम समुदाय की तरफ था।
सांसद के इस बयान ने ‘हम दो, हमारे दो’ के राष्ट्रीय परिवार नियोजन नारे के विपरीत एक नया नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की है, जिसे अब 'हम दो, हमारे पांच' के रूप में देखा जा रहा है।
हथियार रखने की भी दी सलाह
जनसंख्या बढ़ाने की अपील के साथ-साथ गजेंद्र सिंह पटेल ने अपने भाषण में आत्मरक्षा के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने मंच से मौजूद लोगों को सलाह दी कि वे केवल संख्या बल पर ही निर्भर न रहें, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए हथियारों का भी प्रबंध करें। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षकों को अब अपनी रक्षा के लिए खुद सतर्क और सक्षम होना पड़ेगा।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में जनसंख्या संतुलन और आंतरिक सुरक्षा को लेकर अक्सर बयानबाजी होती रहती है। हालांकि, किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि द्वारा खुले मंच से हथियार रखने की सलाह देना कई गंभीर कानूनी और सामाजिक सवाल खड़े करता है।
सियासी गलियारों में भूचाल
जैसे ही गजेंद्र सिंह पटेल का यह बयान मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए बाहर आया, राजनीतिक दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। विपक्षी दलों ने इस बयान को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला और समाज को बांटने वाला करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के सांसद इस तरह के भड़काऊ बयान देकर समाज में ध्रुवीकरण पैदा करना चाहते हैं ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
दूसरी ओर, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह असहजता पैदा हो सकती है, क्योंकि यह देश की मुख्य धारा की नीतियों और संवैधानिक मर्यादाओं के कई बार खिलाफ नजर आते हैं। हालांकि, अभी तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस बयान की गूंज बहुत तेज हो गई है।
पहले भी रहे हैं बयानों के चलते चर्चा में
गजेंद्र सिंह पटेल अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में उनकी गिनती आक्रामक हिंदूवादी नेताओं में होती है। अपने निर्वाचन क्षेत्र खरगोन और बड़वानी में वे अक्सर आदिवासी और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं, लेकिन इस बार उनका यह बयान सीधे तौर पर धार्मिक जनसांख्यिकी और सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इंटरनेट पर इस बयान के आने के बाद से ही यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। एक वर्ग जहां सांसद के इस बयान का समर्थन कर रहा है और इसे समय की मांग बता रहा है, वहीं दूसरा बड़ा वर्ग इसकी कड़ी आलोचना कर रहा है। आलोचकों का तर्क है कि देश इस समय बेरोजगारी, महंगाई और विकास जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है, ऐसे में जनप्रतिनिधियों को इन मूल समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि समाज में वैमनस्य फैलाने वाले बयान देने चाहिए।
आने वाले दिनों में इस बयान पर राजनीतिक बवाल और बढ़ने के आसार हैं। विपक्ष इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाने की तैयारी कर सकता है। देखना यह होगा कि इस पूरे विवाद पर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व क्या रुख अपनाता है और क्या सांसद गजेंद्र सिंह पटेल अपने इस बयान पर कोई सफाई पेश करते हैं या नहीं।