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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चंबल प्रोजेक्ट का किया औचक निरीक्षण, खुद पाइपलाइन के अंदर घुसकर परखी क्वालिटी

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चंबल प्रोजेक्ट का किया औचक निरीक्षण, खुद पाइपलाइन के अंदर घुसकर परखी क्वालिटी

पानी की एक-एक बूंद को लेकर चल रही जद्दोजहद के बीच विकास कार्यों की जमीनी हकीकत परखने का एक ऐसा नजारा सामने आया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने अनोखे और सख्त कार्यप्रणाली के लिए जाने जाते हैं, और इस बार उनका एक ऐसा ही रूप मध्य प्रदेश में देखने को मिला। चंबल नदी के पानी को घर-घर तक पहुंचाने वाले महत्वाकांक्षी 'चंबल ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट' की गुणवत्ता को जांचने के लिए वे खुद मैदान में उतर पड़े।

रविवार, 20 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अचानक कोतवाल डैम पहुंचकर इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जो किया, उसकी उम्मीद शायद वहां मौजूद किसी भी अधिकारी या इंजीनियर को नहीं थी। मंत्री महोदय ने सिर्फ दूर से निर्माण कार्य देखकर औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि वे खुद कई फीट चौड़ी विशालकाय पानी की पाइपलाइन के अंदर उतर गए और उसके भीतर तक चलकर उसकी इंजीनियरिंग और वेल्डिंग की बारीकी से जांच की।

चंबल ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट: एक महत्वाकांक्षी योजना

मध्य प्रदेश के कई सूखाग्रस्त और पानी की किल्लत से जूझ रहे इलाकों के लिए 'चंबल ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट' एक वरदान साबित होने जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य चंबल नदी के अछूते और शुद्ध पानी को पाइपलाइन के जरिए दूर-दराज के गांवों और कस्बों तक पहुंचाना है ताकि लोगों को पेयजल की समस्या से स्थायी रूप से निजात मिल सके। सरकार की इस मेगा योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ऐसे में इसकी गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती है।

यही वजह है कि केंद्रीय मंत्री ने खुद कमान संभालते हुए प्रोजेक्ट के हर एक पहलू का बारीकी से निरीक्षण करने का फैसला किया। डैम साइट पर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले प्रोजेक्ट के ब्लूप्रिंट और मैप का अध्ययन किया। इसके बाद वे सीधे उस जगह पर पहुंचे जहां भारी-भरकम लोहे और कंक्रीट के पाइप बिछाए जा रहे हैं।

जब विशाल पाइपलाइन के अंदर चले गए केंद्रीय मंत्री

निरीक्षण के दौरान का वह पल बेहद रोमांचक और चौंकाने वाला था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी सुरक्षा और कपड़ों की परवाह किए बिना उस विशालकाय पाइपलाइन के अंदर प्रवेश कर लिया। पाइप का व्यास (डायमीटर) इतना बड़ा था कि एक सामान्य कद-काठी का व्यक्ति उसके भीतर आसानी से चल सकता है।

पाइप के अंदर जाकर केंद्रीय मंत्री ने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष रूप से खुद परखा:

  • इंटरनल कोटिंग (Internal Coating): पाइप के अंदरूनी हिस्से में की गई विशेष एंटी-करोशन कोटिंग की मोटाई और उसकी फिनिशिंग कैसी है।
  • वेल्डिंग की मजबूती (Welding Quality): दो पाइपों को आपस में जोड़ने वाली वेल्डिंग लाइन में किसी तरह का गैप या कमजोरी तो नहीं है।
  • सामग्री की मोटाई (Material Thickness): जिस लोहे और स्टील का इस्तेमाल हुआ है, उसकी मोटाई तय मानकों के अनुरूप है या नहीं।
  • क्षमता और चौड़ाई: पानी के प्रेशर को झेलने के लिए पाइप का स्ट्रक्चर कितना मजबूत तैयार किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, पाइप के भीतर करीब 15-20 मिनट बिताने के बाद बाहर निकले केंद्रीय मंत्री ने संतोष जताया, हालांकि उन्होंने वहां मौजूद अभियंताओं (Engineers) और निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों को कुछ सख्त निर्देश भी दिए।

अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश: गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

पाइपलाइन के अंदर से बाहर आने के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्थानीय प्रशासन और प्रोजेक्ट से जुड़ी निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाले इस बुनियादी ढांचे में यदि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या घटिया सामग्री का इस्तेमाल पाया गया, तो बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • प्रोजेक्ट को तय समय सीमा (Deadlines) के भीतर ही पूरा किया जाए ताकि जनता को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
  • पाइपलाइन बिछाने के बाद उसकी टेस्टिंग (Pressure Testing) के दौरान पानी के रिसाव की हर संभव जांच कड़ी सुरक्षा के साथ की जाए।
  • कोतवाल डैम के जलस्तर और वाटर इंटक वेल (Water Intake Well) के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए।

आम जनता और स्थानीय नागरिकों में उत्साह

केंद्रीय मंत्री के इस तरह खुद पाइपलाइन के अंदर जाकर निरीक्षण करने की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैली, लोगों ने इसकी जमकर सराहना की। आम नागरिकों का मानना है कि जब देश के मंत्री खुद इस तरह जमीन पर उतरकर बारीकी से काम की जांच करते हैं, तो लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों में डर पैदा होता है।

क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि इस कड़ाई और निगरानी के बाद चंबल पेयजल प्रोजेक्ट अपने तय समय पर और उच्चतम गुणवत्ता के साथ पूरा होगा, जिससे आने वाले दिनों में उनके घरों तक मीठा और साफ पानी आसानी से पहुंच सकेगा।

निष्कर्ष

राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में अक्सर काम पूरा होने के बाद उद्घाटन के समय ही बड़े नेताओं के आने की परंपरा रही है, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान इस तरह से गहराई में जाकर खुद गुणवत्ता की परीक्षा लेना एक सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है। चंबल ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट के इस औचक निरीक्षण ने यह साबित कर दिया है कि सरकार अब विकास कार्यों की मॉनिटरिंग को लेकर कितनी गंभीर है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस निरीक्षण के बाद प्रोजेक्ट की रफ्तार और गुणवत्ता में कितना सुधार देखने को मिलता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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