मध्य प्रदेश की राजनीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारिता आंदोलन एक नए दौर से गुजर रहा है। राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक भेल दशहरा मैदान में आयोजित भव्य राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन के दौरान सियासत और विकास का एक अनूठा संगम देखने को मिला। इस मंच से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के विजन की खुलकर सराहना की और मध्य प्रदेश में आ रही आर्थिक तसवीर के बदलाव पर विस्तार से चर्चा की।
सहकारिता आंदोलन को मिली एक नई दिशा
अपने संबोधन के दौरान हेमंत खंडेलवाल ने जोर देकर कहा कि देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सहकारिता के क्षेत्र में जो मजबूत आधारशिला रखी है, उसने पूरे देश के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी एक नई दिशा तय की है। अमित शाह का यह मार्गदर्शन राज्य के गौपालकों और किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। ऐसे राष्ट्रीय नेतृत्व का प्रदेश की धरती पर उपस्थित होना और मार्गदर्शन करना मध्य प्रदेश के हर एक नागरिक के लिए गर्व का विषय है। उनके नेतृत्व ने राज्य में दुग्ध क्रांति के नए द्वार खोले हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर बन सकता है। मध्य प्रदेश सरकार इस दिशा में पूरी तत्परता के साथ कदम बढ़ा रही है और धरातल पर इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे हैं।
1700 से अधिक नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन
मध्य प्रदेश में डेयरी सेक्टर को संगठित और मजबूत करने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। प्रदेशाध्यक्ष ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में 1700 से अधिक नई दुग्ध सहकारी समितियों का सफल गठन किया जा चुका है। इन समितियों के जरिए ग्रामीण इलाकों के छोटे किसानों और पशुपालकों को सीधे जोड़ा जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है और सीधा लाभ मेहनतकश किसानों की जेब में जा रहा है।
सांची और एनडीडीबी (NDDB) के एमओयू से आया बड़ा बदलाव
राज्य के दुग्ध उद्योग में मील का पत्थर साबित होने वाले समझौते पर बात करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि सांची और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के बीच हुए ऐतिहासिक एमओयू (समझौता ज्ञापन) के बाद से व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आया है। इस सहकारिता के परिणामस्वरूप अब प्रदेश में दूध का कुल कलेक्शन बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन के आंकड़े को पार कर चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य का पशुपालक वर्ग इस व्यवस्था से जुड़ने में गहरी रुचि ले रहा है और उन्हें इसका पूरा लाभ भी मिल रहा है.
- प्रदेश में 1700 से अधिक नई दुग्ध सहकारी समितियों का निर्माण।
- सांची और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच एमओयू से बढ़ा दायरा।
- दूध का दैनिक कलेक्शन बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचा।
गौपालकों को मिल रहा है प्रति लीटर साढ़े आठ रुपये अधिक दाम
किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। हेमंत खंडेलवाल ने जानकारी दी कि राज्य के गौपालकों को अब उनके दूध का पहले की तुलना में ₹8.50 प्रति लीटर अधिक दाम मिल रहा है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी सीधे तौर पर किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का काम कर रही है।
सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल कृषि पर निर्भरता न रहे, बल्कि दुग्ध उत्पादन के माध्यम से कृषकों की आय में स्थायी वृद्धि दर्ज की जाए। इसके साथ ही 'दूध से किसानों की आय बढ़े, गोबर से खाद बने और सरकार के सहयोग से समृद्धि आए' के मूल मंत्र पर काम किया जा रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोबर के उचित उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे किसानों को दोहरी आय प्राप्त हो सके।
50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध कलेक्शन का है बड़ा लक्ष्य
भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए प्रदेशाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार यहां रुकने वाली नहीं है। आने वाले वर्षों में दूध कलेक्शन की इस क्षमता को पांच गुना यानी 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का बड़ा और महत्वाकांक्षी संकल्प लिया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रशासनिक और सहकारिता स्तर पर रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
मध्य प्रदेश को आने वाले समय में दूध से आय आधारित एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित किया जाएगा। जब ग्रामीण स्तर पर दूध और कृषि आधारित उद्योग पनपेंगे, तो इससे प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए और अनगिनत अवसर भी पैदा होंगे। शहरी पलायन को रोकने और गांव को स्वावलंबी बनाने की दिशा में यह सबसे ठोस कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और अन्य बैठकें
इस सम्मेलन से इतर राजनीतिक हलकों में भी बैठकों का दौर जारी रहा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की आपसी ट्यूनिंग और मुलाकातों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद खंडेलवाल को अपनी गाड़ी में बैठाकर बीजेपी कार्यालय लेकर पहुंचे, जो पार्टी के भीतर मजबूत समन्वय और बेहतरीन तालमेल को दर्शाता है। इसके अलावा, दोनों नेताओं के बीच आगामी पार्टी कार्यक्रमों के रोडमैप को तैयार करने को लेकर एक लंबी और अहम बैठक भी संपन्न हुई, जिसमें संगठन की आगामी रणनीतियों पर विस्तार से मंथन किया गया।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों सहकारिता और विकास के मुद्दे सबसे ऊपर हैं। गौपालक सम्मेलन के जरिए सरकार ने यह संदेश साफ कर दिया है कि उनका मुख्य फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को धार देना और किसानों के जीवन में आर्थिक खुशहाली लाना है।