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मकान की नींव खुदाई में निकला 100 साल पुराना खजाना, आपस में बांटे चांदी के सिक्के

मकान की नींव खुदाई में निकला 100 साल पुराना खजाना, आपस में बांटे चांदी के सिक्के

जमीन के भीतर दबे राज़ अक्सर इंसानी बस्तियों की बसाहट और इतिहास की कई अनकही परतों को उजागर कर देते हैं। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से एक ऐसी ही दिलचस्प और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यहाँ एक मकान की नींव की खुदाई के दौरान जमीन के अंदर से करीब एक सदी पुराना खजाना निकला है। इस खजाने में अंग्रेजों के जमाने के सैकड़ों चांदी के सिक्के शामिल थे। हालांकि, इस ऐतिहासिक खजाने को कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रशासन को सौंपने के बजाय मौके पर मौजूद लोगों ने आपस में ही बांट लिया, जिसके बाद अब पुलिस ने इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

बरखेड़ी गांव में चल रही थी नींव की खुदाई

घटना मंदसौर जिले के भानपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बरखेड़ी गांव की है। यहां 26 अगस्त को दोपहर के वक्त एक ग्रामीण के पुराने मकान को तोड़कर नए सिरे से निर्माण कराने के लिए नींव की खुदाई का काम चल रहा था। मजदूरी करने वाले लोग और मकान मालिक का परिवार इस काम में जुटा हुआ था। जब जमीन की गहराई बढ़ाई जा रही थी, तभी मजदूरों के फावड़े से टकराकर कुछ ऐसा बाहर आया जिसने वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें चौंधिया दीं।

जमीन के अंदर से एक के बाद एक पुराने चांदी के सिक्कों से भरा जखीरा बाहर निकलने लगा। शुरुआती कुछ पलों के लिए तो किसी को समझ ही नहीं आया कि अचानक से यह क्या चमत्कार हो गया है। लेकिन जब सिक्कों की चमक और उन पर उकेरी गई आकृतियों को देखा गया, तो साफ हो गया कि यह कोई साधारण धातु नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में दबी हुई बेशकीमती धरोहर है।

700 से अधिक थे चांदी के प्राचीन सिक्के

शुरुआती रिपोर्ट्स और पुलिस की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि खुदाई के दौरान निकलने वाले चांदी के सिक्कों की कुल संख्या 700 से भी ज्यादा थी। इन सिक्कों पर ब्रिटिश शासनकाल (अंग्रेजी हुकूमत) से जुड़े हुए स्पष्ट निशान और मुहरें अंकित थीं। जानकारों और प्रारंभिक आंकलन के मुताबिक ये सभी सिक्के करीब 1904 के आसपास के यानी 100 साल से भी अधिक पुराने हैं।

इतनी बड़ी मात्रा में प्राचीन खजाना हाथ लगते ही मौके पर मौजूद लोगों का लालच जाग गया। कानून के मुताबिक जमीन के अंदर से निकलने वाली इस तरह की पुरातात्विक संपदा या खजाने पर सरकार का अधिकार होता है और इसकी सूचना तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को दी जानी चाहिए। लेकिन इसके विपरीत, मकान मालिक, वहां काम कर रहे मजदूरों और अन्य लोगों ने इस बेशकीमती खजाने को चुपचाप आपस में बांट लिया और इस बात को पूरी तरह से छिपाने की कोशिश की गई।

आपसी विवाद के बाद खुला राज

भले ही खजाने को छिपाने और आपस में बांटने की पूरी साजिश रची गई थी, लेकिन इंसानी लालच और बटवारे को लेकर उपजे आपसी विवाद ने इस गुप्त राज पर से पर्दा उठा दिया। सिक्कों की गिनती और हिस्सेदारी को लेकर आपस में ही कहासुनी शुरू हो गई, जिसकी भनक धीरे-धीरे गांव के अन्य लोगों तक और फिर ग्राम चौकीदार तक पहुंच गई।

जब ग्राम चौकीदार के जरिए इस अवैध खजाने के बंटवारे की सूचना भानपुरा पुलिस थाने तक पहुंची, तो पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। पुलिस ने बिना देर किए तुरंत एक्शन लेते हुए मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी। पुलिस टीम ने फौरन उन तमाम लोगों की पहचान करनी शुरू कर दी जो उस दिन खुदाई के दौरान वहां मौजूद थे और खजाने के इस खेल में शामिल थे।

पुलिस की छापेमारी, 144 सिक्के और नकदी बरामद

भानपुरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में मकान मालिक प्रेमसिंह (जो देवीसिंह भाटी के पुत्र हैं), मजदूर जीतमल बैरागी और दो नाबालिगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की और इनके ठिकानों पर दबिश दी, तो कई चौंकाने वाली चीजें हाथ लगीं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अब तक कुल 144 चांदी के सिक्के और 2 लाख 38 हजार रुपए नकद बरामद कर लिए हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह बरामदगी तो सिर्फ एक शुरुआत है, क्योंकि कुल सिक्कों की संख्या 700 से अधिक बताई जा रही है। बाकी के सिक्के अभी भी गायब हैं, जिनकी तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

एक सिक्के की कीमत करीब 4 हजार रुपये

इस खजाने के आर्थिक महत्व को लेकर पुलिस और विशेषज्ञों का कहना है कि उस दौर के इन सिक्कों में इस्तेमाल की गई चांदी की शुद्धता और उनकी ऐतिहासिक अहमियत बेहद खास है। बाजार में इन प्राचीन सिक्कों की मौजूदा कीमत और उनकी धातु की शुद्धता को आंका जाए, तो एक अकेले सिक्के की कीमत लगभग 4 हजार रुपये तक आंकी जा रही है।

इस हिसाब से यदि कुल 700 से ज्यादा सिक्के जमीन से निकले थे, तो इस पूरे खजाने की कुल कीमत लाखों-करोड़ों में बैठती है। यही वजह है कि पुलिस अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि आखिर खुदाई के वक्त कुल कितने सिक्के मिले थे और बंटवारे के बाद वे किन-किन लोगों के पास पहुंचे। पुलिस उन खरीदारों या बिचौलियों का भी पता लगा रही है, जिन्हें शायद ये सिक्के बेचे गए हों।

कानूनी प्रावधान और आगे की कार्रवाई

भारतीय कानून के तहत, यदि किसी भी निजी या सरकारी जमीन की खुदाई के दौरान कोई पुराना खजाना, पुरातत्व महत्व की वस्तुएं या दबी हुई मुद्रा मिलती है, तो उस पर पूरी तरह से सरकार का हक होता है। इसे छिपाना या अपने पास रखना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है। इस मामले में पुलिस ने खजाने को छिपाने और गैरकानूनी तरीके से अपने पास रखने के आरोप में धाराओं के तहत सख्त कानूनी कदम उठाया है।

फिलहाल, मंदसौर पुलिस इस पूरे सिंडिकेट और नेटवर्क को खंगालने में लगी हुई है ताकि खजाने के एक-एक हिस्से को बरामद किया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि इतिहास के दबे हुए पन्ने जब अचानक बाहर आते हैं, तो कई बार वे कानून और व्यवस्था के लिए एक नया सिरदर्द भी बन जाते हैं।

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नसीम अहमद

नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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