पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहीद पुलिसकर्मियों को नमन किया। कानून-व्यवस्था और सुधारों पर विस्तृत जानकारी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले देश भर के शहीद पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। दोनों शीर्ष नेताओं ने नागरिकों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों से निपटने में पुलिस बल के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अमूल्य योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने संदेश में कहा कि पुलिस स्मृति दिवस उन सभी पुलिसकर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समाज में कानून का राज स्थापित करने में पुलिस बल की भूमिका अमूल्य है। प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को नमन करते हुए रेखांकित किया कि उनका यह साहस और त्याग देश की स्मृतियों में हमेशा जीवंत रहेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन और कानून-व्यवस्था में बदलाव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद पुलिसकर्मियों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा कि समाज में शांति और नागरिकों के जीवन की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले वीर पुलिसकर्मी सदैव वंदनीय हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में विशेष रूप से वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में प्रदेश में माफिया राज का बोलबाला था और अराजक तत्वों के हौसले बुलंद हुआ करते थे। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग की घटना का स्मरण करते हुए कहा कि उस समय कानून की रक्षा करते हुए पुलिस अधिकारियों को अपने प्राणों की बलि देनी पड़ी थी।
सीएम योगी ने दावा किया कि आज के नए उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। राज्य अब उपद्रव प्रदेश के बजाय उत्सव प्रदेश के रूप में पहचाना जाता है, जहां पुलिस को अपराधियों के खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।
पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण और प्रशासनिक सुधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रदेश की पुलिस व्यवस्था को अधिक सक्षम, आधुनिक और जवाबदेह बनाने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राज्य में पिछले वर्षों के दौरान 2.26 लाख से अधिक पुलिस कर्मियों की पारदर्शी भर्तियां की गई हैं। इसके साथ ही पुलिस बल की कार्यकुशलता और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण क्षमता में 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। कानून-व्यवस्था के विकेंद्रीकरण और त्वरित नियंत्रण के लिए प्रदेश के सात बड़े महानगरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है।
सुरक्षा ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए उठाए गए अन्य कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में साइबर थाना स्थापित किया गया है और हर थाने में महिला हेल्प डेस्क को सक्रिय किया गया है, ताकि महिलाओं की शिकायतों पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
अपराधियों पर शिकंजा और संपत्ति जप्ती की कार्रवाई
संगठित अपराध पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुल 88,973 अपराधियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की है। इसके अतिरिक्त, अपराधियों के अवैध नेटवर्क को तोड़ने के लिए उनके खिलाफ अभियान चलाकर 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। उन्होंने इस कार्रवाई को राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और अपराधमुक्त समाज के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता का अकाट्य प्रमाण बताया।
मुख्यमंत्री ने अंत में आह्वान किया कि पुलिस स्मृति दिवस के इस पवित्र अवसर पर सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे वीर पुलिसकर्मियों के बलिदान और उनके परिवारों के त्याग को हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने प्रदेश को पूरी तरह सुरक्षित, न्यायपूर्ण और भयमुक्त बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास और पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि हर साल 21 अक्टूबर को राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1959 में लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा किए गए अचानक और घात लगाकर किए गए हमले में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 10 वीर जवानों की शहादत की स्मृति को समर्पित है। इस दिन देश भर में उन सभी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपनी जान गंवाई है। उनका यह सेवा भाव और साहस भारतीय आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत नींव माना जाता है।