ठाणे के जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल ने ‘सेवा संकल्प’ अभियान के तहत मुरबाड तालुका के ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक आदिवासी महोत्सव में हिस्सा लेने के साथ-साथ खेतों में धान की फसल, सरकारी आश्रमशाला, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और तलाठी कार्यालय की कार्यप्रणाली की जमीनी हकीकत परखी।
महाराष्ट्र सरकार के इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक तंत्र को सीधे आम जनता और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ पात्र नागरिकों तक पहुंचे। इस दौरे में स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और राजस्व सेवाओं की स्थिति का बारीकी से आकलन किया गया।
वैशाखरे गांव में आदिवासी भोंडाई महोत्सव और बैलगाड़ी यात्रा
जिलाधिकारी के इस दौरे की शुरुआत वैशाखरे गांव से हुई, जहां पारंपरिक आदिवासी ‘भोंडाई महोत्सव’ का आयोजन किया गया था। इस सांस्कृतिक उत्सव में शामिल होकर डॉ. पांचाल ने आदिवासी समाज की समृद्ध लोकपरंपराओं को करीब से अनुभव किया। ग्रामीण जीवन शैली से जुड़ने के लिए उन्होंने बैलगाड़ी से यात्रा भी की और आदिवासी समुदाय के पारंपरिक नृत्य में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
इस अवसर पर उनके साथ स्थानीय विधायक किसन कथोरे, ठाणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक डॉ. विनयकुमार राठौड़, आदिवासी विकास परियोजना अधिकारी तेजस्विनी गलांडे और मुरबाड के तहसीलदार अभिजीत देशमुख सहित कई प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
धान की फसल और कृषि स्थिति का निरीक्षण
महोत्सव के बाद जिलाधिकारी ने किसानों के खेतों का रुख किया। ठाणे जिले के मुरबाड तालुका में इस दौरान सूखे जैसी संभावित परिस्थितियों और मौसम के असर को देखते हुए धान की फसल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ फसल के संभावित नुकसान और ‘डीसीएच पीक पाहणी’ (फसल सर्वेक्षण) प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पारंपरिक तरीकों को भी नजदीक से देखा, जिसमें मछली पकड़ने की स्थानीय कला और आदिवासी कारीगरों द्वारा बांस से हस्तशिल्प वस्तुएं बनाने के कौशल की सराहना की गई।
आश्रमशाला, स्वास्थ्य केंद्र और राजस्व कार्यालय की जांच
दौरे के अगले चरण में जिलाधिकारी ने मढ स्थित सरकारी आश्रमशाला का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कक्षाओं के भीतर जाकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उनकी पठन-पाठन की शैली, दैनिक सुविधाओं तथा हॉस्टल जीवन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। दुर्गम बस्तियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए उन्होंने अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
इसके बाद धसई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर वहां आने वाले मरीजों को दी जा रही चिकित्सीय सेवाओं, डॉक्टर व स्टाफ की उपस्थिति, आवश्यक दवाओं के स्टॉक और स्वच्छता व्यवस्था की जांच की गई। दौरे के अंतिम चरण में धसई तलाठी कार्यालय पहुंचकर भूमि अभिलेखों की स्थिति जांची गई। इसमें सातबारा उतारे, जमीन से जुड़े फेरफार (म्यूटेशन) प्रविष्टियों और अन्य राजस्व सेवाओं के निष्पादन की समीक्षा की गई।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों की अटकी हुई समस्याओं का त्वरित समाधान करना और विकास योजनाओं को गति देना है।