वर्धा में आयोजित प्रथम राज्यस्तरीय जागृत दृष्टि साहित्य सम्मेलन में दृष्टिहीन समुदाय के अधिकारों और कल्याण से जुड़े नौ प्रमुख प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई है। कार्यक्रम के समापन समारोह में पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने आश्वासन दिया कि इन प्रस्तावों पर शासन स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और दृष्टिहीनों के हितों के लिए हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ, महाराष्ट्र की ओर से स्थानीय स्वाध्याय मंदिर सभागृह में यह सम्मेलन आयोजित किया गया था। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार संजय इंगले तिगावकर ने की। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित रहे, जिनमें कृषि विचारक एड. दिनेश शर्मा, राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ के प्रदेशाध्यक्ष भोजराज पाटील, महासचिव डी.पी. जाधव, कोषाध्यक्ष डी.एन. मरडे, पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मण खापेकर, मानद अध्यक्ष कविता बिराजदार, राष्ट्रीय सचिव जगदीप कवाल, कार्यकारी सदस्य राहुल बिजवे, विदर्भ साहित्य संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप दाते, संस्कार भारती के जिला मंत्री मकरंद उमालकर और सम्मेलन समन्वयक नरेंद्र नरोटे प्रमुख रूप से शामिल थे।
विधान परिषद और राज्यसभा में प्रतिनिधि की मांग
सम्मेलनाध्यक्ष संजय इंगले तिगावकर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में दृष्टिहीन समुदाय की समस्याओं को नीतिगत स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत विधान परिषद (विप) और राज्यसभा (रास) में दृष्टिहीन समुदाय से कम से कम एक-एक प्रतिनिधि की नियुक्ति की जानी चाहिए। इससे समुदाय के लोगों को अपनी कठिनाइयों को सीधे सदन में रखने और उनके समाधान के लिए ठोस सुझाव देने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन में मंजूर किए गए प्रमुख प्रस्ताव
राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ की ओर से सम्मेलन में कुल नौ प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिन्हें सभागृह ने मंजूरी दी। इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ को हर साल जागृत दृष्टि साहित्य सम्मेलन आयोजित करने के लिए शासन की तरफ से नियमित निधि उपलब्ध कराई जाए।
- राज्य में आयोजित होने वाले सभी प्रमुख और प्रतिष्ठित साहित्य सम्मेलनों में दृष्टिबाधितों के लिए एक स्वतंत्र सत्र अनिवार्य रूप से रखा जाए।
- साहित्य अकादमी में कम से कम एक दृष्टिबाधित प्रतिनिधि को नियुक्त किया जाए।
शासन स्तर पर लंबित मांगों की जानकारी
सम्मेलन के दौरान महासचिव डी.पी. जाधव ने प्रस्तावना रखते हुए शालेय शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर को शासन के पास लंबित विभिन्न पुरानी मांगों से अवगत कराया। इन मांगों में आलंदी स्थित जागृति अंधकन्या विद्यालय की समस्याओं का स्थायी समाधान करना, विद्यालय में कक्षा नौवीं और दसवीं की कक्षाओं को शुरू करने की मंजूरी देना तथा बढ़ी हुई विद्यार्थी संख्या के अनुसार मान्यता प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा नासिक स्थित कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र को शासकीय अनुदानित दर्जा देने तथा छत्रपति संभाजीनगर में 18 वर्ष से अधिक आयु की लड़कियों के लिए संचालित प्रशिक्षण केंद्र के आंशिक अनुदान को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
सहयोग और सम्मान समारोह
कार्यक्रम के आरंभ में राज्यमंत्री डॉ. भोयर के करकमलों द्वारा सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले साहित्यकारों और आयोजनकर्ताओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन ज्योति भगत ने किया, जबकि उपाध्यक्ष राजेंद्र देवरे ने आभार व्यक्त किया। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में प्रा. शैला शिरीष देशपांडे, प्रसन्न कवडीकर, अश्विनी कोतवाल, डॉ. प्रदीप सुने, डॉ. विनोद अदलखिया, डॉ. जयंत मकरंदे, डॉ. सचिन पावडे, विजय चोपडे, सुवर्णा डोंगरे, डॉ. यश लालवानी सहित आंबेडकर समाजकार्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने विशेष सहयोग दिया।