इंस्टाग्राम पर कुर्ती का विज्ञापन देखकर ऑर्डर करना डीयू की एक छात्रा को भारी पड़ा। 6,500 रुपये की ठगी की इस छोटी सी शिकायत की जब पुलिस ने तहकीकात की, तो एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। इस गिरोह ने अब तक करीब 30 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है।
बीती जून में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामjas कॉलेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा फातिमा इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल कर रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर 'काव्या कुर्ती' नाम के एक महिला परिधान ब्रांड के विज्ञापन पर पड़ी। विज्ञापन पसंद आने पर उन्होंने वहां से कुर्ती खरीदने का फैसला किया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब छात्रा ने ऑर्डर देने की प्रक्रिया पूरी करनी चाही, तो उसे व्हाट्सएप पर रीडायरेक्ट कर दिया गया। वहां उसने 799 रुपये का एक ऑर्डर दिया और क्यूआर कोड के माध्यम से 400 रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया। उस समय फातिमा इस बात से पूरी तरह अनजान थीं कि वह जिस फर्म से खरीदारी कर रही हैं, वह पूरी तरह फर्जी है और जिस खाते में पैसे जा रहे हैं, वह एक बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट का हिस्सा है।
इस तरह बुना गया ठगी का जाल
ऑर्डर देने के बाद जांचकर्ताओं के मुताबिक फातिमा के पास फोन कॉल आने लगे और उनसे और पैसों की मांग की जाने लगी। साइबर ठगों द्वारा आम तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले इस हथकंडे में फंसते हुए, विक्रेता से संपर्क करने पर छात्रा को बताया गया कि कोड जनरेट करने के लिए 1,150 रुपये का रिफंडेबल चार्ज देना होगा।
इसके बाद इसी तरह के बहानों से उनसे 2,000 रुपये, 2,650 रुपये और 650 रुपये की अतिरिक्त रकम ट्रांसफर करवा ली गई। उत्तर जिले की पुलिस उपायुक्त (DCP) निहारिका भट्ट ने बताया कि सारा भुगतान मिलने के बावजूद कथित विक्रेता ने न तो पार्सल डिलीवर किया और न ही पैसे वापस किए।
साइबर सेल की जांच और पेमेंट ट्रेल
जब फातिमा को अहसास हुआ कि उनके साथ 6,500 रुपये की धोखाधड़ी हो गई है, तो उन्होंने साइबर पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। एसीपी विशेष धाटेवाल और अतिरिक्त डीसीपी राम दुलेश मीणा के नेतृत्व में इस मामले की जांच शुरू की गई। पुलिस टीम ने पेमेंट के रास्ते को ट्रैक करना शुरू किया, जिससे तार एक संदिग्ध शेल कॉरपोरेट कंपनी तक जा पहुंचे।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि ठगी गई राशि पाइन लैब्स मर्चेंट के जरिए ग्रेटर नोएडा स्थित किजेनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के केनरा बैंक खाते में पहुंची, जो आदित्य मिश्रा और उदित प्रताप सिंह भदौरिया से जुड़ा हुआ था।
ग्रेटर नोएडा में छापेमारी और गिरफ्तारियां
जांचकर्ताओं ने संदिग्ध व्हाट्सएप नंबर के जरिए विभिन्न ऐप्स पर किए गए ऑनलाइन ऑर्डर्स को ट्रैक किया और ग्रेटर नोएडा के एक पते तक पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने वहां एक परिसर में छापेमारी की और छह युवकों—आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, हिमांशु राणा, राहुल कुमार और गौरव पांडे को दबोच लिया।
डीसीपी भट्ट ने बताया कि ग्रेटर नोएडा के किराए के परिसरों पर की गई छापेमारी के दौरान किजेनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एग्जीक्यूटिव एज और नेक्सकोर नामक तीन संदिग्ध फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ। मौके से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
मास्टरमाइंड और सिंडिकेट का तौर-तरीका
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए सभी छह आरोपी अच्छी तरह से पढ़े-लिखे और तकनीक में माहिर हैं। बीबीए की डिग्री ले चुका गौरव पांडे इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह सिंडिकेट के अन्य सदस्यों को 25,000 रुपये प्रति माह देता था और उन्हें कंपनियां स्थापित करने तथा बैंक खाते खोलने का तरीका सिखाता था।
आदित्य मिश्रा ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि उसने, उदित प्रताप सिंह भदौरिया, आयुष वर्मा और अभिषेक पाल के साथ मिलकर फर्जी फर्में बनाई थीं और चालू बैंक खाते खोले थे। इसके बाद वे इन खातों का पूरा विवरण 25,000 रुपये मासिक भुगतान के एवज में हिमांशु राणा और राहुल कुमार को सौंप देते थे।
कानपुर से हुई एक और गिरफ्तारी
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने 10 अक्टूबर को कानपुर से उदित प्रताप सिंह भदौरिया को भी गिरफ्तार कर लिया, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात हो गई है। हिमांशु राणा और राहुल कुमार बैंक के दस्तावेज और किट गौरव पांडे को देते थे, जो आगे कमीशन के आधार पर इन्हें मैक्सवेल और सॉलिटेयर को मुहैया कराता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से मिलने वाली अवैध रकम को प्राप्त करने और उसे डायवर्ट करने के लिए किया जाता था।
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि इस गिरोह द्वारा केवल एक नहीं बल्कि तीन फर्जी शेल कंपनियों का संचालन किया जा रहा था, जिनके जरिए अब तक साइबर अपराध के जरिए 30 करोड़ रुपये की अवैध रकम खपाई जा चुकी है। मामले में आगे की जांच जारी है।